मुरादाबाद : घनी दाढ़ी, दरम्याना चेहरा...ऋषिदेव शर्मा रोहतक के आर्ट्स विवि में गुनगुना रहे फोटोग्राफी का तराना

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सिनेमेटोग्राफर ऋषि को बेस्ट डायरेक्टर ऑफ फोटोग्राफी अवार्ड्स का मिला है निमंत्रण 

रोहतक में शूटिंग के दौरान प्रसिद्ध कलाकार और विश्व विद्यालय के चांसलर गजेंद्र चौहान सिने निर्देशक ऋषिदेव शर्मा को स्टेप्स समझाते हुए।

आशुतोष मिश्र, अमृत विचार। घनी दाढ़ी, दरम्याना चेहरा और गजब का इत्मीनान। जी, हां हम बात कर रहे हैं सिनेमाफोटोग्राफी के दक्ष और मुरादाबाद के लाल ऋषिदेव शर्मा की। माटी का यह लाल रोहतक में एक प्रोजेक्ट फिल्म शूट कर रहा है। हरियाणा कला परिषद एवम यश बाबू चैरिटेबल ट्रस्ट ने उन्हें यशस्वी गौरव सम्मान के लिए चुना है। जहां बेस्ट डायरेक्टर ऑफ फोटोग्राफी अवार्ड्स दिया जाएगा। ऋषिदेव पंडित लक्ष्मी चंद्र स्टेट यूनिवर्सिटी ऑफ परफॉर्मिंग एंड विजुअल आर्ट्स रोहतक (हरियाणा) में एक प्रोजेक्ट फिल्म शूट कर रहे हैं। 

अमृत विचार से बातचीत में फिल्म निर्देशक ऋषिदेव शर्मा कहते हैं कि हमने साल 1988 में इस क्षेत्र में कदम रखा। दिल्ली दूरदर्शन के स्टिंगर कैमरामैन के रूप से में सेवा शुरू की। 50 से अधिक सीरियल की शूटिंग कर चुका हूं। बांसुरी, प्रेमकथा के बाद जल्द पा- मॉ हिंदी फिल्म आने वाली है। तीसरी फिल्म के निर्देशन के लिए मुझे फिल्मकार परीक्षित साहनी ने हौसला बढ़ाया है। मेरे प्रयास और किन्नरों के जीवन आधारित फिल्म बनाने की तारीफ और शुभकामनाएं भेजी है। वर्षो से मुंबई में फिल्म निर्देशक, सिनेमेटोग्राफर ऋषिदेव को बेस्ट डायरेक्टर ऑफ फोटोग्राफी अवार्ड्स देने के लिए निमंत्रण मिला है। सोमवार को रोहतक में पंडित लक्ष्मी चंद्र विजुअल आर्ट्स विश्व विद्यालय के चांसलर प्रसिद्ध कलाकार गजेंद्र चौहान ने प्रयास की सराहना की। 

शर्मा कहते हैं कि मुझे मुंबई से म्यूजिक वीडियो प्रोजेक्ट का बुलाया आया है। जबकि, हम रोहतक की फिल्म की शिक्षा में डिग्री देने वाले विश्व विद्यालय में एक माह से फिल्म निर्देशन और सिनेमाफोटोग्राफी की जानकारी दे रहे हैं। बताते हैं कि बालाजी टेलीफिल्म्स, जॉय मुखर्जी फिल्मालय स्टूडियो, बलराज साहनी प्रॉडक्शन के लिए दर्जनों डेली सोप और कॉपोरेट फिल्म कर चुके हैं। शर्मा का मानना है कि बस हमेशा काम से सीखते रहो। हर क्षेत्र में टेक्निक रोजाना बदल रही है। फिल्म सीरियल में रोजाना ही परिवर्तन हो रहा है। वह चाहे शॉट डिवीजन हो या शूट। कुछ न कुछ क्रिएटिव होना ही पड़ेगा।

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