Kanpur: बायोरेमिडियेशन के बाद भी गंगा में मिले हानिकारक तत्व, चार अंटैप्ड नालो का गंदा पानी कर रहा गंगा को दूषित
कानपुर में गंगा दूषित हो रही।
कानपुर में उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की पानी की जांच में खतरनाक रसायन मिले। बायोरेमिडियेशन के बाद भी गंगा में हानिकारक तत्व मिले। इसमें चार अंटैप्ड नालो का गंदा पानी लगातार गंगा के पानी को दूषित कर रहा।
कानपुर, [अभिषेक वर्मा]। बायोरेमिडियेशन के बाद भी नालों का पानी पूर्ण शोधित नहीं हो रहा है। गंगा में गिर रहे चार अंटैप्ड नाले गंगा को लगातार प्रदूषित कर रहे हैं। उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा की गई गंगा के पानी की जांच में खतरनाक रसायन मिले हैं।
जांच से पहले और उसके बाद में प्राप्त बीओडी, सीओडी और टीएसएस में बड़ा अंतर सामने नहीं आया है। जिसके बाद अधिकारियों ने निष्कर्ष निकाला है कि तैनात कंपनी द्वारा बायोरेमिडियेशन का कार्य सही से नहीं किया जा रहा है।
दिसंबर के अंतिम सप्ताह में लिया नमूना
जिला प्रशासन, जलनिगम गंगा प्रदूषण नियंत्रण, नगर निगम के अधकारियों ने दिसंबर के अंतिम सप्ताह में डब्का और गोलाघाट नाले का निरीक्षण किया था। दोनों की नालों में बायोरेमिडियेशन का कार्य हो रहा है। ऐसे में दोनों से निकले जल नमूना लिया गया था।
जिसे क्षेत्रीय प्रयोगशाला में परीक्षण के लिए ले जाया गया। जांच अब सामने आई तो अधिकारी भी चौंक गए हैं। नाले के पानी का बायोरेमिडियेशन के बाद रसायनिक विश्लेषण में बायोकेमिकल ऑक्सीजन डिमांड (बीओडी), रासायनिक ऑक्सीजन डिमांड (सीओडी), कुल निलंबित ठोस (टीएसएस) की मात्रा में कमी नहीं मिली है। जिससे गंगा के जल की गुणवत्ता में विपरीत प्रभाव पड़ रहा है।
फीकल (मल) कोलीफॉर्म का बढ़ा खतरा
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी इं. अमित मिश्रा ने बताया कि बायोरेमिडियेशन प्रक्रिया में टोटल कोलीफॉर्म और फीकल (मल) कोलीफॉर्म के शोधन की व्यवस्था नहीं है। जिससे गंगा के पानी में खतरा बढ़ता जा रहा है। नालों के पानी की जांच में फीकल (मल) कोलीफार्म पाए जाने की पुष्टि होने के बाद अधिकारी सतर्क हो गई है।
घरों से निकल कर नालों के जरिए गंगा तक पहुंच रहीं अशुद्धियां जहां पानी को दूषित कर रहीं हैं वहीं, इससे भू-गर्भ जल प्रदूषित होने का गंभीर खतरा पैदा हो गया है।
चार नालों का हो रहा बायोरेमिडियेशन
नगर में 16 नाले गंगा नदी में मिलते हैं। इसमें से अंटैप्ड चार नाले रानीघाट नाला, सत्ती चौरा नाला, गोलाघाट नाला, डब्का नाला पर बायोरेमिडियेशन का कार्य नगर निगम द्वारा अनुबंधित संस्था बायोआक्सीग्रीन टेक्नोलॉजी प्राइवेट लिमिटेड कर रही है। बायोरेमिडियेशन कार्य में लापरवाही बरतने, नियमित और सुचारू रूप से न करने पर नालों काअशोधित उत्प्रवाह गंगा नदी में निस्तारित हो रहा है।
पैरामीटर बीओडी सीओडी टीएसएस मिग्राली.
डब्का नाला
पहले 78 200 73
बाद में 72 180 68
गोलाघाट
पहले 66 190 67
बाद में 60 160 62
होना चाहिए 30 30 100
दो नालों के बायोरेमिडियेशन किए पानी की जांच की गई है। जिसकी रिपोर्ट संतोषजनक नहीं है। पाया गया है कि कंपनी सहीं से बायोरेमिडियेशन का कार्य नहीं कर रही है। जिससे गंगा में दूषित जल प्रवाहित हो रहा है।- ई. अमित मिश्रा, क्षेत्रीय अधिकारी
