बरेली: ऊपरी कमाई का चक्कर है...इसलिए खाली दौड़ रही हैं सिटी बसें, जानिए क्या है पूरा मामला?
शहर में परमिट से करीब चार गुना तादाद में दौड़ रहे ऑटो स्मार्ट सिटी कंपनी की ई बसों पर भारी, नजरंदाज कर रहे हैं अफसर
बरेली, अमृत विचार। सरकारी खजाने के बजाय जेब में आने वाली ऊपरी कमाई का चक्कर न होता तो शहर में रजिस्ट्रेशन से तीन गुना ज्यादा संख्या में ऑटो न दौड़ रहे होते। ज्यादा कमाई कराने वाले देहात के परमिट चलने वाले पीले ऑटो को शामिल कर लिया जाए तो शहर में ऑटो की तादाद और भी बढ़ जाती है। यही ऊपरी कमाई का चक्कर स्मार्ट सिटी कंपनी की ओर से शहर को उपलब्ध कराई गई 25 सिटी बसों बसों पर भारी पड़ रहा है। ऑटो वालों का तगड़ा नेटवर्क सिटी बसों को सवारी ही नहीं मिलने दे रहा है।
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आरटीओ की ओर से शहर में ऑटो चलाने के लिए सिर्फ 28 सौ परमिट जारी किए गए हैं लेकिन परिवहन विभाग और पुलिस की साठगांठ से इसके बजाय दौड़ रहे हैं 10 हजार से भी ज्यादा ऑटो। शहर में ऑटो की इस कदर भरमार की वजह से ही सड़कों पर जाम की समस्या आम है लेकिन नीचे से लेकर ऊपर तक कोई इस पर गौर करने तक को तैयार नहीं है।
अब ऑटो की वजह से ही स्मार्ट सिटी की ओर से शहर में शुरू की गई सिटी बस सेवा भी ध्वस्त हो गई है। शहर में तीन दिन से दो रूट पर 24 सिटी बसें दौड़ रही हैं लेकिन उन्हें सवारियां ही नहीं मिल रही है। इसी कारण 14 सिटी बसों को कई महीनों से फरीदपुर रूट पर दौड़ाया जा रहा था। हाल ही में इन्हें शहर में लाया गया है।
ऑटो से महंगा है सिटी बसों का किराया
शहर में चलने वाले सिटी बसों का न्यूनतम किराया 11 रुपये तय किया गया है। दूसरी तरफ ऑटो वालों का किराया पांच से लेकर 10 रुपये तक है। सिटी बस का किराया ज्यादा होने के कारण भी लोग उनमें सफर करना पसंद नहीं कर रहे है। इसके अलावा शहर के चौराहों पर लगने वाले जाम में भी सिटी बसें जाम फंस रही हैं।
सिटी बसों का न समय तय न ही स्टॉपेज
सिटी बसों काे शहर में चलाने से पहले अधिकारी नगर निगम के यात्री शेड को उनका स्टॉपेज बनाने की बात कह रहे थे लेकिन अब बिना स्टॉपेज के ही बसों काे शहर में चलाया जा रहा है। जब स्टॉपेज ही तय नहीं हैं तो यह भी तय नहीं हो पा रहा है कि कहां कितने समय सिटी बस मिलेगी। यह भी एक कारण है कि सिटी बस का इंतजार करने के बजाय लोग ऑटो पकड़ना ज्यादा बेहतर समझते हैं।
शहर में चल रहे देहात परमिट के ऑटो पर समय-समय पर अभियान चलाकर कार्रवाई की जाती है। अगर इसके बाद भी देहात परमिट के ऑटो शहर में चल रहे है तो फिर अभियान चलाकर कार्रवाई की जाएगी---राम मोहन सिंह, एसपी ट्रैफिक।
पीले ऑटो के खिलाफ अभियान चलाकर उन्हे सीज किया था। अब एआरटीओ प्रवर्तन को विशेष रूप से पीले ऑटो के खिलाफ अभियान चलाने के निर्देश दिए हैं। इस बार शहर में सभी पीले ऑटो सीज कर दिए जाएंगे---दिनेश कुमार सिंह, आरटीओ प्रवर्तन।
शहर में देहात परमिट के ऑटो की भरमार से सिटी बसों को चलाने में दिक्कत होती है। सिटी बसों के 90 प्रतिशत स्टॉपेज तैयार हो चुके हैं। किला पुल शुरू होने के बाद सिटी बसों में यात्रियों की संख्या बढ़ेगी---राजेश पाठक, एआरएम, सिटी बस।
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