बरेली: ग्रामीण क्षेत्रों के हैंडपंप खराब तो कैसे बुझेगी प्यास

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Edited By Amrit Vichar
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विभागीय आंकड़ों में जिले में करीब चार हजार सरकारी हैंडपंप खराब

डेमो फोटो

बरेली, अमृत विचार। फरवरी माह में गर्मी का प्रकोप बढ़ने के साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों में सरकारी हैंडपंपों को लेकर जिम्मेदारों की लापरवाही देखने को मिल रही है। जिले के 15 ब्लॉक के गांवों में करीब चार हजार हैंडपंप खराब हैं। जिनमें रिबोर या फिर मरम्मत होनी है। एक बार हैंडपंप खराब होने के बाद कई-कई माह तक उसकी सुध नहीं ली जाती है। ऐसे में गर्मी बढ़ने के साथ ही पेयजल संकट होना लाजिमी हो गया है।

विभागीय आंकड़े बताते हैं कि जनपद में 38 हजार हैंडपंप लगे हैं। ग्रामीण क्षेत्र में लोग पीने के पानी के साथ ही अन्य जरूरतों के लिए भी इन्हीं हैंडपंपों पर निर्भर हैं। बावजूद इसके अधिकारी इन हैंडपंपों को ठीक कराने में दिलचस्पी नहीं दिखा रहे हैं। विभागीय कर्मी बताते हैं कि ग्रामीण क्षेत्रों में लगे हैंडपंपों की मरम्मत का बजट ग्राम पंचायत और संबंधित निकाय को मिलता है। जबकि बजट मिलने के बाद भी इस ओर ध्यान नहीं दिया जा रहा। 

इधर, डीपीआरओ धर्मेंद्र कुमार का कहना है कि ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल व्यवस्था दुरुस्त बनाए रखने के लिए कवायद शुरू कर दी गई है। समस्त एडीओ पंचायत से खराब व रिबोर की स्थिति में पहुंच चुके हैंडपंपों की सूची मांगी गई है। वहीं शासन से नए हैंडपंप को लेकर कोई लक्ष्य नहीं मिला था। ग्राम पंचायत वार हैंडपंपों को रिपोर्ट के आधार पर दुरुस्त कराए जाने का कार्य जारी है।

हैंडपंप रिबोर के नाम पर होता है खेल
सरकारी हैंडपंपों के रिबोर के नाम पर हर साल लाखों रुपये का गोलमाल होता है। छुटपुट कमियां होने पर या फिर ठीक हैंडपंप को ही प्रधान और सचिव साठगांठ करके फर्जी बोरिंग करार देते हैं। साथ ही बोरिंग की पूरी धनराशि डकार जाते हैं। जबकि कुछ समय बाद यह हैंडपंप फिर खराब हो जाते हैं। ग्रामीणों की शिकायत पर पूर्व में इस तरह के कई मामले पकड़े जा चुके हैं। जिसमें ग्राम प्रधान व संबंधित ग्राम पंचायत के सचिव से रिकवरी कराई गई। लेकिन रिबोर के नाम होने वाला खेल अब भी चल रहा है। इस पर अंकुश लगाने के लिए कोई भी स्थाई कदम नहीं उठाए जा रहे हैं।

700 हैंडपंप तो एक ही ब्लाक में खराब
वर्तमान में जिले के करीब चार हजार हैंडपंप खराब हैं। इनमें सबसे बुरी स्थिति आलमपुर जाफराबाद ब्लॉक की बताई जा रही है। यहां 700 से अधिक हैंडपंप ऐसे हैं जो अभी तक खराब पड़े हुए हैं। इनके ठीक होने की नौबत ही नहीं आ रही है। इसके अलावा 3268 हैंडपंपों का रिबोर होना है। वहीं डीपीआरओ धर्मेंद्र कुमार का कहना है कि सभी खराब हैंडपंपों की सूची तैयार कर ली गई है। जल्द ही उनकी मरम्मत कराई जाएगी।

यह है हैंडपंप रिबोर का नियम
शासन ने ग्राम पंचायतों को सिर्फ हैंडपंप मरम्मत का अधिकार दिया हुआ है। ऐसे में हैंडपंप में आने वाली छोटी-मोटी खराबी को ही ग्राम प्रधान ठीक करा सकते हैं। लेकिन नया हैंडपंप और रिबोर सिर्फ विधायक की संस्तुति पर ही हो सकता है। नए हैंडपंप पर 50 हजार और रिबोर में करीब 40 हजार का खर्च आता है। ऐसे में रिबोर के लिए तमाम हैंडपंप विधायकों की संस्तुति के अभाव में फंसे हुए हैं।

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