इतनी जल्दी Kanpur से रूठ गयी गंगा, नरोरा बांध की तरह गंगा बैराज भी हुआ कंजूस, अप्रैल से भीषण जलसंकट के संकेत
कानपुर में गंगा सूख गई।
कानपुर में इतनी जल्दी गंगा से रूठ गई। नरोबा बांध की तरह गंगा बैराज भी कंजूस हो गया। इससे अप्रैल से भीषण जलसंकट के संकेत है।
कानपुर, अमृत विचार। गंगा का घाटों से रूठना व फिर लंबे अंतराल के बाद घाटों पर लौट आने लुकाछुपी के कनपुरिये आदी हो चुके हैं लेकिन अबकी मार्च के महीने में गंगा घाटों से दूर होने लगेंगी यह शायद सोचा भी न गया होगा। उन्नाव की ओर गंगा का जाना मई या जून माह में हुआ है। इस हालिया घटना से कानपुर में गम्भीर पेयजल संकट की दस्तक दे दी है। गंगा बैराज से भी पानी कम छोड़ा जा रहा है। सिंचाई विभाग ने नरोरा बांध को और पानी छोड़ने को लिखा है। गंगा के खिसकने का सिलसिला कन्नौज से लेकर कानपुर-फतेहपुर तक देखा जा सकता है।
इतनी जल्दी घाटों से खिसकने वाली गंगा पहली बार तब देखी गयी थी जब 1964 में गंगा ने उन्नाव की ओर खिसकना शुरू तब बैराज की परिकल्पना जेहन में आई थी। ये बात दीगर की इसकी शुरुआत 1992 में हुई तब राज्य में भाजपा और केंद्र में कांग्रेस की सरकार थी। बीते हफ्ते भीतर गंगा का गिरता जलस्तर गर्मी आने तक हालात को गंभीर बना सकता है।बिठूर, परमट, मैग्जीन और भैरोघाट में पानी घुटनों के नीचे तक आ गया। इस कदर गिरावट होने से भैरोघाट पंपिंग स्टेशन से जलापूर्ति ठप होने की आशंका है।
सिंचाई के एक अभियंता ने बताया कि बैराज से लेकर डाउनस्ट्रीम की तरफ तेजी से बढ़ती बालू के कारण गंगा जल घाट से दूर हो गया है। बालू के ढेर के कारण न केवल किनारे बल्कि बीच में भी टीले बनते जा रहे हैं।
नमामि गंगे के तहत करोड़ो रुपये खर्च करके घाटों को सुंदर बनाया गया था ताकि श्रद्धालु पर्यटन का आनंद लेते हुए स्नान व आचमन ठीक से कर सके। पर ऐसा होता नहीं दिख रहा है।
सरसैया घाट से गंगा ने दूरी बना ली है। बारिश में यही गंगा सरसैया घाट की सीढिय़ों तक आ जाती थी। मार्च में ही कम होता जलस्तर जलापूर्ति के लिहाज से खतरे के संकेत हैं।
बैराज पर उन्नाव की तरफ नदी करीब 500 मीटर की चौड़ाई में ही बह रही है। इसका कारण नरौरा से कानपुर की ओर छोड़े जाने वाले पानी में कमी बताई जा रही है। नरोरा से कम पानी छोड़े जाने से गंगा करीब 30 फीट तक दूर हो गई हैं। लोग नाव से गंगा के बीच टापू में ठहर कर आनन्द उठा रहे हैं।
जानकर बताते हैं कि मार्च से ही शुरू हुई भीषण गर्मी के साथ, सिंचाई के लिए पीछे से पानी नहरों में डायवर्ट होने, कम बारिश होने के अलावा पहाड़ों में कम बर्फबारी, इसकी वजह मानी जा सकती है। गंगा बैराज से रोजाना 2800 क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा है। यह काफी है। पहले 6 हजार क्यूसेक पानी सामान्य दिनों में छोड़ा जाता था। गंगा बैराज कार्यालय से से मिली जानकारी के मुताबिक मार्च 2019 में 5361 क्यूसेक पानी छोड़ा गया था जबकि मार्च 2020 में 7423 और मार्च 2022 में 6972 क्यूसेक पानी छोड़ा गया।
मार्च 2021 में 3299 क्यूसेक पानी अपस्ट्रीम यानी बैराज से छोड़ा गया था। सिंचाई विभाग के गंगा बैराज डिवीज़न अधिशासी अभियंत पंकज गौतम के अनुसार अपस्ट्रीम नरोरा बांध से छोड़े गए पानी के हिसाब से ही कानपुर बैराज से पानी छोड़ा जाता हैं। यह सही है पानी कम छोड़ा जा रहा है।
गंगा मेला के दिन गंगा दर्शन मुश्किल
अविरल गंगा, निर्मल गंगा के सरकारी स्वप्न को साकार करने में महती योगदान का दावा करने वाले सरसैया घाट निवासी नमामि गंगे के यूपी संयोजक श्रीकृष्ण दीक्षित बड़े जी ने बताया मार्च का आधा महीना भी खत्म नही हुआ और गंगा घाटों से 500 मीटर दूर जा चुकी हैं। बड़ेजी का कहना है कि उन्हें बताया गया है कि नरोरा बांध से कम पानी छोड़े जाने के कारण कानपुर गंगा बैराज भी कम पानी छोड़ रहा है। कानपुर के घाट एकबार फिर सूने सूने दिखेंगे।
बड़ेजी का कहना है कि वह मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और विभागीय मंत्री स्वंत्रदेव सिंह को कानपुर के घाट छोड़ती गंगा पर रिपोर्ट गंगा मेला से पहले सौंपेंगे। बांधों से पानी छोड़ने की मांग उठाएंगे। सिंचाई अभियंता भी खेल करते हैं। उनका कहना है कि गंगा की ये हालत और बोट क्लब को पानी की आवश्यकता के कारण कानपुर बैराज पानी छोड़ने में कंजूसी करता है। संभावित पेयजल संकट की आशंका तो सोचकर रूह कांप जाती है।
