बरेली: 15 साल पहले 2.75 करोड़ बांटे, अब भूमि का लैंडयूज जांच रहे

Amrit Vichar Network
Edited By Amrit Vichar
On

बरेली, राकेश शर्मा। वर्ष 2005 में बरेली-सीतापुर हाईवे के लिए भूमि अधिग्रहण करने के मामले में भी खेल हुआ है। फरीदपुर तहसील क्षेत्र के रहने वाले दो भाईयों की जिस भूमि को कामर्शियल दिखाकर करीब पौने तीन करोड़ का मुआवजा बांटा गया था। उस मुआवजे के प्रकरण में 15 साल बाद विशेष भूमि अध्याप्ति अधिकारी …

बरेली, राकेश शर्मा। वर्ष 2005 में बरेली-सीतापुर हाईवे के लिए भूमि अधिग्रहण करने के मामले में भी खेल हुआ है। फरीदपुर तहसील क्षेत्र के रहने वाले दो भाईयों की जिस भूमि को कामर्शियल दिखाकर करीब पौने तीन करोड़ का मुआवजा बांटा गया था। उस मुआवजे के प्रकरण में 15 साल बाद विशेष भूमि अध्याप्ति अधिकारी कार्यालय यह जांच करा रहा है कि मुआवजा सही बांटा गया था या नहीं।

प्रारंभिक जांच में यह सामने आया है कि कृषि भूमि को कामर्शियल दिखाकर दोनों भाईयों ने मुआवजा लिया है, जबकि भूमि कृषि में ही दर्ज है। इसमें कोरोना काल शुरू होने से पहले विशेष भूमि अध्याप्ति अधिकारी मदन कुमार की ओर से दोनों भाईयों को चिट्ठी जारी कर भूमि के कामर्शियल होने के साक्ष्य मांगे गए थे। इस पर दोनों भाईयों ने जवाब देते हुए अधिग्रहण की गई भूमि ईट भट्ठा परिसर की होना बताते हुए कामर्शियल बताई लेकिन कामर्शियल भूमि होने के कार्यालय में कोई साक्ष्य नहीं हैं।

ऐसा कहा जा रहा है। अधिकारी यह मान रहे हैं कि कहीं तो खेल हुआ है। एसएलएओ कार्यालय को शक है कि उस वक्त एसडीएम कार्यालय की रिपोर्ट पर पड़ताल किए गए बगैर ही मुआवजा कामर्शियल कृषि का दे दिया गया था। अब मामले की सत्यता जानने के लिए विशेष भूमि अध्याप्ति अधिकारी मदन कुमार की ओर से एसडीएम फरीदपुर को इस बाबत चिट्टी जारी की गई है कि यह पड़ताल करते हुए रिपोर्ट दें कि ईंट भट्ठे की भूमि मुआवजा बांटने से पहले कब आकर्षक में दर्ज कराई गई थी।

क्योंकि 143 यानि लैंडयूज चेंज होने के बाद ही इसे कामर्शियल में माना जाएगा। यदि ऐसा नहीं है तो मुआवजा बांटने में बड़े स्तर पर खेल हुआ है। हालांकि, अभी तक एसडीएम फरीदपुर विशु राजा ने अपनी रिपोर्ट विशेष भूमि अध्याप्ति अधिकारी कार्यालय को नहीं भेजी है।

6.5 हेक्टेयर में है ईंट भट्ठा, 11 बीघा जमीन हुई थी अधिग्रहण
विशेष भूमि अध्याप्ति अधिकारी कार्यालय के सूत्र बताते हैं कि यह ईंट भट्ठा करीब 6.5 हेक्टेयर की भूमि में फैला है। इसमें से सड़क साइड की करीब 11 बीघा जमीन का अधिग्रहण हुआ था। इसके साथ ही कुछ कृषि भूमि भी थी। उसका भी अधिग्रहण किया गया।

दो दरों पर अधिग्रहण की गई थी जमीन
बरेली-सीतापुर हाईवे के लिए जमीन दो दरों पर अधिग्रहण की गई थी। इसमें कृषि भूमि करीब चार लाख रुपये बीघा के हिसाब से, जबकि कामर्शियल भूमि 2500 रुपये प्रति वर्ग मीटर के हिसाब से अधिग्रहण की गई थी।

संबंधित समाचार