बरेली: खौफनाक... घर के बाहर खेल रहा था तीन साल का मासूम, खेतों में खींच ले गया कुत्तों का झुंड
नोचकर किया बुरी तरह घायल, नाजुक हालत में अस्पताल में भर्ती, कुछ ही समय पहले कुत्तों के हमलों में हो चुकी है दो मासूमों की मौत
सीबीगंज/बरेली, अमृत विचार। सीबीगंज इलाके में आवारा कुत्तों का खौफ कम होने का नाम नहीं ले रहा है। मंगलवार को बंडिया गांव में कुत्तों का झुंड घर के बाहर खेल रहे तीन साल के बच्चे को खींचकर करीब 50 मीटर दूर खेतों में ले गया और उसे बुरी तरह नोच डाला। गंभीर हालत में बच्चे को शहर के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया है। इसी गांव में आवारा कुत्ते हाल ही में दो बच्चों की जान ले चुके हैं।
बंडिया गांव में रहने वाले कमलेश का तीन साल का बेटा विवेक मंगलवार की दोपहर घर के बाहर खेल रहा था, तभी आठ-दस कुत्तों के झुंड ने उस पर हमला कर दिया। कुत्तों का झुंड विवेक को नोचते और खींचते हुए करीब 50 मीटर दूर खेतों में ले गया। कुत्तों के भौंकने के शोर के साथ बच्चे के रोने की आवाज सुनकर आसपास खेतों में काम कर रहे लोगों को ध्यान उधर गया तो उन्होंने कुत्तों को खदेड़कर बच्चे को बचाया और उसके घरवालों को सूचना दी। इस बीच कुत्तों ने बच्चे के सिर और सीने को नोचकर उसे बुरी तरह जख्मी कर दिया था।
परिवार के लोग बच्चे को लेकर जिला अस्पताल पहुंचे लेकिन उसकी हालत बिगड़ने लगी तो उसे एक निजी अस्पताल में रेफर कर दिया गया। बच्चे की हालत फिलहाल गंभीर बताई जा रही है। गांव वालों के मुताबिक आसपास के इलाके में आवारा कुत्तों का खौफ बेइंतिहा बढ़ चुका है। ये कुत्ते तमाम बच्चों पर हमला कर चुके हैं। कुछ ही समय पहले सात वर्षीय रोहिणी और छह वर्षीय मोरपाल की कुत्तों के बुरी तरह नोचने से मौत हो गई थी। अब भी बच्चों पर कुत्तों के हमले का लगातार सिलसिला बना हुआ है।
हर रोज वैक्सीन लगवाने पहुंचते हैं सौ से ज्यादा लोग : तीन सौ बेड अस्पताल में शुरू हुए एआरवी सेंटर में रोज कुत्ता, बंदर और बिल्ली के काटने के सौ से ज्यादा मरीज वैक्सीन लगवाने पहुंच रहे हैं। एआरवी सेंटर प्रभारी डॉ. वैभव के अनुसार दो महीने में सबसे ज्यादा केस कुत्ते के काटने के आए हैं। इनमें अधिकांश देहात के हैं। रोज 100 से 120 मरीजों को वैक्सीन लगाई जा रही है।
फिर भी गांव वालों की फरियादें रद्दी की टोकरी में
बंडिया गांव नगर निगम के वार्ड 27 का हिस्सा है। गांव वालों का कहना है कि वे लोग कई बार नगर निगम के अफसरों को आवारा कुत्तों के संकट के बारे में अवगत करा चुके हैं। कुत्तों के हमलों में दो बच्चों की मौत की खबर भी अफसरों को दी थी लेकिन फिर भी अफसरों ने इसे गंभीरता से नहीं लिया और आवारा कुत्तों को पकड़ने की जहमत नहीं उठाई। यही वजह है कि कुत्ते बच्चों पर लगातार हमला कर रहे हैं। कुत्तों का झुंड देखकर अक्सर बड़े लोगों की हिम्मत भी जवाब दे जाती है।
एक बार फिर घरों में कैद हुए छोटे बच्चे
मंगलवार को घटना के बाद गांव के लोगों ने एक बार अपने छोटे बच्चों को घर में कैद कर दिया। उन्हें हिदायत भी दे डाली कि वे किसी भी हालत में घर से बाहर खेलने नहीं जाएंगे। गांव वालों ने बताया कि पहले भी जब कुत्तों के हमले में दो बच्चों की मौत हुई थी तो बच्चों का काफी दिन तक घर से बाहर निकलना बंद कर दिया गया था लेकिन बाद में थोड़ी-बहुत देर के लिए बाहर जाने की छूट दे दी। अब फिर यह हादसा हो गया।
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