रामपुर : बेटे को विधायक बनाने के लिए उम्र बढ़ाने का मामला जा चुका है सर्वोच्च न्यायालय तक
हाईकोर्ट से भी रद हो चुकी अब्दुल्ला की विधायकी, लग चुकी सुप्रीम मुहर
रामपुर, अमृत विचार : पूर्व मंत्री आजम खां के बेटे अब्दुल्ला आजम की विधायकी एक बार हाईकोर्ट से भी रद हो चुकी है। 2017 में अब्दुल्ला की उम्र 25 साल से कम थी। तब सीबीएसई दसवीं की अंक तालिका पर दर्ज जन्म तिथि एक जनवरी 1993 थी। जबकि नामांकन नियम के हिसाब से नामांकन भरते वक्त उनकी उम्र 25 साल से ज्यादा होनी चाहिए थी, लेकिन 25 साल की उम्र पूरी होने में नौ माह का वक्त बाकी था।
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लिहाजा लखनऊ नगर निगम की ओर से जारी प्रमाण पत्र के आधार पर नामांकन पत्र भरा गया था। हाईकोर्ट ने सीबीएसई के अंक पत्र को सही माना था और अब्दुल्ला की विधायकी को रद कर दिया था। मार्कशीट के खुलासे के बाद तमाम सवाल उठने लगे थे। कि असली मार्कशीट है या फिर उस वक्त पेश किया गया लखनऊ नगर निगम की ओर से जारी किया गया जन्म प्रमाण पत्र। फिलहाल यह विवाद गहरा गया था।
इस मामले को स्वार टांडा के पूर्व विधायक काजिम अली खां नवेद मियां ने हाईकोर्ट में भी उठाया था। हाईकोर्ट में इसको लेकर रिट भी दायर की थी। पूर्व मंत्री आजम खां ने विधानसभा चुनाव में अपने बेटे अब्दुल्ला आजम खां को स्वार सीट से सपा प्रत्याशी बनाया था। नामांकन पत्रों की जांच के दौरान बसपा प्रत्याशी रहे नवाब काजिम अली खां ने सपा प्रत्याशी की उम्र कम होने का दावा पेश किया था, लेकिन निर्वाचन अधिकारी के सामने नवेद मियां कोई सुबूत पेश नहीं कर पाए थे।
इस बीच निर्वाचन अधिकारी के समक्ष अब्दु्ल्ला आजम की ओर से जन्म प्रमाण पत्र प्रस्तुत किया गया था। लखनऊ नगर निगम की ओर से जारी किए गए प्रमाण पत्र में उस वक्त उनकी जन्म तिथि 30 सितंबर 1990 दिखाई गई थी, जिसके अनुसार उस वक्त उनकी उम्र 26 साल चार माह की मान ली गई थी। निर्वाचन अधिकारी ने उन्हें क्लीन चिट देते हुए चुनाव लड़ने की अनुमति प्रदान कर दी थी।
इसके बाद अब्दुल्ला आजम ने चार बार विधायक रहे नवाब काजिम अली खां को भारी मतों के अंतर से पराजित कर दिया था। काजिम अली ने हाईकोर्ट में उम्र को लेकर रिट दायर की। जिसमें अब्दुल्ला की सीबीएसई द्वारा 2007 में जारी की गई हाईस्कूल की मार्कशीट पेश की है, जिसमें उनकी उम्र में एक जनवरी 1993 दर्शायी गई थी।
यानि इस हिसाब से उनकी उम्र नामांकन के वक्त 24 वर्ष व एक माह बैठ रही थी। हाईकोर्ट ने 16 दिसंबर 2019 को इसी रिट के आधार पर अब्दुल्ला की विधायकी रद कर दी थी। अब्दुल्ला ने सुप्रीम कोर्ट में हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ अपील की, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने अपील खारिज कर दी। पुनर्विचार याचिका भी खारिज करते हुए हाईकोर्ट के आदेश को यथावत माना था।
विधायक आकाश सक्सेना द्वारा दर्ज जन्म प्रमाण पत्र मामले में जारी है गवाही: विधायक आकाश सक्सेना ने जन्म प्रमाण पत्र मामले में एक रिपोर्ट गंज थाने में दर्ज कराई थी। इसमें आरोप पत्र दाखिल होने के बाद आरोप तय हो चुके हैं। गवाही चल रही है। इस मामले में अब्दुल्ला के साथ आजम खां और उनकी पत्नी डा तजीन फात्मा भी आरोपी हैं।
सवाल यह है कि जिस मामले में हाईकोर्ट अब्दुल्ला की विधायकी रद कर चुका है, उस मामले में अब्दुल्ला कैसे साबित करेंगे कि लखनऊ नगर निगम से जारी जन्म प्रमाण पत्र ही सही है और उनकी जन्म तारीख 30 सितंबर 1990 है।
2019 से बढनी शुरू हो गईं आजम खां की मुश्किलें: सपा नेता आजम खां की मुश्किलें 2019 से बढनी शुरू हो गईं थी। उन्होंने लोकसभा चुनाव प्रचार के दौरान तत्कालीन जिलाधिकारी और वर्तमान में मुरादाबाद मंडल के मंडलायुक्त आंजनेय कुमार सिंह समेत तमाम अधिकारियों के लिए अपमानजनक शब्दों का प्रयोग किया था।
जिसके बाद उनके खिलाफ भडकाऊ भाषण देने के आरोप में मुकदमा भी दर्ज हुआ था। इसी मामले में कोर्ट ने उन्हें तीन साल की कैद और छह हजार रुपये जुर्माना अदा करने की सजा सुनाई है। उनके खिलाफ विभिन्न धाराओं और थानों में सौ से अधिक मुकदमे दर्ज हैं।
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