MP: इस्लाम नगर नहीं अब 'जगदीशपुर' कहिए जनाब, हत्या कर बदला था गांव का नाम

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Edited By Amrit Vichar
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भोपाल। मध्य प्रदेश के भोपाल जिले के इस्लाम नगर गांव का नाम तत्काल प्रभाव से बदलकर जगदीशपुर कर दिया गया है। भोपाल से 14 किलोमीटर दूर ऐतिहासिक धरोहर को समेटे है खूबसूरत गांव। 17वीं शताब्दी में बने किले को देखने यहां देश-दुनिया के लोग पहुंचते हैं। कल यानी बुधवार तक इसका नाम इस्लाम नगर था। अब यह फिर से अपने पुराने नाम जगदीशपुर से पहचाना जाएगा। केंद्र सरकार ने गांव का नाम जगदीशपुर करने की हरी झंडी दे दी है।

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राज्य सरकार ने भी बुधवार को नोटिफिकेशन जारी कर गांव का नाम बदलकर जगदीशपुर कर दिया है। जगदीशपुर से इस्लाम नगर बनने की रोंगटे खड़ी करने वाली कहानी है। औरंगजेब की सेना के भगोड़े सैनिक दोस्त मोहम्मद खान ने 308 साल पहले इसका नाम इस्लाम नगर किया था। इसका नाम वापस जगदीशपुर करने की फाइलें 30 साल से चल रही थी।

दोस्त मोहम्मद अफगानिस्तान के खैबर के तीराह का रहने वाला था। 1696 में वह उत्तर प्रदेश के जलालाबाद आ गया। वह इतना क्रोधी स्वभाव का था कि छोटी सी बात पर हुए झगड़े में उसे ही शरण देने वाले अमीर जलाल खान के दामाद को सरेआम मार डाला। वहां से भागकर वह करनाल और फिर दिल्ली चला गया। यहां मुगल सेना में भर्ती हो गया।

मुगल और मराठा युद्ध के चलते दोस्त मोहम्मद 1703 में मालवा आ गया। यहां उसने अपने हथियार आदि विदिशा के शासक मोहम्मद फारूख के पास जमा कर दिए और मामूली झगड़े के बाद उसकी भी हत्या कर दी। इसके बाद वह मंगलगढ़ में शरण पाने में सफल हो गया और वहां के महाराज-महारानी के साथ महल में रहने लगा

मंगलगढ़ के महाराज की मृत्यु हो जाने पर दोस्त मोहम्मद ने मंगलगढ़ को भी लूट लिया और सारा खजाना लेकर बैरसिया आ गया। यहां भी अपने स्वभाव के अनुरूप उसने यहां के सूबेदार ताज मोहम्मद से पहले तो बैरसिया को लीज पर लिया और बाद में उसे भी धोखा देकर बैरसिया पर कब्जा जमा लिया।

जगदीशपुर में 11वीं सदी के परमार कालीन मंदिर के पत्थर और मूर्तियां मिलती हैं। सम्भव है कि यहां परमार काल में मंदिर रहे होंगे। परमारों के उपरांत यह क्षेत्र गढ़ा-मंडला जबलपुर के गोंड राजा संग्राम शाह के बावन गढ़ों में से एक था, इसलिए यहां पर एक गोंड महल भी है। गोंड शासन के बाद यह गढ़ और किला देवड़ा राजपूतों के अधीन रहा। 1715 में दोस्त मोहम्मद खान ने जगदीशपुर पर आक्रमण किया, लेकिन उसे सफलता नहीं मिली।

राजपूतों पर आक्रमण में असफल रहे दोस्त मोहम्मद ने अपने स्वभाव के अनुरूप षड्यंत्र का सहारा लिया। उसने राजपूत शासक देवरा चौहान को बेस नदी के किनारे सहभोज के लिए बुलाया। जब सभी देवरा चौहान समेत राजपूत मेहमान रात्रिभोज कर रहे थे, तभी तम्बू की रस्सियां काट दी गईं और सभी राजपूतों को हलाल कर दिया गया। कहते हैं कि इतना खून बहा कि नदी का पानी लाल हो गया और तभी से यह नदी हलाली के नाम से जानी जाने लगी। इस तरह धोखे से जगदीशपुर पर दोस्त मोहम्मद ने कब्जा कर लिया और उसका नाम बदलकर इस्लामनगर कर दिया।

