Kanpur में पुराने सियासी रौब में दिखायी दिए चाचा और भतीजा, लाजपत भवन में खटीक रजत जयन्ती समारोह आयोजित
कानपुर के लाजपत भवन में खटीक रजत जयन्ती समारोह आयोजित हुआ।
कानपुर के लाजपत भवन में खटीक रजत जयन्ती समारोह आयोजित हुआ। जहां पुराने सियासी रौब में अखिलेश और शिवपाल यादव दिखायी दिए।
कानपुर, अमृत विचार। रिश्तों में तल्खी के बाद मैनपुरी में लोकसभा उपचुनाव में रिश्ते सुधरे तो राजनीतिक हालात ने चाचा शिवपाल और भतीजा अखिलेश यादव के बीच अच्छी खासी समझ विकसित हुई। लंबे अरसे बाद शिवपाल और अखिलेश कानपुर में एक मंच पर दिखाई दिए। वरिष्ठ सपा नेता नीलम रोमिला सिंह बताती हैं कि सपा सरकार के कार्यकाल में डायल 100 के उद्घाटन में कोई सात साल पहले दोनों नेता मंच पर दिखायी दिए थे। हालांकि सपा विधायक मोहम्मद हसन रूमी का कहना है कि उन्हें नहीं याद पड़ता है कि कानपुर में दोनों नेताओं ने मंच साझा किया हो।
जगजाहिर है कि जब नेताजी ( मुलायम सिंह यादव) के कार्यकाल में अखिलेश के चाचा शिवपाल यादव की सरकार और संगठन पर तगड़ी पकड़ हुआ करती थी। बाद राजनीतिक और पारिवारिक विवाद से दूरियां बढ़ीं लेकिन नेताजी के निधन के बाद हुए मैनपुरी उपचुनाव में डिंपल यादव मैदान में आईं तो चाचा भतीजा एक हो गए। मंगलवार को लाजपत भवन में हुए खटिक सम्मेलन में मंच पर दोनों नेताओं के हावभाव (बॉडी लैंग्वेज) आपसी सामंजस्य का राजनीतिक संदेश दे रहे थे।
वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में बसपा का दलित वोट खींचने वाली भाजपा ने पिछड़ी जातियों पर भी मेहनत की। दोनों नेताओं ने मंच पर संबोधन में एक दूसरे को सम्मान दिया। शिवपाल ने कानपुर में उनकी पार्टी प्रसपा के अध्यक्ष रहे आशीष चौबे को अखिलेश से मिलाया भी। सपा अपने पुराने रौब में लौट रही है। पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश अपने चाचा शिवपाल से बराबर रायमशविरा करते हैं, यही नहीं राजनीतिक पिच पर फ्रंटफुट खेलने का मौका भी उन्हीं को दिया है। जाति जनगणना, खतरे में संविधान, अतीक के मामले में कमजोर लॉ एंड आर्डर सहित अन्य खास मुद्दों पर दोनों आक्रामक दिखे हैं।
