Chitrakoot News : ओलावृष्टि ने किसानों की मेहनत और उम्मीदों पर फेर दिया पानी, जनप्रतिनिधि नहीं पहुंचे लेने सुध
चित्रकूट में ओलावृष्टि ने किसानों की मेहनत और उम्मीदों पर फेर दिया पानी।
चित्रकूट में ओलावृष्टि ने किसानों की मेहनत और उम्मीदों पर पानी फेर दिया। पहाड़ी ब्लाक के कई गांवों में तबाही मच गई। वहीं, जनप्रतिनिधि सुध लेने भी नहीं पहुंचे।
चित्रकूट, अमृत विचार। खेती-किसानी शायद इकलौता ऐसा पेशा है, जिसमें मेहनत का माकूल भुगतान किसान पर नहीं बल्कि दूसरों पर निर्भर है। खेत में बीज डालने के बाद किसान का भाग्य इस बात पर निर्भर है कि कितनी फसल मिलेगी। उसके बोये अनाज का दाम जहां सरकार निर्धारित करती है तो वहीं यह भी आशंका बनी रहती है कि प्रकृति का कोप उसकी मेहनत पर पानी तो नहीं फेर देगा। पहाड़ी ब्लाक के कुछ गांवों में भी बीते दिन किसान के साथ यही हुआ। भारी ओलावृष्टि ने किसानों की खेतों में खड़ी गेहूं, चना और सरसों की फसल को जमींदोज कर किसानों की उम्मीदों को भी दफन कर दिया।
बीते दिनों पहाड़ी ब्लाक की औदहा ग्राम पंचायत के चार मजरों में बारिश के बीच हुई ओलावृष्टि ने तमाम किसानों की मेहनत पर पानी फेर दिया। यहां रैपुरवा और मिर्जापुर के पुरवा में लगभग 80 फीसदी और औदहा में साठ फीसदी फसल बर्बाद हो गई। जरिहा में भी तीस फीसदी फसल जमीन पर लेट गई। किसानों का कहना है कि एक तो सरकारों की ठोस नीतियां न होने और फिर प्रकृति की बेमौसम मार ने उनकी रीढ़ तोड़कर रख दी है। वे लगातार कर्ज के बोझ तले दबते जा रहे हैं।
किसानों का कहना है कि किसानों के लिए बड़ी बड़ी बातें तो की जाती हैं पर जिले में ऐसा कोई नेता नहीं जो किसानों के हितों के लिए जीजान लगा दे। अन्ना जानवरों से फसल बचाने के लिए सरकार द्वारा कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए। बिजली पानी की कोई ठोस व्यवस्था नहीं है। समय पर खाद की उपलब्धता भी नहीं होती है। सिंचाई कटाई मजदूरी भी महंगी है। कृषि पर लागत का मूल्य भी नहीं निकल पाता। किसान क्रेडिट कार्ड से अगर कर्ज ले लिया तो वह दिन दूना रात चौगुना बढ़ता है।
खेती-किसानी ने बना दिया कर्जदार-श्यामनारायण
रैपुरवा मजरा निवासी किसान श्यामनारायण ने बताया कि हम लोग खेती-किसानी करके कर्जदार बनते जा रहे हैं। महंगी खाद, महंगा बीज, महंगी सिंचाई करके फसल तैयार करते हैं। जब काटने की बारी आती है तो बेमौसम बरसात और ओलावृष्टि बर्बाद कर देती है।
अब घाटे का सौदा है खेती- कृपाशंकर
औदहा निवासी किसान कृपाशंकर ने कहा कि अब खेती घाटे का सौदा बन गई है। खाद-बीज, पानी, जुताई, बुआई, कटाई, कतराई और मजदूरी के बाद कर्ज बचता है और लागत तक नहीं निकलती। ऐसे में हर बार उम्मीद के सहारे जीते हैं और बाद में कुछ भी हाथ नहीं लगता।
केसीसी का पैसा बिल भरने में होता है खत्म- राममूरत
अरछा निवासी किसान राममूरत का कहना है कि खेती में लगातार घाटा हो रहा है। बैंकों में ब्याज बढ़ रही है। बैंक आरसी जारी कर रहे हैं। किसानों से क्रेडिट कार्ड की रकम बिजली के बिल की रकम भरने में खत्म हो रही है। बिल लगातार कठोरता से जमा कराया जा रहा है। कई बार कर्ज के ऊपर कर्ज लेना पड़ता है।
गृहस्थी के काम बाधित हो जाते हैं- मनोज सिंह
जरिहा के किसान मनोज सिंह ने बताया कि उसने पांच वर्ष पहले क्रेडिट कार्ड बनवा कर खेती करने की सोची थी पर लगातार घाटा सह रहे हैं। अब तो हर बार ब्याज चुकाने के लिए घर की पूंजी भी खर्च करनी पड़ रही है। बिटिया की शादी में रिश्तेदारों से कर्ज लेना पड़ा जिसको आज तक नहीं भर पा रहे।
अन्ना मवेशी भी हैं बड़ी मुसीबत
बरेठी निवासी गयाप्रसाद पांडेय का कहना है कि अन्ना मवेशी भी एक बड़ी दिक्कत का सबब बने हैं। लगभग 24 बीघे में गेहूं की बुवाई कराई थी लेकिन बेमौसम बरसात और अन्ना जानवरों की वजह से लगभग 70 फीसदी नुकसान हो गया। किसान सम्मान निधि नहीं मिलती। उप कृषि निदेशक लखनऊ को मेल भी किया गया लेकिन आज तक कुछ नहीं हुआ।
लगता है बाहर कोई नौकरी कर लें- बिंदा प्रसाद
छोटे और अधिया में खेती करने वाले किसानों की दिक्कत तो और भी ज्यादा है। बिंदा बताते हैं कि किसी तरह कर्ज आदि लेकर फसल बोई थी पर अन्ना मवेशियों से बची फसल को प्रकृति ने चौपट कर दिया। ऐसे में अब घर में खाने के लाले पड़ेंगे, बेचने की कौन करे। खेती से ठीक तो बाहर जाकर 12 घंटा सिक्योरिटी की नौकरी करें तो परिवार का पेट तो पाल सकेंगे।
