जानें Dark Web की काली दुनिया का रहस्य, यहां बेचा जाता है आपका पर्सनल डेटा
नई दिल्ली। इंटरनेट तो आप सब ही इस्तेमाल करते हैं पर इंटरनेट वो नहीं है जो आप इसे समझते हैं। इंटरनेट में एक काली दुनिया भी हैं जिसे हम Dark Web के नाम से जानते हैं।
जानकारी के अनुसार हम जो इंटरनेट इस्तेमाल करते हैं वो पूरे इंटरनेट का सिर्फ 20 प्रतिशत हैं जी हां इस को आप ऐसे समझ सकते हैं इंटरनेट को तीन हिस्सों में विभाजित किया जाता हैं सर्फेस वेब डीप वेब और डार्क वेब सर्फेस वेब वो जिसे हम आप तौर पर इस्तेमाल करते हैं डीप वेब में वो सीक्रेट साइट होती हैं जो सर्च इंजन पर नही आती और डार्कवेब इंटरनेट की वो काली दुनिया है जिस से आम लोग अनजान हैं।
डार्क वेब में सर्च के लिए कोई आम ब्रैजर नही बल्कि एक अलग तरीके का ब्राउजर चाहिए होता है जिसे हम टौर ब्राउजर के नाम से जानते हैं। लेकिन यहां अंडरवर्ल्ड की तरह हर कदम पर खतरा होता है. खतरा हैकर्स का, स्कैमर्स का और अपने साथ ठगी का. डार्क वेब का एक्सेस स्पेशल ब्राउजर के जरिए होता है।

डार्क वेब पर बेचा जाता है आप का पर्सनल डाटा
यहा पर अलग-अलग डेटा की कीमत अलग-अलग होती है। जानकरी के अनुसार यहा अगर किसी ने ऑनलाइन लॉगइन डिटेल्स चोरी की हैं, तो इसकी कीमत 50 डॉलर होती है. क्रेडिट कार्ड और उससे जुड़ी दूसरी जानकारियों की कीमत 17 डॉलर से 120 डॉलर तक हो सकती है।
ऑनलाइन बैंकिंग लॉगइन डिटेल्स की कीमत 65 डॉलर तक होती है. वहीं हैकर्स फेसबुक अकाउंट की कीमत 45 डॉलर, क्लोन्ड VISA और पिन की डिटेल्स 20 डॉलर, स्टोलेन PayPal अकाउंट की डिटेल्स 20 डॉलर होती है. हैक्ड वेब और Uber व Netflix जैसी एंटरटेनमेंट सर्विसेस के यूजर्स का डेटा 40 डॉलर तक की कीमत पर बिकता है। हैकर्स इस डेटा को हैक करने के बाद डर्क वेब पर बेच देते हैं। स्कैमर्स ज्यादातर डेटा क्रिप्टोकरेंसी के बदले खरीदते हैं, जिससे उनके बारे में कोई जानकारी हासिल ना की जा सके।
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