निकाय चुनावः पिछड़ा आयोग के प्रश्नों से आरक्षण प्रक्रिया पर आंच, सुप्रीमकोर्ट में याचिका दायर को लेकर रायमशविरा शुरू

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Edited By Amrit Vichar
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कानपुर में पिछड़ा आयोग के प्रश्नों से आरक्षण प्रक्रिया पर आंच।

कानपुर में पिछड़ा आयोग के प्रश्नों से आरक्षण प्रक्रिया पर आंच। शहर के शास्त्रीनगर व सरोजनीनगर वार्ड का उदाहरण पेश। डीएम के माध्यम से नगर विकास विभाग को ज्ञापन भेजा। सांसद ने कार्यकर्ताओं की रिपोर्ट पर डीएम से बातचीत की।

कानपुर, अमृत विचार। नगरीय निकाय चुनाव पर आरक्षण की दोधारी लटक रही है। मई तक चुनाव हो पाएंगे इस बात को लेकर एक बार फिर संशय उत्पन्न हो गया है। निकाय चुनाव को समर्पित पिछड़ावर्ग आयोग की रिपोर्ट में उठाए गए प्रश्न शासन के लिए यक्ष प्रश्न बन सकते हैं। खबर आयोग की रिपोर्ट को आधार बनाकर और इसमें कानपुर कुछ वार्डों का उदाहरण रखते हुए सुप्रीमकोर्ट में
याचिका की तैयारी है। 11 अप्रैल को सुनवायी है। पिछड़ावर्ग आयोग की रिपोर्ट मंत्रिमंडल समूह की बैठक में स्वीकृति मिल चुकी है। अब इस सुप्रीमकोर्ट में सौंपा जाएगा। 
 
यदि कानपुर के दो वार्ड 91 (शास्त्रीनगर) और वार्ड 69 (सरोजनीनगर) को ही देखें तो दोनों ही वार्डों के साथ खेल हो गया। दावा है कि ओबीसी आबादी वाला वार्ड 69 सामान्य हो गया है जबकि वार्ड 91 ओबीसी में आरक्षित कर दिया गया जहां पर ओबीसी आबादी बहुत कम है। हालांकि इस वार्ड के निवर्तमान पार्षद राघवेंद्र मिश्रा ने पिछड़ा वर्ग आयोग और जिलाधिकारी को ज्ञापन देकर न्याय की मांग की है। उनका कहना है कि यदि रैपिड सर्वे किया गया होता तो ऐसा बिलकुल न होता।
 
वह यह भी कहते हैं कि अधिकारियों ने मनमाने ढंग से चक्रानुक्रम आरक्षण की ओट में बैठे-बैठे बिना रैपिड सर्वे के रिपोर्ट भेज दी। जिलाधिकारी वार्ड 91 शास्त्रीनगर के निवर्तमान पार्षद राघवेंद्र मिश्रा की शिकायत नगर विकास विभाग को भेज दी गयी है। कानपुर में वार्डों के आरक्षण को लेकर कार्यकर्ताओं और निवर्तमान पार्षदों की शिकायत के आधार पर सांसद सत्यदेव पचौरी ने भी अधिकारियों से बातचीत की। उनका कहना है कि आरक्षित और अनारक्षित लोगों के अधिकारों को प्रभावित न होने दिया जाए। 
 
नगर विकास विभाग को अग्रसारित ज्ञापन के अनुसार कहा गया है कि सुप्रीमकोर्ट ने तीन माह में ट्रिपल टेस्ट के माध्यम से पिछड़े वर्ग का आरक्षण की बात कही थी। लेकिन कानपुर में किसी भी वार्ड में पिछड़े वर्ग के लोगों का ना तो सर्वे कराया गया ना ही उनके शिक्षा के स्तर को जाना गया। प्रश्न है कि निकाय के पिछड़ेपन की हकीकत को जाने बगैर आरक्षण प्रक्रिया को पूर्ण नहीं किया जा सकता। पर कानपुर में ऐसा ही किया गया। रैपिड सर्वे को लेकर भ्रम में रखा गया और मनमाने ढंग से वार्डों को आरक्षित, अनारक्षित श्रेणियों में बांटते हुए रिपोर्ट दाखिल कर दी गयी।
 
इस ज्ञापन में यह भी कहा गया है कि वार्ड 91 हरिहरनाथ शास्त्री नगर कानपुर सवर्ण बाहुल्य क्षेत्र हैं। इस वार्ड में 9000 लगभग ब्राह्मण मतदाता, 3000 लगभग क्षत्रिय मतदाता, 1500 से 1700 लगभग पिछड़े वर्ग के मतदाता, 4000 लगभग ने अनुसूचित वर्ग, बंगाली वर्ग, मुस्लिम वर्ग, क्रिश्चियन आदि वर्गों के मतदाता हैं। फिर भी वार्ड 91 हरिहरनाथ शास्त्री नगर को विगत माह में घोषित आरक्षण सूची में पिछड़े वर्ग के लिए आरक्षित कर दिया गया था। अपनी लिखित आपत्ति दर्ज कराई गयी पर सुनवायी नहीं हुई। 
 
वहीं पर वार्ड के ठीक बगल वाला वार्ड 69 सरोजिनी नगर जिसमें मतैया पुरवा, पाल बस्ती, रेलवे लाईन, लक्ष्मीरतन का हाता, गूदड़बस्ती हैं जो कि बड़ी बस्तियां है जिसमें की बड़ी संख्या में पिछड़े वर्ग के मतदाता निवास करते हैं आज तक इस वार्ड में कोई भी सामान्य वर्ग का प्रत्याशी चुनाव नहीं जीत सका है वार्ड 69 में कुल मतदाता 14471 है जिसमें लगभग 10,000 मतदाता पिछड़े वर्ग से आते हैं। और यह वार्ड लगातार सामान्य वर्ग के लिए आरक्षित किया जाता रहा है। वर्तमान में भी यह वार्ड सामान्य वर्ग के लिए आरक्षित किया गया है।
 
उधर, निकाय चुनाव को समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग द्वारा रैपिड सर्वे को लेकर उठाए गए प्रश्न शासन के लिए भी परेशानी का सबब हैं। सुप्रीमकोर्ट ने अगर कह दिया कि ओबीसी की संख्या जानने के लिए दोबारा रैपिड सर्वे करा लिया जाए तो निकाय अफसरों की पोलपट्टी खुल सकती है। कानपुर के मामले में तो यह बिलकुल साफ है। रैपिड सर्वे यदि किया गया तो आंकड़ों के मिलान में मामला फंस सकता है। सूत्रों के मुताबिक आयोग को कई वार्ड ऐसे भी मिले हैं जिनमें ओबीसी की संख्या कम दिखायी गयी है। वार्ड सामान्य किए गए हैं। 2011 की जनगणना से अब तक आबादी बढ़ी ही है। 2017 का निकाय चुनाव रैपिड सर्वे के हिसाब से आरक्षण के मुताबिक हुआ था। तब यह अब तक नहीं हुआ। अब सारा दारोमदार सुप्रीमकोर्ट पर है।  
 

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