खाने-पीने की 54 फीसदी चीजें घटिया... क्योंकि ऊपर के आदेश के बगैर छापे नहीं मारता एफएसडीए

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Edited By Amrit Vichar
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एफएसडीए अधिकारियों ने देर शाम किया आदेश आने का दावा, आज से छापे मारने निकलेंगी टीमें

बरेली, अमृत विचार। होली में सिर्फ 10 दिन बाकी रह गए हैं, बाजार में कई दिनों से मावे के कारोबार में भी तेजी आ गई है लेकिन फिर भी मुख्यालय से आदेश न होने के बहाने एफएसडीए अब तक शांत बैठा हुआ है। यह स्थिति तब है, जब इस वित्तीय वर्ष में 54 फीसदी सैंपल अधोमानक यानी घटिया और करीब 20 फीसदी असुरक्षित पाए गए हैं। अफसरों की सफाई है कि होली पर छापे मारने के लिए पांच टीमें तो पहले ही गठित कर दी गई थीं, लेकिन ऊपर से आदेश चूंकि सोमवार शाम को ही आया है लिहाजा मंगलवार को ये टीमें छापे मारने निकलेंगी।

एफएसडीए की कार्रवाई कभी इतनी ठोस तो नहीं होती जो मिलावट करने में खौफ पैदा कर दे लेकिन इस वित्तीय वर्ष में उसने जो भी कार्रवाई की, उसमें भी मिलावट की भयावह तस्वीर की साफ झलक है। मिठाई, खाद्य तेल, मावा और दूध जैसे कई खाद्य पदार्थों की जांच के लिए लैब में भेजे गए सैंपलों की रिपोर्ट चौंकाने वाली है। इसमें बड़े पैमाने पर खाद्य पदार्थों के नमूने अधोमानक और असुरक्षित मिले।

एफएसडीए के सहायक आयुक्त खाद्य द्वितीय धर्मराज मिश्र के मुताबिक इस वित्तीय वर्ष में 268 नमूनों की रिपोर्ट आई है। इसमें 38 खाद्य पदार्थों के नमूनों को असुरक्षित बताया गया है। 54 प्रतिशत नमूने अधोमानक पाए गए। जिन प्रतिष्ठानों के नमूने जांच में फेल हुए, उनके खिलाफ वाद दायर किया गया। कोर्ट ने ऐसे 196 मामलों में 3.17 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया है।

होली आने में अब 10 दिन ही बाकी रह गए हैं लिहाजा मावा का कारोबार तेजी पकड़ने लगा है। मावा मंडी के अलावा बाजार में भी बड़े पैमाने पर मावा बिक रहा है। अलग-अलग जगह इसका रेट फिलहाल सवा दो सौ से से साढ़े तीन रुपये प्रति किलो तक है। लिहाजा यह साफ है कि बाजार में अलग-अलग गुणवत्ता का मावा बिक रहा है। एफएसडीए को चूंकि ऊपर का आदेश आने का इंतजार था लिहाजा यह अंदाजा लगा पाना मुश्किल है कि अब तक कितना मिलावटी और खराब गुणवत्ता का मावा बिक गया।

मावे में कितनी मिलावट... एफएसडीए की कार्रवाई ही गवाह

पिछले साल मावे के 41 नमूनों में से 28 पाए गए थे अधोमानक

सिर्फ 13 मामलों में ही डाला गया जुर्माना, बाकी 15 अभी डंप

बाजार में किस कदर मिलावटी मावा बिकता है, देर से ही शुरू होने वाली सही लेकिन इसका अंदाजा खुद एफएसडीए की कार्रवाई से लगाया जा सकता है। एफएसडीए के आंकड़ों के मुताबिक इस वित्तीय वर्ष में अब तक मावा के 41 नमूनों की रिपोर्ट आई है जिनमें से 28 यानी लगभग 70 प्रतिशत नमूने अधोमानक पाए गए हैं। यह और दिलचस्प है कि इन 28 मामलों में भी सिर्फ 13 मामलों में 25.5 लाख जुर्माना लगाया गया है।

विभागीय अधिकारियों की यह भी सफाई है कि कई बार मावा में फैट की मात्रा कम होने की वजह से लैब की जांच में उसे अधोमानक पाया जाता है। लोगों से यह अपील भी की है कि वे त्योहारों के दौरान रंगीन खाद्य पदार्थों से खास तौर पर दूर रहें। इसके अलावा सस्ते के चक्कर में गुणवत्ता से भी समझौता न करें। सस्ते की आड़ में घटिया और मिलावटी चीजें बेची जाती हैं। इनसे बचना चाहिए।

मावे में होती है स्टार्च की मिलावट, ऐसे पता करें
मावे में मुनाफाखोरी के लिए मुख्य रूप से स्टार्च की मिलावट की जाती है। आलू को उबालकर इसे और स्टार्च के साथ मावा में मिलाकर बेच दिया जाता है। एफएसएसएआई ( भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण) ने अपनी रैपिड टेक्स्ट बुक के मुताबिक दो से तीन ग्राम मावा को पांच मिलीलीटर पानी के साथ उबालने के बाद उसके ठंडा होने के बाद दो-तीन बूंदे आयोडीन की मिलानी चाहिए। अगर इस घोल में नीला रंग दिखाई दे तो समझ लेना चाहिए कि मावे में स्टार्च की मिलावट है।

सेहत पर सीधा हमला करती है मिलावट
जिला अस्पताल के फिजिशियन डॉ. राहुल वाजपेयी के मुताबिक कोई भी मिलावटी चीज खाने से सेहत पर गंभीर असर पड़ता है। मिलावट के लिए जो केमिकल इस्तेमाल किए जाते हैं, वे मानव स्वास्थ्य के लिए काफी नुकसानदायक होते हैं। इनके लगातार सेवन से उल्टी-दस्त जैसे लक्षण दिखने के साथ लिवर, किडनी समेत पेट के कई स्थायी रोग होने की आशंका रहती है। लिहाजा त्योहारों में खाने-पीने की चीजों का बेहद सावधानी से चुनाव करना चाहिए।

होली से पहले मिलावटखोरी पर लगाम कसने के लिए विभाग ने पूरी तैयारी कर रखी है। सैंपलिंग के लिए खाद्य सुरक्षा अधिकारियों को तैयार रहने को कहा गया है- धर्मराज मिश्र, सहायक आयुक्त खाद्य द्वितीय एफएसडीए।

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