ईरान में विरोध करने पर कराटे चैंपियन समेत तीन लोगों को दी फांसी, जाने पूरा मामला
तेहरान। ईरान में हिबाज के खिलाफ चल रहे विरोध के बीच प्रदर्शन में शामिल लोगों को फांसी दी जा रही है। ईरान सरकार ने फिर से 3 प्रदर्शनकारियों को मौत की सजा दी है। इनमें ईरान के कराटे चैंपियन मोहम्मद मेहदी करामी भी हैं, जिन्हें निर्दयता से फांसी के फंदे पर लटका दिया गया था। ईरान की इस क्रूरता के आगे दुनिया खामोश है।
मोहम्मद मेहदी करामी और सैयद मोहम्मद हुसैनी को शनिवार की सुबह फांसी दे दी गई। जिनमें से एक कराटे चैम्पियन खिलाड़ी है, जबकि दूसरा बच्चों का खेल प्रशिक्षक (कोच) है। ईरान पिछले साल 16 सितंबर से विरोध प्रदर्शनों से हिल रहा है, जब 22 वर्षीय कुर्द लड़की महसा अमिनी की पुलिस हिरासत में संदिग्ध रूप से मौत हो गई थी। महसा अमिनी को 'हिजाब ठीक से नहीं पहनने' के आरोप में गिरफ्तार किया गया था।
दुनिया के तमाम ताकतवर देशों और संयुक्त राष्ट्र को नजरअंदाज कर ईरान मानवता पर सबसे क्रूर हमला कर रहा है। सिर्फ सरकार का विरोध करने और अपना हक मांगने के आरोप में अब तक 17 लोगों को फांसी दी जा चुकी है। ये सभी आंकड़े एक से दो महीने के ही हैं। इससे ईरान की क्रूरता का सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है।
करामी 21 साल की उम्र में ईरानी कराटे चैंपियन थे। उन्होंने अपने हाथ में एक ओलंपिक रिंग भी बनवा रखी थी। उनके कजिन ने बताया कि वह 11 साल की उम्र में कराटे में आ गए थे। उन्होंने ईरान में नेशनल चैंपियनशिप भी जीती थी। पिछले महीने करणी के माता-पिता ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो पोस्ट कर सरकार से उसकी जान बख्शने की मांग की थी। करामी को एक सप्ताह से भी कम समय तक चली सुनवाई के बाद 5 दिसंबर को दोषी ठहराया गया था। एमनेस्टी के मुताबिक हुसैनी को भी इसी आरोप में सजा सुनाई गई थी।
ईरान में सरकार के विरोध की वजह हिजाब को लेकर विरोध है। हिजाब पहनने के लिए सरकार के आदेश के खिलाफ ईरान में महिलाओं का विरोध जारी है। अब तक विरोध प्रदर्शन के दौरान पुलिस के साथ हुई हिंसा में दर्जनों लोग मारे जा चुके हैं। ईरान की महिलाओं को जबरन हिजाब पहनने पर मजबूर करना उनकी आजादी पर हमला बताया गया है। उनके समर्थन में पुरुषों की भी बड़ी आबादी आ गई है। इसके बावजूद ईरान की सरकार हिजाब के खिलाफ शुरू हुए आंदोलन को दबाना चाहती है। इसलिए वह प्रदर्शनकारियों को मौत की सजा दे रही है।
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