प्रयागराज: माफिया अतीक के साढू की 300 बीघे के प्लाट पर चला बुलडोजर

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Edited By Ankit Yadav
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करैली बख्शी मोढ़ा में कब्जा करके अवैध की थी प्लाटिंग

अमृत विचार, प्रयागराज। कृष्ण कुमार पाल उर्फ उमेश पाल की हत्या के मामले में योगी सरकार ने माफियाओं की कमर को तोड़कर रख दिया  है। गुरुवार को पीडीए प्रशासन ने अतीक अहमद के एक और करीबी के खिलाफ एक बड़ी कार्रवाई की है। अतीक अहमद के साढू इमरान पुत्र स्व मो जई के करैली बख्शी मोढ़ा दामूपुर में बने 300 बीघे की प्लाटिंग पर पीडीए प्रशासन ने बुलडोजर चलाकर ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की है।

बता दें कि उमेश पाल हत्या कांड के मामले में पुलिस और पीडीए प्रशासन ने अतीक के कई करीबियों की अवैध सम्पत्तियों को चिन्हित किया है। जिसमे कुछ पर पहले ही कार्रवाई की जा चुकी है। वहीं गुरुवार को पीडीए ने बड़ी कार्रवाई की है। करेली थाना क्षेत्र के बख्शी मोढ़ा दामूपुर में अवैध तरीके से बनाई गई 300 बीघे की प्लाटिंग पर बुलडोजर चला दिया गया।

प्रशासन के मुताबिक यह जमीन अतीक अहमद के साढू की है। जो 300 बीघे से ऊपर की है। प्रशासन के मुताबिक यह जमीन काफी समय पहले इमरान ने कब्जा किया था और कब्जा करने के बाद इस पर अवैध प्लाटिंग कराई थी।जिससे उसका काला कारोबार चल रहा था। इस काली कमाई से आने वाला रुपया अतीक अहमद तक पहुंचाया जा रहा था। जिससे अतीक के साढू इमरान को अतीक अहमद का पूरा संरक्षण प्राप्त था। प्रशासन का कहना है कि प्रयागराज विकास प्राधिकरण की अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई है।

शूटर गुलाम और सदाकत ने  2013 में अतीक गैंग से शुरू किया सफर

शिवकुटी क्षेत्र मेहदौरी में रहने वाले गुलाम हसन और सदाकत के बीच काफी गहरी दोस्ती रही है। दोनों ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से एक साथ एलएलबी की पढ़ाई की थी। पढ़ाई पूरी होने के बाद गुलाम हसन और सदाकत अतीक के करीबियों से मिलना जुलना शुरू किए थे। जिसके बाद अतीक के गैंग में शामिल हो गए। कुछ समय बाद 2013 में गुलाम हसन ने नगर निगम में ठेकेदारी शुरू की थी। उस दौरान नगर निगम में चन्दन सिंह की भी ठेकेदारी चलती थी। दोनो के बीच किसी ठेके को लेकर 2013 में विवाद हुआ था। उधर गुलाम की अतीक के करीबियों से अच्छी बनने लगी थी। धीरे-धीरे गुलाम खुद को अतीक के सहारे  मजबूत करता गया और पैसा कमाने लगा। 

नगर निगम की ठेकेदारी के दौरान ही 2013 में ठेकेदार चंदन सिंह की सिविल लाइंस में हत्या हो गयी। हत्या के मामले में गुलाम का नाम आया और उसके खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया। हत्या में गुलाम को नामजद किया गया था और जेल भी गया था। जेल से छूटने के बाद वह तमाम सपा नेताओं के बीच बैठना शुरू किया और उन नेताओं के संपर्क में आता गया। वहीं अतीक और गुलाम की मुलाकात अक्सर पेशी के दौरान प्रयागराज कचहरी में होती थी। गुलाम छोटी मोटी रकम लेकर अतीक अहमद के लिए काम करने लगा था। इस बीच गुलाम के ऊपर 6 मुकदमे भी दर्ज हुए।

वही धूमनगंज इलाके में कृष्ण कुमार पाल उर्फ उमेश पाल की हत्या के मामले में भी गुलाम हसन का नाम चर्चा में तब आया जब उसे सीसीटीवी में गोली चलाते हुए देखा गया। गुलाम और उसके साथियों पर प्रयागराज पुलिस ने ईनाम घोषित कर दिया है। चंदन सिंह की हत्या के मामले में गुलाम जेल भी गया था। जेल से छूटने के बाद 2015 में गुलाब ने शादी की थी। वहीँ गुलाम की दो बेटियां हैं। एक बेटी 5 साल की है तो दूसरी 1 साल की। गुलाम की इन करतूतों से उसके घर वाले समाज में किसी को मुंह दिखाने काबिल नहीं बचे हैं। घरवाले गुलाम को सिर्फ कोस रहे है।

