बरेली: झूठ बोले रहे थे जल निगम के अफसर, अब मिला अनापत्ति प्रमाण पत्र

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Edited By Amrit Vichar
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पीडब्ल्यूडी के अधिकारी भी मौके पर पहुंचे, 28 जनवरी से बंद चल रहा था काम

बरेली, अमृत विचार। एनओसी मिलने के बाद गुरुवार से एक बार फिर नमामि गंगे प्रोजेक्ट के तहत पीलीभीत रोड पर सीवर लाइन बिछाने का कार्य शुरू हो गया। इसके साथ ही जल निगम व कार्यदायी संस्था के जिम्मेदारों का झूठ भी उजागर हो गया। तमाम झमेलों से बचने के लिए बिना एनओसी के ही कार्यदायी संस्था ने मानक ताक पर रखकर रोड पर खोदाई शुरू कर दी थी। इस वजह से काम रोकना पड़ा था।

दरअसल, पीडब्ल्यूडी के एक्सईएन ने खोदाई से पहले संयुक्त सर्वे कराने को जल निगम के एक्सईएन को लिखे पत्र में कहा था कि अवर अभियंताओं के साथ चयनित मार्गों का सर्वे होने पर ही एनओसी दी जाएगी, लेकिन इसी पत्र को एनओसी मिलना बताकर कार्यदायी संस्था ने जल निगम के अफसरों से साठगांठ कर उच्चाधिकारियों को गुमराह किया। पीलीभीत रोड पर खोदाई शुरू कर दी। जल निगम की लापरवाही से सड़क खुदी पड़ी रही और लोगों को जाम से जूझना पड़ा। कई दिनों बाद जब काम शुरू हुआ तो पीडब्ल्यूडी प्रांतीय खंड के एक्सईएन नारायण सिंह भी मौजूद रहे।

केंद्र सरकार के महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट में शामिल नमामि गंगे परियोजना के तहत हरुनगला में नकटिया नदी किनारे एसटीपी (सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट) लगाया जा रहा है। कार्यदायी संस्था इनवायरो इन्फ्रा इंजीनियर्स प्राइवेट लिमिटेड कंपनी ने पिछले शुक्रवार को पीलीभीत रोड के धौरेरा माफी मोड़ से महानगर तक सीवर लाइन डालने का काम शुरू किया था। इसके लिए सड़क किनारे बैरीकेडिंग लगाकर पीलीभीत से आने वाले वाहनों के लिए एक लेन को पूरी तरह बंद कर दिया था। इसके बाद बमुश्किल 50 मीटर खोदाई हो पाई कि पीडब्ल्यूडी के एक्सईएन की ओर से पत्र जारी किया गया कि सड़क की खोदाई संयुक्त सर्वे के बाद ही होने दी जाएगी।अगर इससे पहले खोदाई की गई तो एफआईआर दर्ज करा दी जाएगी। इस चेतावनी के बाद कार्यदायी संस्था ने 28 जनवरी को काम रोक दिया था।

कार्यदायी संस्था के सहायक प्रबंधक पीयूष राघव का कहना था कि 5 नवंबर को पीडब्ल्यूडी की ओर से एनओसी जारी की गई थी। उसी आधार पर काम आरंभ किया। बाद में मनमानी करते हुए अधिकारी अपनी बात से पलट गए और संयुक्त सर्वे कराने की बात कहने लगे थे।

नियमों की अनदेखी पर हो सकती है कार्रवाई
बिना एनओसी कार्य आरंभ करने के पीछे कार्यदायी संस्था की बड़ी लापरवाही उजागर हुई है। सूत्रों की मानें तो एनओसी मिले बिना कार्य इसलिए आनन-फानन में शुरू किया गया था, क्योंकि कई प्रक्रियाएं पूरी करने में काफी समय लगता। दूसरी तरफ, नमामि गंगे प्रोजेक्ट केंद्र सरकार का ड्रीम प्रोजेक्ट है। जिसे 2024 तक पूरा करने का लक्ष्य है। इसलिए बिना किसी तकनीकी जांच और समय बचाने के चक्कर में मानकों की अनदेखी की गई। सीवर लाइन का कार्य अब भले ही शुरू हो गया हो लेकिन कार्यदायी संस्था के जिम्मेदारों पर कार्रवाई भी तय मानी जा रही है।

233.72 करोड़ से बनेगा एसटीपी
हरुनगला के नकटिया नदी पर बनने वाला एसटीपी 42 एमएलडी क्षमता का होगा। इस पर 233.72 करोड़ रुपये की धनराशि खर्च होगी। अफसरों का कहना है कि एसटीपी बनने के बाद 15 साल तक कार्यदायी संस्था ही इसकी देखरेख करेगी। यदि इस दौरान कोई गड़बड़ी हुई तो उसे सुधारने की भी जिम्मेदारी कंपनी की होगी। 18 किलोमीटर लंबी सीवर लाइन बिछाने का काम 2024 में पूरा होगा।

संयुक्त सर्वे के बाद जल निगम को एनओसी दे दी गई है। सीवर लाइन के लिए सड़क खोदाई का काम भी शुरू कर दिया गया है। मौके पर जाकर निरीक्षण किया। चयनित मार्गों पर जहां-जहां खोदाई होगी, वहां पीडब्ल्यूडी के अवर अभियंता नजर रखेंगे- नारायण सिंह, एक्सईएन, पीडब्ल्यूडी।

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