Kanpur : कांपते हाथ अब नहीं संभालना चाहते असलहा, बढ़ती उम्र की वजह से बुजुर्गों का शस्त्रों से हो रहा मोह भंग
कानपुर में बुजुर्ग का शस्त्रों से मोह भंग हो रहा।
कानपुर में जिलाधिकारी कार्यालय के असलहा विभाग में बुजुर्गें लाइसेंस जमा कर रहे। ढलती उम्र और बीमारी की वजह से बुजुर्गों का शस्त्रों से मोह भंग हो रहा।
कानपुर, [मनीष तिवारी]। ढलती उम्र में बुजुर्गों का शस्त्रों से मोह भंग होने लगा है। अब वे कांपते हाथों से असलहा संभालना नहीं चाहते हैं। पिछले 30 महीने में करीब 600 बुजुर्गों ने अपने असलहों के लाइसेंस जिलाधिकारी कार्यालय में सरेंडर करा दिए हैं। कोविड काल के बाद से सबसे ज्यादा बुजुर्गों ने हथियारों से दूरी बनाई है।
जिले में असलहों के शौकीनों की कमी नहीं है। कानपुर में 40 हजार से ज्यादा लाइसेंस धारी हैं, इनमें गैर सरकारी लोगों की बात करें तो उनकी संख्या करीब 25 से 30 हजार है। खतरे से बचाव के लिए ही नहीं, कई लोग असलहों को शौक के तौर पर भी खरीदते हैं। कारोबारी ही नहीं राजनीतिक दलों, सामाजिक संगठनों से जुड़े लोग भी असलहा रखने का शौक रखते हैं। रौब और दिखावा भी इसकी बड़ी वजह मानी जाती है।
ग्रामीण क्षेत्रों में बंदूक, अधिया तो शहरी क्षेत्रों में पिस्टल-रिवाल्वर के शौकीन मिलते हैं। अपनी जवानी में शौकीन रहे कई बुजुर्गों का अब सेहत और बढ़ती उम्र को देखते हुए असलहों से मोह खत्म होने लगा है। बड़ी बात यह है कि पहले बुजुर्ग अपने असलहों को विरासत के तौर पर अपने वारिसों को ट्रांसफर कर देते थे, लेकिन अब इसको लेकर आवेदन कम आ रहे हैं और बुजुर्ग लाइसेंस सरेंडर कर असलहों से अपने बच्चों को भी दूर करते दिख रहे हैं।
जिलाधिकारी कार्यालय से मिली जानकारी के अनुसार 14 जुलाई वर्ष 2020 से अब तक 600 बुजुर्गों ने अपने असलहा लाइसेंस डीएम ऑफिस में सरेंडर कराए हैं।
कोरोना काल ने दूर कर दिया मौत का डर
केस-1
कल्याणपुर के रहने वाले 72 वर्षीय राम शंकर द्विवेदी बताते हैं कि कोरोना काल में कई अपनों को दुनिया से जाते देखा है। अब मौत से डर नहीं लगता है। जब डर नहीं तो सुरक्षा कैसी। इसलिए तीस वर्ष पहले लिया पिस्टल का लाइसेंस जमा करा दिया है।
केस-2
बर्रा के रहने वाले चंद्र प्रकाश बताते हैं कि उनकी उम्र अब 70 के पार हो चुकी है। उन्होंने 25 साल पहले बंदूक का लाइसेंस लिया था। वृद्धावस्था के चलते वह अक्सर बीमार रहते हैं और इस वजह से असलहा रखना नहीं चाहते।
तनाव से घिरे बच्चों को देखकर भी कई ले रहे यह निर्णय
बुजुर्गों का असलहा लाइसेंस जमा कराने के निर्णय की एक बड़ी वजह उनके बच्चों का तनाव से घिरे रहना भी है। पहले ज्यादातर बुजुर्ग असलहा अपने वारिसों को ट्रांसफर करवा देते थे, लेकिन विरासत से भी मोह भंग करते हुए अब बुजुर्ग यह निर्णय नहीं ले पा रहे हैं और तमाम ऐसी घटनाओं से सबक लेते हुए वह घर से असलहों को दूर करने का फैसला ले रहे हैं।
प्रमुख घटनाएं-
घटना-1
28 जून 2022 में घाटमपुर पतारा में 29 साल के शिवचरण ने गोली मारकर जान दे दी थी। उसके आत्महत्या करने की वजह तनाव बताई जाती है।
घटना-2
16 नवंबर 2022 को गुजैनी थाना क्षेत्र के अंबेडकर नगर निवासी सिपाही के बेटे अजीत सिंह ने गोली मारकर आत्महत्या कर ली थी। बताया जाता है कि वह कई दिन से डिप्रेशन में चल रहा था।
घटना-3
26 अगस्त 2021 में नवाबगंज बाजार में एक व्यवसायी के बेटा आशीष ने गोली मारकर जान दे दी थी। उसकी उम्र 30 वर्ष थी, उसके इस कदम से क्षेत्र के लोग भी हैरान थे।
