अंग्रेजों के जमाने के गैर जरूरी कानूनों को करेंगे खत्म: रिजिजू
प्रयागराज। केंद्रीय कानून और न्याय मंत्री किरेन रिजिजू ने शनिवार को कहा कि अंग्रेजों के जमाने के गैर जरूरी कानूनों को पूरी तरह से समाप्त किया जाएगा। इलाहाबाद उच्च न्यायालय बार एसोसिएशन के 150वें स्थापना दिवस समारोह के समापन सत्र में संबोधित करते हुये रिजिजू ने कहा कि अंग्रेजों के जमाने के गैर जरूरी कानूनों को पूरी तरह से समाप्त किया जाएगा और अंग्रेजों का नाम हर जगह से हटाया जाएगा। उसकी प्रक्रिया चल रही है।
अंग्रेजों के पुराने कानूनों को जिनका कोई उद्देश्य नहीं था, कुछ हटाये भी गये हैं। उन्होने कहा कि अंग्रेजी भाषा बोलने से पहले दिमाग की सोच महत्वपूर्ण है। अगर मात्रा भाषा में सोचेंगे तो अंग्रेजी में भी बोलेंगे तब मूल भावना हिन्दुस्तानी ही होगी। अंग्रेजी सोच के साथ अगर अंग्रेजी बोलेंगे तब सोच अंग्रेजी हो जाएगा।
उन्होने कहा कि कई जगह देखने को मिला है कि देश में रहकर भी सोच बाहरी है। यह बहुत चिंता का विषय है। इस देश में हिन्दी बोलने वाले 50 करोड़ से अधिक हैं जो लोग मात्रभाषा हिंदी मानते हैं। चीन एक देश है जो हिंदी से अधिक अपनी भाषा बोलने वाला देश है। उच्चतम न्यायालय और केंद्र सरकार के बीच चल रही खींचतान की ओर इशारा करते हुए रिजिजू ने कहा “ कोई किसी को धमका नहीं सकता। सरकार और कोर्ट दोनों जनहित में करते हैं।
हम जनसेवक हैं, हमको अपनी बात कहने का पूरा अधिकार है। हम जनता के हित की बात करते हैं। न्यायालय भी जनहित में काम करती है। उन्होंने हिन्दी भाषा की वकालत करते हुए कहा कि आम लोगों की सहूलियत के लिए निचली अदालत और उच्च न्यायालय की तरह उच्चतम न्यायालय में हिंदी में बहस और उसका आदेश उपलब्ध कराने की दिशा में काम किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि इलाहाबाद उच्च न्यायालय का पुराना गौरवशाली इतिहास रहा है। हमें इसके गौरवशाली इतिहास को बरकरार रखना होगा। उन्होंने न्यायालयों में बडी संख्या में लंबित पड़े मामलों पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि हमें इससे बचना होगा। कभी कभी न्यायाधीश और अधिवक्ताओं पर भी इसका दोषारोपण मढ़ दिया जाता है। इसके लिए कई प्रकार की योजनाओं पर काम चल रहा है। इससे न्यायालयों पर मुकदमों का बोझ कम होगा। देश में अलग अलग न्यायालयों में करीब चार करोड़ नब्बे लाख मामले लंबित पड़े है।
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