Kanpur: Summit से पहले भूमि की अदला-बदली को मंजूरी, मेगा लेदर क्लस्टर के लिए रमईपुर में दी जानी 35 हेक्टेयर भूमि
कानपुर में मेगा लेदर क्लस्टर के लिए रमईपुर में 35 हेक्टेयर भूमि दी जानी।
कानपुर में मेगा लेदर क्लस्टर के लिए रमईपुर में 35 हेक्टेयर भूमि दी जानी। समिट से पहले भूमि की अदला-बदली को मंजूरी है। उद्यमियों द्वारा प्रस्तावित भूमि के मूल्य आंकलन अधिकारी कर रहे।
कानपुर, अमृत विचार। रमईपुर गांव में प्रस्तावित मेगा लेदर क्लस्टर की स्थापना की राह की सबसे बड़ी बाधा 10 फरवरी से शुरू होने जा रही ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट से पहले ही दूर हो जाएगी। ग्राम समाज की सुरक्षित श्रेणी की 35 हेक्टेयर भूमि न मिल पाने की वजह से यह क्लस्टर अभी तक मूर्त रूप नहीं ले सका। केंद्र और राज्य सरकार के बढ़ते दबाव की वजह से अब उद्यमियों द्वारा प्रस्तावित भूमि से ग्राम समाज की भूमि की अदला- बदली करने पर अधिकारी तैयार हो गए हैं।
मंगलवार को मेगा लेदर क्लस्टर डेवलपमेंट यूपी लिमिटेड के डायरेक्टर अशरफ रिजवान से मुलाकात के बाद डीएम ने इसके संकेत दिए। उनके आदेश पर एसडीएम सदर की निगरानी में राजस्व टीम ने प्रस्तावित भूमि की दरों का आंकलन शुरू किया है। उद्यमियों को जितनी भूमि दी जानी है उतने सर्किल रेट की भूमि उद्यमी मनोह और सपई गांव में प्रशासन को देंगे। वह भूमि चरागाह के लिए आरक्षित की जाएगी।
रमईपुर में 102.258 हेक्टेयर में लेदर क्लस्टर बसाया जाना है। स्पेशल परपज व्हीकल के तहत गठित कंपनी को प्रशासन ने रमईपुर के पास सेन पूरब पारा गांव में ग्राम समाज की 42.02 हेक्टेयर भूमि पुनर्ग्रहीत कर दी है। कंपनी ने 22 हेक्टेयर भूमि किसानों से लिया है। 35.238 हेक्टेयर भूमि ग्राम समाज की सुरक्षित श्रेणी की है। इतनी मालियत की भूमि चरागाह के नाम सुरक्षित किए जाने के बाद यह भूमि उद्यमियों को मिलनी है।
नियमत: उद्यमियों को भूमि सदर तहसील में खरीदकर देनी थी, लेकिन उन्होंने नर्वल तहसील क्षेत्र के साढ़ गांव में भूमि खरीद लिया। परिणाम स्वरूप ग्राम समाज की भूमि से अदला- बदली का प्रस्ताव खारिज हो गया। अब उन्होंने मनोह और सपई गांव में भूमि खरीद ली है। तो उसकी मालियत का आंकलन मंगलवार को शुरू हो गया।
निदेशक अशरफ रिजवान ने बताया कि इन्वेस्टर समिट में इस प्रोजेक्ट की घोषणा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को करनी है। तय होना है कि वे इसकी आधारशिला कब रखेंगे। ऐसे में प्रशासन भी जल्द से जल्द अदला- बदली की प्रक्रिया को पूरा करना चाहता है। एमओयू हो चुका है। ऐसे में अब इसे मूर्त रूप देने की कवायद में प्रशासन भी जुट गया है। इस प्रोजेक्ट के लिए केंद्र सरकार से 325 करोड़ रुपये, 50 करोड़ रुपये राज्य सरकार देगी। 800 करोड़ रुपये का निवेश प्रथम चरण में होनी है।
