शाहजहांपुर: कोरोना वायरस का असर- धूम-धाम से नहीं मनाई जाएगी श्रीकृष्ण जन्माष्टमी
शाहजहांपुर, अमृत विचार। कोरोना वायरस के कारण सभी त्योहार फीके पड़तें नजर आ रहा है। सावन के बाद अब भादो के भी सभी त्योहार कोरोना के भेंट चढ़ने जा रहे हैं। भादो में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी बहुत धूमधाम से मनाई जाती है। 11 व 12 अगस्त को श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का पर्व इस बार उस समय पड़ा, …
शाहजहांपुर, अमृत विचार। कोरोना वायरस के कारण सभी त्योहार फीके पड़तें नजर आ रहा है। सावन के बाद अब भादो के भी सभी त्योहार कोरोना के भेंट चढ़ने जा रहे हैं। भादो में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी बहुत धूमधाम से मनाई जाती है। 11 व 12 अगस्त को श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का पर्व इस बार उस समय पड़ा, जब कोरोना अपने चरम पर है। कोरोना संक्रमण की वजह से मंदिरों में भीड़-भाड़ न हो इस वजह से मंदिरों में संस्कृतिक कार्यक्रम नहीं होंगे। कोविड-19 की गाइड लाइन के हिसाब से जन्माष्टमी मनाई जाएगी।
भादो मास की कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को रोहिणी नक्षत्र में श्रद्धालु भगवान कृष्ण का जन्मोत्सव मनाते हैं, लेकिन इस बार तिथि को लेकर श्रद्धालुओं में असमंजस की स्थिति बनी हुई है। ऐसा इसलिए है, क्योंकि इस बार अष्टमी तिथि में रोहिणी नक्षत्र संयोग नहीं बन रहा है। ज्योतिषियों के मुताबिक, गृहस्थ लोग 11 अगस्त को जबकि वैष्णव (साधु-संत) 12 अगस्त को जन्माष्टमी का पर्व मनाएंगे।
इस तरह करें व्रत-पूजन
ज्योतिर्विद पंडित अनिल अग्निहोत्री ने बताया कि श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के दिन प्रात काल स्नानादि से निवृत्त होने के बाद पूजन-अर्चन कर व्रत का संकल्प करें। भगवान श्रीकृष्ण की चित्र स्थापित कर झांकी सजाएं। इसके बाद विधि-विधान से पूजन करें। मध्य रात्रि 12 बजे जन्मोत्सव मनाएं। अंत में प्रसाद वितरण कर भजन-कीर्तन करते हुए रात्रि जागरण करें। ऐसी मान्यता है कि जन्माष्टमी का व्रत करने से व्यक्ति को बाल कृष्ण जैसी संतान प्राप्त होती है।
11 अगस्त को गृहस्थ लोग रखें व्रत
ज्योतिषाचार्य पंडित अनिल अग्निहोत्री ने बताया कि गृहस्थों को उस दिन व्रत रखना चाहिए जिस रात को अष्टमी तिथि लग रही है। पंचांग के अनुसार, 11 अगस्त दिन मंगलवार को गृहस्थ आश्रम के लोगों को जन्माष्टमी का पर्व मनाना सही रहेगा, क्योंकि 11 की रात को अष्टमी है। गृहस्थ लोग रात में चंद्रमा को अर्घ्य दें, दान और जागरण कीर्तन करें। 12 अगस्त को व्रत का पारण करें और कृष्ण जन्मोत्सव धूमधाम से मनाएं। वहीं वैष्णव लोग 12 को श्रीकृष्ण जन्माष्टमी मनाएं।
नहीं बन रहा रोहिणी और अष्टमी का संयोग
पंडित अनिल अग्निहोत्री के अनुसार भगवान कृष्ण का जन्म अष्टमी तिथि को रोहिणी नक्षत्र में हुआ था। कई बार ऐसा होता है ये दोनों संयोग एक साथ नहीं बन पाते। इस बार भी कृष्ण जन्म की तिथि और नक्षत्र एक साथ नहीं मिल रहे हैं। 11 अगस्त को सुबह नौ बजकर छह मिनट के बाद अष्टमी तिथि का आरंभ हो जाएगा, जो 12 अगस्त को 11 बजकर 17 मिनट तक रहेगी। वहीं रोहिणी नक्षत्र का आरंभ 13 अगस्त को सुबह तीन बजकर 27 मिनट से पांच बजकर 22 मिनट तक रहेगा।
