अयोध्या: रमजान को लेकर मस्जिदों व घरों में तैयारियां शुरू, बाजारों में खरीदारी शुरू
अयोध्या, अमृत विचार। रहमतों व बरकतों का महीना माह-ए-रमज़ान शुरू होने को है। ऐसे में इसकी तैयारी को लेकर सभी तरह के इंतजाम शुरू हो गए हैं। इस पाक माह रमज़ान के चांद की तस्दीक होते ही मस्जिदों व घरों में इबादत का दौर शुरू हो जाएगा। चंद रोज बचे रमज़ानुल मुबारक को देखते हुए जिले के मुस्लिम बाहुल्य क्षेत्रों में जहांं लोगों की चहलकदमी बढ़ गई है तो वहीं बाजारों में रमज़ान से जुड़ी चीजों की खरीदारी भी शुरू हो गई।
माह-ए-रमज़ान को शुरू होने में चंद रोज बचे हैं। बस चांद का दीदार होते ही जहांं मस्जिदें तरावीह की नमाज़ से गुलजार होगी तो वहीं इस पाक और मुकद्दस महीने में रहमतों व बरकतों की बारिश भी शुरू हो जाएगी। रमज़ानुल मुबारक के करीब आते ही मुस्लिमों में इसकी अच्छी खासी खुशी देखने को मिल रही है। 22 या 23 मार्च से शुरू हो रहे इस पाक महीने को लेकर मुस्लिम बाहुल्य क्षेत्रों में तैयारियां जोरों पर चल रही है। वहीं बाजारों में रमज़ान से जुड़ी चीजों की भरमार लग गई है। इसी तरह नमाज़-ए-तरावीह को लेकर जिले की शहर से लेकर गांव कस्बों की मस्जिदों में पूरी तैयारियां कर ली गई है।
रहमतों बरकतों का महीना है रमज़ान
रमज़ानुल मुबारक का महीना बड़ी ही रहमतों व बरकतों का महीना है। हाफिज़ जैनुलाब्दीन ने बताया कि रमज़ान के इस महीने में अल्लाह अपने बंदों की हर नेकी को सत्तर गुना ज्यादा बढ़ा देता है। वहीं रिज़्क भी बढ़ा देता है। उन्होंने बताया कि रमज़ान के इस पूरे महीने में अल्लाह शैतान को कैद कर देता है। जिससे की उसके बंदो की इबादत में खलल पैदा न हो सके।
पूरा महीना तीन अशरों में बंटा होता है
इस्लाम के पांच फर्ज अरकानों में रमज़ानुल मुबारक के रोज़े तीन अशरों दस दस दिनों के तीन भाग में बंटा होता है। हाफिज़ मोईन के मुताबिक रमज़ान का पहला अशरा रहमत का होता है। जिसमें बंदा अपने रब से रहमत की दुआएं मांगता है। दूसरा मगफ़िरत का जिसमें बंदा अपने गुनाहों की माफी तलब करता है। वहीं रमज़ान का तीसरी व आखिरी अशरा जहन्नम की आग से निजात का होता है।
रमज़ान को लेकर सजने लगी हैं दुकानें
रमज़ान का महीना करीब आ रहा है। बाजारों में उससे जुड़ी सभी जरूरी की चीजों की दुकानें सजना शुरू हो गई है। बाजारों में सजी सिवई, सूतफेनी व कचरी पापड़ या टोस्ट बंद हो। खासकर रोज़ेदारों के लिए खजूर व मिसवाक ( दातुन) आदि की दुकानें लगने लगी हैं।
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