राहुल की संसद सदस्यता रद्द करना ‘फासीवादी' कार्रवाई: CM स्टालिन 

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Edited By Amrit Vichar
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चेन्नई। द्रविड़ मुन्नेत्र कषगम (द्रमुक) अध्यक्ष एवं तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम. के. स्टालिन ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी की लोकसभा सांसद पद से अयोग्य ठहराए जाने को ‘फासीवादी कार्रवाइ’ और ‘प्रगतिशील लोकतांत्रिक ताकतों पर हमला’ करार दिया है और इस निर्णय को रद्द करने की मांग की है। श्री स्टालिन ने शुक्रवार शाम को यहां एक बयान में भारत के युवा नेता राहुल गांधी को संसद सदस्य के रूप में अयोग्य घोषित करने के ‘फासीवादी’ कृत्य की निंदा की और कहा कि इससे पता चलता है कि भारतीय जनता पार्ट (भाजपा) नेतृत्व उनसे डर गया है। 

उन्होंने कहा कि यह एक राष्ट्रीय पार्टी के नेता और एक सांसद के अपनी राय व्यक्त करने के मौलिक लोकतांत्रिक अधिकार को दबाने के बराबर है। उन्होंने कहा,“भारत के सभी राजनीतिक दलों को इसका एहसास होना चाहिए और हमें एकजुट होकर इसका विरोध करना चाहिए।” उन्होंने कहा कि गांधी द्वारा की गई एक कथित टिप्पणी को लेकर सूरत जिला अदालत में एक आपराधिक मानहानि का मामला दायर किया गया था। उन्होंने कहा कि इस मामले में उन्हें दो साल की सजा सुनाई गई है। स्टालिन ने कहा कि फैसला सुनाने वाले मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने 30 दिनों के लिए सजा को निलंबित कर दिया है, जिससे राहुल गांधी को ऊपरी अदालत में अपील करने की अनुमति मिल गई है। 

उन्होंने कहा,“इस फैसले के खिलाफ अपील करने से पहले गांधी को एक सांसद के रूप में अयोग्य ठहराना, संसद के निर्वाचित सदस्य का अधिकार छीनने के अलावा कुछ नहीं है।” स्टालिन ने कहा कि केवल एक निचली अदालत ने अभी तक अपना फैसला सुनाया है। उच्च न्यायालय में एक अपील अभी भी की जा सकती है। वहीं उच्चतम न्यायालय को इस मामले में अंतिम फैसला सुनाना चाहिए। 

उन्होंने कहा कि जिला अदालत के फैसले के एक दिन के भीतर राहुल गांधी को अयोग्य घोषित करने से ऐसा लगता है कि भाजपा इस अवसर का इंतजार कर रही थी। मुख्यमंत्री ने कहा,“अब यह स्पष्ट हो गया है कि गांधी से कितना डरती है। भाई राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा का प्रभाव भी भाजपा के डर का एक कारण है।” उन्होंने कहा,“संसद में गांधी के किसी भी आरोप का अब तक केंद्र सरकार से किसी मंत्री ने भी प्रतिक्रिया नहीं दी है।

उन्होंने गांधी के फिर से संसद में प्रवेश करने के डर से उन्हें अयोग्य घोषित कर दिया है, जिससे उनकी राजनीति खतरे में पड़ जाएगी। ऐसा करके भाजपा ने अपनी साख खो दी है। उन्हें ‘लोकतंत्र’ शब्द का उच्चारण करने का भी अधिकार है।” 

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