उप्र: अधिशासी और अधीक्षण अभियंताओं के लापरवाह रवैये से जलते हैं ट्रांसफॉर्मर

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अमित सिंह, लखनऊ। उत्तर प्रदेश पॉवर कार्पोरेशन के अधिशासी अभियंता और अधीक्षण अभियंता सचेत हो जाए तो करीब 80 फीसदी ट्रांसफॉर्मरों को जलने या फुंकने से बचाया जा सकता है। इन अधिकारियों की लापरवाह रवैये की वजह से प्रदेश के करीब हर एक बिजली घर से पांच से सात की संख्या में ट्रांसफॉर्मर फुंक रहे …

अमित सिंह, लखनऊ। उत्तर प्रदेश पॉवर कार्पोरेशन के अधिशासी अभियंता और अधीक्षण अभियंता सचेत हो जाए तो करीब 80 फीसदी ट्रांसफॉर्मरों को जलने या फुंकने से बचाया जा सकता है। इन अधिकारियों की लापरवाह रवैये की वजह से प्रदेश के करीब हर एक बिजली घर से पांच से सात की संख्या में ट्रांसफॉर्मर फुंक रहे हैं। ये वीआईपी शहरों के आंकड़े हैं गांवों और कस्बों के तो आंकड़े और भी खराब होंगे।

जिम्मेदार और विभाग के प्रति समर्पित अधिकारी बताते हैं कि ट्रांसफॉर्मरों के जलने या फुंकने का मुख्य कारण है स्टोरों से सामानों का सही समय या तय समय से नहीं मिल पाना। जबकि इन स्टोरों से सामानों को अवर अभियंताओं, बिजली घरों और संबंधित कर्मचारियों को समय से दिलाने की जिम्मेदारी अधीक्षण अभियंता और अधिशासी अभियंताओं की होती है। जिसमे ये दोनों अभियंता अभी तक फेल साबित हुए हैं।

कहीं दूर नहीं राजधानी को ही ले लिजिए यहां के हर एक बिजली घरों पर औसतन महीने चार से पांच की संख्या में ट्रांसफॉर्मर जले हैं। बिजली जानकारों ने बताया कि ट्रांसफॉर्मरों को दुरुस्त करने वाले सामान यदि सही समय पर बिजली घरों या संबंधित अधिकारियों को मिल जाएं तो महीने में चार, पांच या पांच, सात नहीं एक से दो ट्रांसफॉर्मरों ही जलें और बाकी के ट्रांसफॉर्मरों को जलने से बचाया जा सकता है।

इन सामानों ही होती है जरूरत
ट्रांसफॉर्मरों के मेंटनेंस के लिए कॉपर स्क्रीन कान्टेक्ट, स्प्रींग कान्टेक्ट, लंग, बैक इंट्री, फ्यूज वायर, कॉपर बस बार, केबल एलटी, केबल कंडक्टर सहित कई और सामानों की जरूरत होती है। जो कि समय से न तो अवर अभियंताओं को मिल पाती है और न ही बिजली घरों पर पहुंचाया जाता है। जानकारों ने बताया कि गर्मी शुरू होने से पहले यानि की मार्च अंतिम और अप्रैल शुरू तक इन सामानों को मिल जाना चाहिए। जिससे गर्मी की शुरूआत होते ही इन सामानों के माध्यम से ट्रांसफॉर्मरों को लोड झेलने के लिए तैयार किया जा सके।

लेसा के करीब 80 फीसदी अवर अभियंताओं ने माना कि डिवीजन और सर्किल स्तर के अधिकारियों की लापरवाह रवैये की वजहों से हमे ये सामान नहीं मिल पाते हैं। हम गर्मी की शुरूआत होते ही ट्रांसफॉर्मरों के दुरुस्तीकरण की चिंता करने लगते हैं। इसके लिए अपने अधिशासी अभियंता से लेकर अधीक्षण अभियंता तक सामानों के व्यवस्था करने की गुजारिश करते हैं, लेकिन उन अधिकारियों के रुचि नहीं लेने से हमे स्टोर से तय समय से उचित मात्रा में सामान नहीं मिल पाता है। अवर अभियंताओं ने बताया कि कई बार तो हमे इसके लिए अपने मुख्य अभियंताओं से भी संपर्क करना पड़ जाता है।

लॉकडाउन ने बचा दी इज्जत नहीं तो धूं-धूं कर जलते ट्रांसफॉर्मर
लॉकडाउन ने इस गर्मी में बिजली अभियंताओं की इज्जत को बचा लिया। लॉकडाउन होने की वजह से मांग पीक सीजन में भी नॉर्मन रहा। जिसकी वजह से न तो अनुमानित संख्या में ट्रांसफॉर्मर जले और न ही केबलें। मांग नहीं बढ़ने से ट्रांसफॉर्मरों और लाइनों पर लोड नहीं बढ़ा जिसकी वजह से बहुत से ट्रांसफॉर्मरों को जलने से बचा लिया गया। इतना ही नहीं लोड में बढ़ोतरी नहीं होने से इस बार पॉवर ट्रांसफॉर्मर भी नहीं जले। वैसे हर साल की गर्मी में राजधानी में एक से दो ही संख्या में पांच से दस एमवीए के ट्रांसफॉर्मर जल जाते थे।

इन जगहों पर ज्यादा जले ट्रांसफॉर्मर
सामानों के सही समय से नहीं मिलने की वजह से सर्किल दो के विराज खंड, विश्वासखंड, ग्वारी, विकासनगर, चौक, चौपटिया, सेस एक, दो, तीन, अमीनाबाद, ठाकुरगंज, हुसैनगंज, रेजीडेंसी सहित लखनऊ के कई और खंडों में महीने में चार से पांच की संख्या में परिवर्तक जले।

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