खंडहर के दूसरे मंजिल पर कभी गूंजती थी घुंघरु की झंकार

माफिया अतीक अहमद के चकिया स्थित कार्यालय की बात करें तो सपा सरकार में अतीक अहमद का जलवा हुआ करता था। वह सांसद होने के साथ-साथ बाहुबली माफिया था। आस पड़ोस के लोगो का कहना है कि इसी कार्यालय के दूसरे मंजिलें पर बने कमरे से घुंघरु की झंकार सुनाई देती थी। ऊपर के एक कमरे में मुजरा होता था। कमरे में लगे गद्दे वाले 3 सोफे इस बात का गवाह है कि यहां अतीक का दरबार सजता था। रोज रात में मुजरे के साथ अय्याशी होती थी। बसपा सरकार आने के बाद मायावती ने अतीक अहमद के इस कार्यालय को दो बार गिराया था। दो बार छापेमारी में दो असलहे बरामद किए गए थे। तब से कार्यालय वीरान खंडहर की तरह पड़ा हुआ है।

पूर्वांचल के शूटरों को मिलती थी यहां पनाह


 
प्रयागराज के चकिया स्थित कार्यालय को माफिया अतीक का मुख्यालय कहा जाता था। तीन मंजिला इस दफ्तर में बैठकर अतीक अपना दरबार सजाता था। कार्यालय से मंगलवार को हथियार और रुपए मिलने के बाद हुई जांच में कई बड़े खुलासे हुए हैं। कहा यह भी जाता है कि पूर्वांचल के बड़े-बड़े माफिया अतीक अहमद के चकिया स्थित इसी कार्यालय में मुलाकात करने आया करते थे। जिनके रुकने और खाने से लेकर वो सारी व्यवस्था कराई जाती थी जो एक अय्याशी के लिए होनी चाहिए। पूर्वांचल के शूटरों के लिए खास इंतजाम किये जाते थे।

आठ पुलिसकर्मी का जिले से बाहर तबादला

धूमनगंज में तैनात इंस्पेक्टर वजी उल्लाह का ट्रेनिग सेंटर तबादला, करैली थाने में तैनात दरोगा इबरार अहमद का मेरठ तबादला, दरोगा समी आलम को मेरठ पीटीएस भेजा गया, दरोगा उबैदुल्ला अंसारी को जालौन पीटीएस भेजा गया, सिपाही फारूक अहमद, बाबर अली का भी शाहजहांपुर तबादला , सिपाही महफूज आलम, ललितपुर, मो.अयाज खान का भी बदायूं तबादला किया गया। लखनऊ से जारी आदेश में प्रभाव से इन्हें तत्काल रवाना करने की बात लिखी है।

अतीक अहमद के टॉर्चर रूम में हुई थी उमेश की पिटाई

अतीक अहमद के चकिया स्थित कार्यालय की अब कलई खुलने लगी है। इस कार्यालय से पुलिस ने दो बार असलहे बरामद किया है। कार्यालय में अतीक अहमद ने एक टॉर्चर रूम बनवाया था। जहां लोगो को बन्दकर टार्चर किया जाता था और गुंडा टैक्स वसूला जाता था।अतीक की बात ना मानने वालो को उसके गुर्गे उठा लाते थे और कमरे में बंद करके पीटते थे। उसकी जुल्म की कहानी किसी से छिपी नहीं है। उमेश पाल को अगवा करने के बाद इसी कार्यालय में मारा पीटा गया था पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक विधायक राजू पाल की 2005 में धूमनगंज में हत्या कर दी गई थी। 

इस वारदात के बाद राजू पाल के दोस्त और उनकी पत्नी पूजा पाल के रिश्तेदार उमेश पाल ने पति के खिलाफ मोर्चा खोल लिया था। उसे अतीक के खिलाफ गवाही देने से रोका गया था। अतीक अहमद ने उमेश पाल को अगवा कर उसे चकिया स्थित कार्यालय पर लाया था। इसी कार्यालय में बने टॉर्चर रूम में उमेश पाल को मुर्गा बनाकर पीटा गया और हत्या की धमकी दी गई थी।

मौत का खौफ दिखाकर उमेश पाल को गवाही बदलने के लिए धमकाया गया था। उस वक्त उमेश पाल के पास अपनी जिंदगी बचाने के लिए दूसरा कोई विकल्प नहीं था। उसने अतीक और अशरफ के खिलाफ गवाही नहीं दी थी, लेकिन 2007 में बसपा शासनकाल में कहानी बदल गई और उमेश पाल ने अतीक के खिलाफ अपहरण करने की एफआईआर दर्ज कराई। इसी मुकदमे में फैसला आना था और उमेश की हत्या करा दी गयी।

अतीक के कार्यालय की जांच शुरू

माफिया अतीक अहमद के चकिया स्थित कार्यालय की फिर जांच होगी। सालों बाद से बंद कार्यालय में लाखों के नोट और हथियार मिलने के बाद प्रयागराज विकास प्राधिकरण की नजर पड़ी हुई है। हालांकि प्रयागराज विकास प्राधिकरण ने ही अतीक अहमद के कार्यालय का नक्शा पास किया है । फिर भी मंगलवार की घटना के बाद प्रयागराज विकास प्राधिकरण नक्शे के साथ कार्यालय के निर्माण का मिलान करेगा। नक्शे के विपरीत कार्यालय में कोई भी निर्माण मिलने पर प्रयागराज विकास प्राधिकरण उसे तोड़ेगा।

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