उप्र: अब कमर्शियल वाहनों के रजिस्ट्रेशन के लिए नहीं जाना होगा आरटीओ ऑफिस
लखनऊ, अमृत विचार। कामार्शियल वाहनों से सुविधा शुल्क के नाम पर अब ना तो आरटीओ ऑफिस के कर्मचारी सुविधा शुल्क मांग सकेंगे, ना ही दलाल मनमानी रकम ऐंठ सकेंगे। अब इन वाहनों के रजिस्ट्रेशन शोरूम से ऑनलाइन हो जाएंगे। इसके लिए वाहन मालिक को आरटीओ ऑफिस के चक्कर लगाने की जरूरत नहीं होगी। पहले चरण …
लखनऊ, अमृत विचार। कामार्शियल वाहनों से सुविधा शुल्क के नाम पर अब ना तो आरटीओ ऑफिस के कर्मचारी सुविधा शुल्क मांग सकेंगे, ना ही दलाल मनमानी रकम ऐंठ सकेंगे। अब इन वाहनों के रजिस्ट्रेशन शोरूम से ऑनलाइन हो जाएंगे। इसके लिए वाहन मालिक को आरटीओ ऑफिस के चक्कर लगाने की जरूरत नहीं होगी। पहले चरण में लखनऊ समेत 18 शहरों में यह सुविधा शुरू की गई है। अब तक शोरूम से दो पहिया और चार पहिया वाहनों प्राइवेट वाहनों के ही रजिस्ट्रेशन किए जाने की व्यवस्था थी। अब कामार्शियल वाहनों के रजिस्ट्रेशन भी ऑनलाइन होंगे।
शोरूम से कर ली जाएगी रजिस्ट्रेशन संबंधी प्रक्रिया
प्राइवेट वाहनों के बाद अब व्यवसायिक वाहनों के शोरूम से ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन की शुरूआत हो गई। गाड़ी खरीदने के बाद सभी काम शोरूम से हो जाएंगे। वहीं से गाड़ी मालिक को रजिस्ट्रेशन प्रमाण पत्र भी मिलेगा इससे पहले कामार्शियल वाहन खरीद कर वाहन मालिक को आरटीओ ऑफिस ले जाना पड़ता था वहां पर रजिस्ट्रेशन संबंधी सभी प्रक्रियाएं ऑफ लाइन पूरी की जाती थी। इसके लिए आरटीओ ऑफिस में बैठे कर्मचारी और अधिकारी मोटी रकम वसूलते थे।
अधिकांश वाहन मालिक तो दलालों से संपर्क कर लेते थे। दलाल वाहन मालिकों से काम कराने के नाम पर मनमाना शुल्क वसूलते थे। आरटीओ ऑफिस के कर्मचारी जहां हजार रुपए वहीं दलाल रजिस्ट्रेशन के नाम से हजारों रुपए तक वसूल लेते थे लेकिन अब ऐसा नहीं है। वाहन बिक्री के बाद उसके रजिस्ट्रेशन की जिम्मेदारी भी शोरूम संचालक की होगी। वह ऑनलाइन प्रक्रिया पूरी कर वाहन मालिक को रजिस्ट्रेशन प्रमाण पत्र उपलब्ध कराएगा।
अब तक ऑफलाइन थी व्यवस्था
विभागीय अधिकारियों के आरटीओ ऑफिस में लाइसेंस से लेकर रजिस्ट्रेशन तक सभी व्यवस्थाएं ऑनलाइन की जा चुकी है। अब तक सिर्फ यही व्यवस्था ऑफ लाइन चल रही थी ऐसे में वहां पर फैले भ्रष्टाचार को देखते हुए परिवहन विभाग ने यह निर्णय लिया है अब कामार्शियल वाहन खरीदने वाले मालिकों को कोई भी चूना नहीं लगा सकेगा। वाहन की निर्धारित कीमत और रोड टैक्स जमा करने के बाद उसे रजिस्ट्रेशन प्रमाण पत्र के लिए कोई अलग से कीमत नहीं देनी होगी।
बाराबंकी में चल रहा था पायलट प्रोजेक्ट
विभागीय अधिकारियों ने बताया कि अब तक पायलट प्रोजेक्ट के रूप में यह व्यवसथा बाराबंकी में की गई थी अब राजधानी के ट्रांसपोर्टनगर स्थित आरटीओ कार्यालय के साथ ही बाराबंकी, कानपुर, वाराणसी, प्रयागराज, आगरा, झांसी, सहरानपुर, गाजियाबाद, नोएडा समेत कई अन्य कार्यालयों को इससे जोड़ा गया है इस व्यवस्था में गाड़ी खरीदने संबंधी सभी कागजात स्कैन कर संबंधित आरटीओ कार्यालय के पोर्टल पर भेज दिए जाएंगे। इसके बाद चंद मिनटों में ही गाड़ी का रजिस्ट्रेशन हो जाएगा। रजिस्ट्रेशन होती ही इसका मैसेज वाहन मालिक के मोबाइल नंबर पर एसएमएस के माध्यम से आ जाएगा।
“बाराबंकी में व्यवसायिक वाहनों के डीलर प्वाइंट का प्रोजेक्ट शुरू किया गया था। सफल होने पर लखनऊ समेत प्रदेश के 18 जनपदों में इसकी शुरुआत कर दी गई है। वाहन मालिक को रजिस्ट्रेशन के लिए आरटीओ ऑफिस जाने की जरूरत नहीं होगी।” -विनय कुमार सिंह, अपर परिवहन आयुक्त आईटी, परिवहन विभाग
