Republic Day 2023: बोलीं मायावती- सरकारी अनाज पर निर्भरता लोगों की माली हालत का सूचक
लखनऊ। केंद्र सरकार के विकास और गरीबी उन्मूलन के दावे पर सवाल खड़े करते हुये बहुजन समाज पार्टी (बसपा) अध्यक्ष मायावती गुरुवार को कहा कि देश की करीब 100 करोड़ आबादी आज भी रोजी-रोज़गार के अभाव में सरकारी अनाज पर निर्भर है जो साबित करता है कि लोगों की आर्थिक हालत बेहतर होने के बजाय बिगड़ी है। गणतंत्र दिवस पर बधाई देते हुये मायावती ने कहा कि बाबा साहेब डा भीमराव अम्बेडकर के मानवतावादी संविधान की जनहित, जनकल्याणकारी व समतामूलक मंशा के अनुरूप देश विकास करे।
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— Mayawati (@Mayawati) January 26, 2023
इसके लिये सतत् प्रयास व अनवरत संघर्ष हर हाल में जारी रहेगा मगर जरूरी है कि केन्द्र व राज्य सरकारें इस मौके पर पूरी ईमानदारी से स्वंय का आकलन कर ज़रूर बतायें कि उन्होंने पिछले एक वर्ष के दौरान किये गये अपने वादों व संकल्पों को कितना निभाया है। उन्होंने कहा कि जनहित व विकास के सरकारी दावों और जमीनी हकीकत में काफी अन्तर होने से जनता व सरकार के बीच विश्वास की कमी बढ़ती ही जा रही है।
2.केन्द्र व राज्य सरकारें सर्वजन हिताय व सर्वजन सुखाय की इसी पवित्र भावना से काम करके देश को आगे बढ़ाएं और हर साल इस मौके पर अपना आकलन करके लोगों को जरूर बताएं कि उन्होंने गत वर्ष में किए गए अपने वादों व संकल्पों को कितना निभाया ताकि जनता में आत्मविश्वास व उत्साह का संचार हो। 2/2
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पहले यह हाल कांग्रेस की सरकार में था जो अब भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की सरकार में भी जारी है। देश के लगभग 100 करोड़ लोगों को सम्मानजनक रोजी-रोज़गार के अभाव में सरकारी अनाज पर ही निर्भर हो जाना यह साबित करता है कि देश के लोगों की आर्थिक हालत बेहतर होने के बजाय बिगड़ी है तथा विकास का सरकारी दावा ज्यादातर हवा-हवाई व छलावा है। ऐसे में देश कैसे प्रगति करेगा।
परमपूज्य बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर ने देश के संविधान में एक व्यक्ति एक वोट तथा हर वोट का एक मूल्य जैसा अद्भुत समतामूलक सिद्धान्त यहाँ देश में लागू करने का युग-परिवर्तनीय काम किया। आज राष्ट्रीय मतदाता दिवस पर भी अपने वोट से लोकतंत्र को मजबूत करने का संकल्प जरूर दोहराना चाहिए।
— Mayawati (@Mayawati) January 25, 2023
पूर्व मुख्यमंत्री ने सवालिया लहजे में कहा कि विश्व की पाँचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने का देश की आम जनता के जीवन पर क्या कोई असर पड़ रहा है। क्या देश की पूँजी में विकास हो रहा है। क्या लोगों की क्रय शक्ति बढ़ रही है। क्या लोगों के पास अपना जीवन सही से व्यतीत करने के लिए अपनी कमाई बढी है या घटी है। दूसरी ओर, सरकार जनता से कदम-कदम पर महंगी जीएसटी कर वसूल करके रिकार्ड जीएसटी टैक्स बटोरने को ही अपनी सफलता मान कर चल रही है, जबकि कुछ मुट्ठी भर लोगों को छोड़कर देश गरीबी, महंगाई व बेरोजगारी से त्रस्त है।
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