इस गांव का बॉलीवुड से भी कनेक्शन है। किले के कारण यहां कई छोटी-बड़ी फिल्मों की शूटिंग हो चुकी है। इनमें भूमि पेडनेकर की फिल्म दुर्गामति प्रमुख है। इस फिल्म के पोस्टर में अभिनेत्री को जिस दरवाजे के सामने बैठा दिखाया गया है, वह गोंड महल का मुख्य गेट है।

इस्लाम नगर किले को घेर कर चारों तरफ से सुरक्षा दीवार बनी हुई है। इसे देखने के लिए पर्यटकों को मप्र सरकार के बनाए गए काउंटर से 10 रुपए प्रतिव्यक्ति का टिकट लेना होता है। पहले रानी महल है। प्राचीन समय में यहां पर रानी रहा करती थीं। इसके पास में चमन महल है। दोनों महलों के बीच सुंदर बगीचे देखते ही बनते हैं।

किले के पीछे की तरफ नदी है, जिसका पानी प्रदूषित होकर काला हो चुका है। चमन महल के पीछे की ओर दोस्त मोहम्मद खां के दो बेटे यार मोहम्मद खां और हयात मोहम्मद खां का मकबरा है। भोपाल के पास स्थिति यह गांव बैरसिया से सूखी सेवनिया के रास्ते विदिशा जाने वाले हाईवे के बाईं ओर है। सड़क पर दो बड़े बोर्ड लगे हैं, एक बोर्ड पर विधायक की तस्वीर के साथ लिखा है जगदीशपुर में आपका स्वागत है। दूसरा बोर्ड पर्यटन विकास निगम का है, जिस पर इस्लाम नगर की दूरी लिखी है। गांव की ओर दो किलोमीटर बढ़ने पर 17वीं शताब्दी में बना एक किला दिखता है, जो इस गांव की पहचान है। वर्तमान में यह पुरातत्व विभाग के अंडर में है।

यह गांव किले के अंदर तीन हिस्सों में बसा है। किले का बाहरी हिस्सा छावनी है। इसके बाद मिडिल फोर्ट और कोर किला एरिया है। गांव में मकान दूर- दूर बने हैं। 2011 की जनगणना के अनुसार इस्लाम नगर की आबादी साढ़े तीन हजार है। नाम बदलने को लेकर गांव में भी चर्चा है। वन विभाग से रिटायर्ड मनोहर जैन किराने की दुकान चलाते हैं। जगदीशपुर का जिक्र करते ही कहते हैं- यही तो इसकी पहचान है। गांव के सभी लोगों की यही इच्छा थी कि पुरानी पहचान लौटे।

हालांकि गांव का नाम बदलने को लेकर सरकारी फाइलें 30 साल से चल रही थीं। एक सरकारी चिट्‌ठी के मुताबिक हूजूर तहसीलदार 19 अगस्त 1993 को अपने प्रतिवेदन में बता चुके थे कि नाम बदलने के लिए ग्राम पंचायत प्रस्ताव पारित कर चुकी है। पत्र में खास तौर पर यह भी लिखा था - ग्राम का नाम बदलना ग्रामवासियों को स्वीकार है। वह चाहते हैं जल्द नाम बदल दिया जाए। ऐसा करने से गांव में तनाव की स्थिति भी नहीं होगी।

बैरसिया विधायक विष्णु खत्री बताते हैं- हमने साल 2008 में भी प्रस्ताव भेजा था। राज्य सरकार ने सहमति दे दी थी, लेकिन तत्कालीन यूपीए सरकार ने एनओसी (अनापत्ति प्रमाण पत्र) नहीं दी। 2014 में फिर से केंद्र सरकार से एनओसी मांगी। सर्वे ऑफ इंडिया ने जुलाई 2021 में और गृह मंत्रालय ने बीते साल सितंबर में अपनी एनओसी जारी की थी। प्रदेश सरकार से इस्लाम नगर के नए नाम जगदीशपुर का गजट नोटिफिकेशन जारी करने को कहा था, इसके बाद सरकार ने नोटिफिकेशन जारी कर दिया।

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