Uttarakhand : जी-20 सम्मेलन की वैज्ञानिक सलाहकारों की गोलमेज बैठक के लिए रामनगर तैयार 

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Edited By Amrit Vichar
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रामनगर। उत्तराखंड में मंगलवार से शुरू होने वाली जी 20 देशों के मुख्य वैज्ञानिक सलाहकारों की गोलमेज बैठक के लिए तैयारियां पूरी हो चुकी हैं जहां विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी से संबंधित आपसी हित के मुद्दों पर चर्चा की जाएगी। इस तीन दिवसीय जी-20 बैठक में 13 देशों के वैज्ञानिक भाग लेंगे जिनका स्वागत करने के लिए कुमाऊं क्षेत्र में नैनीताल जिले का रामनगर शहर पूरी तरह से सजधज के तैयार है।

आधिकारिक सूत्रों ने यहां बताया कि सम्मेलन में भाग लेने के लिए आ रहे विभिन्न देशों के वैज्ञानिक और भारतीय अधिकारी निकटवर्ती पंतनगर हवाई अड्डे पहुंचेंगे जहां उत्तराखंड सरकार के वरिष्ठ अधिकारी मेहमानों का स्वागत उत्तराखंडी टोपी पहनाकर करेंगे। उन्होंने बताया कि रामनगर शहर में जी 20 सम्मेलन की तैयारियों के लिए सरकार ने रामनगर नगर निगम को 1.6 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी है। 

केंद्रीय रक्षा एवं पर्यटन राज्य मंत्री अजय भट्ट ने बताया कि बैठक में भारत छह बिंदुओं पर प्राथमिकता से चर्चा करेगा ताकि विदेशी प्रतिनिधि भारत की मंशा को अच्छी तरह से जान सकें। भट्ट ने बताया कि इन छह बिंदुओं में पहला-हरित, विकास,जलवायु, वित्त और जीवन, दूसरा-त्वरित समावेशी और लचीला विकास, तीसरा-सतत विकास लक्ष्य (एसडीजी) पर प्रगति में तेजी लाना, चौथा-तकनीकी परिवर्तन और डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना, पांचवा-21वीं सदी के लिए बहुपक्षीय संस्थान तथा छठा-महिलाओं के नेतृत्व में विकास है।

उन्होंने कहा कि सम्मेलन में कई वैश्विक संस्थाएं भाग लेंगी जिनमें संयुक्त राष्ट्र, अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष, विश्व स्वास्थ्य संगठन, विश्व व्यापार संगठन, विश्व श्रम संगठन, वित्तीय स्थिरता बोर्ड, एशियाई विकास बैंक और कनेक्शन फॉर इकोनामिक कोऑपरेशन एंड डेवलपमेंट शामिल हैं।

जी 20 सम्मेलन के भारत में आयोजित होने को गर्व का विषय बताते हुए भट्ट कहा कि बैठक में जी 20 देशों के अलावा, भारत के मित्र देश जैसे बांग्लादेश, मिस्र, मॉरीशस, नीदरलैंड, नाइजीरिया, ओमान, सिंगापुर, स्पेन और संयुक्त अरब अमीरात के प्रतिनिधि भी शामिल हो रहे हैं।

रामनगर में आयोजित गोलमेज बैठक का उद्देश्य जी 20 के सदस्य देशों के मुख्य वैज्ञानिक सलाहकारों और उनके समकक्षों के साथ-साथ आमंत्रित देशों को एक साथ लाना है जिससे विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी से संबंधित महत्वपूर्ण वैश्विक नीतिगत मुद्दों पर विचार-विमर्श कर सहयोग की रूपरेखा विकसित की जा सके।

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