साइन बोर्ड: ग्राम निधि से भुगतान करने में फंसे कई प्रधान और सचिव
बरेली, अमृत विचार। भगवा रंग के अवैध रेडियम रिफ्लेक्टिव साइन बोर्ड लगाकर ग्राम पंचायतों में किया गया गोलमाल आखिर सामने आ गया। जांच में करीब 12 ग्राम पंचायतों में अवैध साइन बोर्ड के लिए ग्राम निधि खाते से भुगतान की पुष्टि हो गई है। ये सभी ग्राम पंचायतें पशुधन मंत्री धर्मपाल सिंह के निर्वाचन क्षेत्र की हैं। अभी कई और ग्राम पंचायतों में गोलमाल निकलने की आशंका है। लिहाजा प्रधानों और सचिवों के साथ एडीओ पंचायत पर भी कार्रवाई की तलवार लटक गई है। अफसरों का कहना है कि सभी 1193 ग्राम पंचायतों में जांच पूरी होने के बाद कार्रवाई के बारे में निर्णय लिया जाएगा।
शासन की गाइड लाइन में ग्राम पंचायतों में साइन बोर्ड लगवाने का कोई प्रावधान नहीं है लेकिन इसके बावजूद जिले की डेढ़ सौ से ज्यादा ग्राम पंचायतों में साइन बोर्ड लगा दिए गए। बताया जा रहा है कि एक नेता के इशारे पर यह गोलमाल हुआ। लिहाजा सभी ग्राम पंचायतों में साइन बोर्ड लगाने वाला एक ही ठेकेदार है। इसी वजह से साइन बोर्ड की कीमत भी 35 हजार निर्धारित की गई जो उसकी लागत से लगभग दुगनी है। एडीओ पंचायत की स्वीकृति मिलने के बाद तमाम ग्राम प्रधानों और सचिवों ने ग्राम निधि खाते से इसका भुगतान भी कर दिया। पिछले दिनों अमृत विचार में इस गोलमाल का खुलासा किए जाने के बाद जिले की सभी 1193 ग्राम पंचायतों में इसकी जांच शुरू कराई गई थी।
डीपीआरओ धर्मेंद्र कुमार के मुताबिक अब तक की जांच में करीब 12 ग्राम पंचायतों में अवैध साइन बोर्ड लगाने की पुष्टि हुई है। ये सभी ग्राम पंचायतें मझगवां ब्लॉक की हैं जो पशुधन मंत्री धर्मपाल सिंह का निर्वाचन क्षेत्र है। दरअसल, मझगवां और क्यारा ब्लॉक की ही सबसे ज्यादा ग्राम पंचायतों में अवैध साइन बोर्ड लगाने की खबर है। डीपीआरओ के मुताबिक सभी ग्राम पंचायतों में जांच पूरी होने के बाद इस प्रकरण में कार्रवाई की जाएगी।
ठेकेदार का भुगतान फंसा, सचिवों की नौकरी, अब नेता जी काट रहे हैं कन्नी
बताया जा रहा है कि ये सारा गोलमाल एक नेता के दिमाग की उपज था। जिले की ज्यादा से ज्यादा ग्राम पंचायतों में अवैध साइन बोर्ड लगवाकर ग्राम निधि खातों से करोड़ों के बारे-न्यारे करने का इरादा था। अब तक डेढ़ सौ से ज्यादा ग्राम पंचायतों में करीब 50 लाख कीमत के अवैध साइन बोर्ड लगाए गए हैं। ठेकेदार का इसमें काफी भुगतान फंसा हुआ है। उधर, तमाम ग्राम पंचायतों की ओर से भुगतान कर दिए जाने से कई सचिव और एडीओ पंचायत भी फंस गए हैं। ये सभी अब नेता के चक्कर काट रहे हैं लेकिन बताया जा रहा है कि इतना बड़ा गोलमाल हजम करना बस की बात न होने की वजह से नेता भी इन लोगों से कन्नी काट रहा है। चूंकि यह घपला सबसे ज्यादा पशु धन मंत्री के क्षेत्र में हुआ है, लिहाजा नेता को खुद उनका कोपभाजन बनने का डर सता रहा है।
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