UPSRLM: सात लाख समूहों की 'आजीविका' पर संकट, शुरू नहीं हो सकी PBMS प्रणाली
इस वर्ष नहीं हुआ समूहों का संचालन, पिछले वर्ष से बकाया
अमृत विचार, लखनऊ। राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन (यूपीएसआरएलएम) के करीब सात लाख स्वयं सहायता समूह टूटने की कगार पर हैं। जिन्हें भुगतान करने के लिए 3 नवंबर 2022 में लांच किया गया प्रेरणा बजट मैनेजमेंट सिस्टम (पीबीएमएस) पोर्टल शुरू नहीं हो पाया है। पोर्टल में तकनीकी खराबी के कारण प्रदेशभर में महिला समूहों का गठन, उनके द्वारा किए जाने वाले कार्य, बैंक लेनदेन, मानदेय, प्रशिक्षण व अभियान आदि का अरबों रुपये बकाया है। जो न मिलने के कारण समूह के कार्य पूरी तरह से बंद हो गए हैं। इस वित्तीय वर्ष में सिर्फ एक बार सात माह पहले भुगतान हुआ था। जबकि बैंक व कृषि सखियों से कराए गए कार्यों का डेढ़ साल से भुगतान नहीं हुआ है। इस कारण महिलाएं समूहों से टूटने लगी हैं।
केंद्रीयकरण के कारण आई दिक्कत
स्वयं सहायता समूह ग्राम पंचायत स्तर पर बनाए जाते हैं। जिसमें 20-30 महिलाएं होती हैं और उन्हें घर बैठे छोटे काम के लिए स्टार्टअप, रिवालविंग फंड व आजीविका संवर्धन के लिए लाखों रुपये ऋण दिया जाता है। जिससे वह ऋण अदायगी करने के साथ अपनी आजीविका चलाती है। जिसका भुगतान जिले स्तर से किया जाता था। जो राज्य मुख्यालय से करने के लिए नवंबर 2022 में केंद्रीयकरण कर पीबीएमएस पोर्टल लांच किया गया था।
दो बार बदली व्यवस्था, लेकिन भुगतान नहीं
वित्तीय वर्ष 2022-23 में पोर्टल से भुगतान करना था। इसलिए नवंबर तक भुगतान नहीं किया गया और अरबों की बकायेदारी होती गई। पोर्टल लांच हुआ तो तकनीकी खराबी को देखते हुए पुरानी व्यवस्था से भुगतान करने के निर्देश हुए। जिसके बिल बाउचर जुटाए गए। जो बाद में फिर पुरानी व्यवस्था से भुगतान करने को मना कर दिया गया। इस वर्ष साढ़े तीन लाख समूह नए बनाने थे, जो नहीं बन पाए।
बोले जिम्मेदार
यह पायलट प्रोजेक्ट है। जिसमें तकनीकी समस्या आ रही है। धनराशि बकाया है जो पोर्टल शुरू होते ही भुगतान कर दी जाएगी। प्रयास कर रहे हैं जल्द सुधार होगा।
जन्मेजय शुक्ला, संयुक्त मिशन निदेशक, यूपीएसआरएलएम
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