राज्यपाल कोश्यारी बोले- भाषाएं भले ही अलग हैं, लेकिन सबके भाव समान हैं

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सौ साल पहले बागेश्वर में अंग्रेजों के समय की बात से शुरू किया था अपना संबोधन

बरेली, अमृत विचार। बरेली क्लब में तीन दिवसीय उत्तरायणी मेले का उद्घाटन करने पहुंचे महाराष्ट्र के राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी बरेली में पर्वतीय समाज के भव्य आयोजन को देखकर काफी प्रसन्न नजर आए। कार्यक्रम में उन्होंने कुमाऊंनी में कई बातें कहीं। पंडाल में उपस्थित लोगों को मक्रर संक्रांति, घुघतिया त्योहार की शुभकामनाएं देते हुए उन्होंने अपनी बात शुरू की। कहा कि उत्तरायणी मेले में कई बार आ चुका हूं।

सौ साल पहले बागेश्वर में अंग्रेजों के समय की बात से संबोधन शुरू करते हुए कहा कि अंग्रेजों से डरकर कुली का काम करना पड़ता था। पंडित बद्रीदत्त पांडे ने कुली बेगार आंदोलन के लिए लोगों को तैयार किया था। उन्हें सफलता मिली और उससे लोग आजाद हुए थे। वर्तमान में प्रधानमंत्री देश की संस्कृति को आगे बढ़ाने का कार्य कर रहे हैं। कोश्यारी ने कहा कि पहले लोग मंडुवा, गहत, बाजरा की रोटी गरीबों का भोजन समझते थे, आज इसकी ताकत देशवासी समझ रहे हैं। मोटे अनाज में बाजरा, मंडुवा शरीर के लिए लाभदायक है। बोले- बरेली से उत्तराखंड की संस्कृति काफी मेल खाती है।

बरेली से किच्छा और हल्द्वानी ज्यादा दूर नहीं है। आज उत्तरायणी मेले के मंच पर जब छोटे बच्चों को नृत्य करते हुए देखा तो लगा कि इस तरह के आयोजन युवा पीढ़ी को संस्कृति के प्रति जागरूक करने के लिए बेहद जरूरी हैं। महाराष्ट्र, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश समेत अन्य राज्यों की भाषाएं भले ही अलग हैं, लेकिन सबके भाव समान हैं। अल्मोड़ा की बाल मिठाई आज मुंबई में भी खुशबू बिखेर रही है। पहले अल्मोड़ा के बाद हल्द्वानी में ही यह मिठाई बनती थी। हर जगह इस मिठाई के शौकीन हैं।

जोगी अब बने यूपी के योगी, बदमाशों की हो रही छुट्टी
बरेली। उत्तरायणी मेले के मंच से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली सरकार की तारीफ करते हुए भगत सिंह कोश्यारी ने हंसते हुए कहा कि जाेगी जब से यूपी के योगी बने हैं, तब से बदमाशों की छुट्टी हो रही है। बदमाश कांप रहे हैं। कल्याणकारी योजनाओं का लोगों का लाभ मिलने के साथ हर वर्ग खुद को सुरक्षित महसूस कर रहा है।

मेले के लिए पांच लाख देने की घोषणा की
संबोधन के अंत में हंसते हुए कहा कि जब उत्तराखंड में जहां भी जाता था तब लोग कहते थे कि भगतदा आए हैं, कुछ लाए होंगे, लेकिन राज्यपाल के पास देने के लिए कुछ नहीं होता है। इस मेले के आयोजन के लिए वह अपनी ओर से पांच लाख रुपये की घोषणा करते हैं। मेरे यहां आकर धनराशि ले जाएं।

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