शाहजहांपुर: किशोरों में तेजी से बढ़ रही है नशाखोरी

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शाहजहांपुर, कुमार सौरभ। जिन युवाओं को देश का भविष्य कहा जाता है, व्यवस्था में छेद होने की वजह से नशे की दुनिया मे जाकर बर्बाद हो रहे हैं। किशोरों में नशाखोरी की प्रवृत्ति में तेजी से इजाफा हुआ है। इन बच्चों को घर के आस-पास ही ऐसा माहौल मिल जा रहा है जो नशे की लत …

शाहजहांपुर, कुमार सौरभ। जिन युवाओं को देश का भविष्य कहा जाता है, व्यवस्था में छेद होने की वजह से नशे की दुनिया मे जाकर बर्बाद हो रहे हैं। किशोरों में नशाखोरी की प्रवृत्ति में तेजी से इजाफा हुआ है। इन बच्चों को घर के आस-पास ही ऐसा माहौल मिल जा रहा है जो नशे की लत की ओर ढकेल रहा है। नशाखोरी की गिरफ्त में अधिकतर वह बच्चे आ रहे हैं, जो स्कूल नहीं जा रहे हैं या फिर किसी रोजगार में लग गए हैं। फिल्मी हस्तियों द्वारा मादक पदार्थों के प्रचार का भी बच्चों पर बुरा असर पड़ रहा है।

नशा शरीर मे दीमक का काम करता है, नशे का खर्च पूरा करने के लिये किशोर जरायम की दुनिया का रुख करते है। शिक्षा के अभाव के चलते कई परिवारों में तो माता पिता ही अपने बच्चों के सामने बीड़ी सिगरेट का नशा करते हैं और उनका बच्चा भी वहीं से सीख लेता है। कुछ लोग से बच्चों से सुर्ती बनवाते हैं।

इसके अलावा कम उम्र में काम की तलाश में निकले बच्चे जब शाम के वक्त मजदूरों के साथ एकत्र होते हैं तो वहीं पर सामूहिक रूप से नशे का दौर शुरू हो जाता है। हालांकि स्कूल जाने वाले बच्चे भी नशा कर रहे हैं, लेकिन इनकी संख्या कम है। ग्रामीण परिवेश में किशोर तेजी से नशाखोरी की प्रवृति बढ़ रही है। गांव में किशोरों को आसानी से तम्बाकू, बीड़ी, सिगरेट और पान मसाला मिल जता है।

पहले शौकिया फिर आदती बन जाते हैं बच्चे
कुछ तो मजबूरी में अपने बच्चों को रोजगार में लगा देते हैं। खेलने कूदने की उम्र में बच्चे रोजगार में लग जाते है। बच्चे लोगों की देख देखी नशा करते है फिर वह आदी हो जाते है।

किशोरों में तेजी से पनप रही नशे की लत बहुत घातक है, इसका सीधा असर मस्तिष्क पर होता है, मानसिक व शारीरिक क्षमता प्रभावित होती है। इसके लिये कही न कही सरकारों के दोहरे मापदंड भी कारण है। एक्ससाइज एक्ट के अनुसार नाबालिग को मादक द्रव्यों की बिक्री प्रतिबंधित है। उसके बाद भी किशोरों को मादक द्रव्य आसानी से मिल रहे है। -मुकेश कुमार सिंह परिहार, अध्यक्ष बाल कल्याणा समिति, शाहजहांपुर

किशोरों की काउंसलिंग है जरूरी
सामाजिक मूल्यों का पतन हो रहा है, नैतिकता कम हो रही है। किशोर मोबाइल का दुरुपयोग कर रहे हैं। सोशल साइट का गलत प्रभााव पड़ रहा है। 13 से 17 की यह नाजुक उम्र में जो चीजें बच्चों को नहीं पता चलनी चाहिए वह भी पता चल जाती है। जिसके लिए अभिभावक भी जिम्मेदार हैं। बच्चों को माता पिता क्वालटी समय नहीं दे रहे है।

बच्चों का मन बहुत ही कोमल होता है। जानकारी के अभाव में बच्चे इस दलदल में फंस जाते हैं। बच्चों को नशाखोरी से बचाने के लिए लोगों को जागरूक किया जाए। इससे होने वाले हानि के बारे में बच्चों को जानकारी दी जानी चाहिए और यदि लत पड़ गई हो तो उन बच्चों की काउसलिंग की जानी चाहिए। -डाॅ. आशिमा श्रीवास्तव, मनोवैज्ञानिक

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