Kanpur: मौसम में बदलाव होते ही खांसी का हमला, गले में दर्द के संग जलन के मरीज पहुंच हैलट और उर्सला अस्पताल
कानपुर के हैलट और उर्सला अस्पताल में गले के आ रहे काफी मरीज।
कानपुर में मौसम में बदलाव होते ही खांसी का हमला तेज हो गया। हैलट और उर्सला अस्पताल में गले में दर्द के संग जलन और खाना निगलने में कठिनाई के काफी मरीज आ रहे।
कानपुर, अमृत विचार। मौसम में हो रहे बदलाव के साथ संक्रामक रोग फिर से संक्रिय होने शुरू होने लगे हैं। हैलट, उर्सला और कांशीराम संयुक्त चिकित्सालय में सर्दी, जुकाम, खांसी और सांस फूलने की समस्या लेकर काफी मरीज आ रहे हैं। सबसे अधिक दिक्कत खांसी, गले में दर्द, खाना निगलने में कठिनाई की आ रही है। खांसी को ठीक होने में 10 से 15 दिन का समय लग रहा है। डॉक्टरों को एंटीबायोटिक दवाएं चलानी पड़ रही हैं। सांस लेने में कठिनाई, पेट में दर्द, चक्कर आने की समस्या पर कई मरीजों को भर्ती किया गया।
जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के मेडिसिन विभाग के प्रो. जेएस कुशवाहा ने बताया कि सोमवार की ओपीडी में 35 मरीजों को भर्ती किया गया। इसमें सांस के कई रोगी थे। दो मरीजों को आईसीयू में शिफ्ट करना पड़ा। लिवर, गुर्दा फेल और तेज बुखार की समस्या पर मरीजों को भर्ती किया गया। सुबह शाम सर्दी और दोपहर को तेज गर्मी के चलते लोग बीमारियों की चपेट में आने लगे हैं।
एकदम से कपड़े उतारने का असर स्वास्थ पर पड़ रहा है। बुजुर्ग और कमजोर रोग प्रतिरोधक क्षमता वाले लोग चपेट में आ रहे हैं। छोटे बच्चों में निमोनिया और पसली चलने की दिक्कत मिल रही है। उर्सला अस्पताल के सीएमएस डॉ. शैलेंद्र तिवारी ने बताया कि इमरजेंसी में सर्दी और बुखार के लक्षणों के साथ काफी मरीज आ रहे हैं। उनमें सांस की दिक्कत काफी मिल रही है। ओपीडी में खांसी और गले में संक्रमण के अधिक रोगी आ रहे हैं।
मरीजों को मिलेगी ई-एंबुलेंस की सुविधा
हैलट अस्पताल में अब तिमारदारों को मरीजों को स्ट्रेचर पर लेकर एक वार्ड से दूसरे वार्ड में नहीं घूमना पड़ेगा। यहां ई-एंबुलेंस की सुविधा शुरू होने जा रही है। मंगलवार को अस्पताल प्रशासन को दो ई-एंबुलेंस और एक मोटर कचरा गाड़ी मिल जाएगी। इसके निर्माण एवं परिचालन में सर्जरी विभाग के असिस्टेंट प्रो. अनुराग सिंह का विशेष योगदान रहा है। इन गाड़ियों के प्रयोग से प्रदूषण नहीं फैलेगा। हैलट प्रशासन द्वारा ऐसे और कई वाहन जल्द ही शुरू करने की तैयारी की जा रही है।
