Kanpur के Baradevi Mandir की अद्भुत मान्यता, घर से भाग कर एक साथ छिपीं थी 12 बहनें, फिर हुआ था ये
कानपुर का बारादेवी मंदिर पत्थर बनी 12 बहनों के नाम पर है।
कानपुर का बारादेवी मंदिर पत्थर बनी 12 बहनों के नाम पर है। पिता के प्रकोप से बचने के लिए घर से भाग कर एक साथ 12 बहनें छिपीं थी। दर्शन के बाद लाल चुनरी बांधने से मनोकामना पूरी होने की मान्यता है।
कानपुर, अमृत विचार। नवरात्र पर शहर के प्राचीन मंदिरों में माता के दर्शन को भक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है। इन्हीं मंदिरों में प्रसिद्ध बारादेवी मंदिर भी है। यह मंदिर कई सौ साल पुराना है। शहर और आस-पास के जिलों में बारादेवी मंदिर को लेकर लोगों में विशेष आस्था है।
शहर के दक्षिण क्षेत्र में स्थित बारादेवी मंदिर में साल भर भक्तों का तांता लगा रहता है। नवरात्र में यहां मेला लगता है। आसपास के जनपदों से भक्त माता के दर्शन को आते हैं। मान्यता है कि मंदिर में माता के दर्शन करलाल चुनरी बांधने से हर मनोकामना पूर्ण होती है। चैत्र नवरात्र में यहां भक्त दूर-दूर से जवारे लेकर पहुंचते हैं। कोई मुंह में सांगा लगाकर, कोई पूरे शरीर में सुईयां चुभोकर तो कोई दंडवत लेटकर दरबार में आकर मनोकामना मांगता है।
कुछ इस तरह हुआ नामकरण
मंदिर के पुजारी ज्ञानू पांडेय ने बताया कि पिता से हुई अनबन के कारण उनके गुस्से के प्रकोप से बचने के लिए एक साथ 12 बहनें घर से भागकर यहां स्वत: स्फूर्त मूर्ति के रुप में स्थापित हो गईं। सालों बाद यही 12 बहनें बारादेवी के नाम से प्रसिद्ध हुईं। कहा जाता है कि 12 बहनों के श्राप देने से पिता भी पत्थर रुप में हो गए थे।
12 से 17 सौ साल पुरानी हैं मूर्तियां
पुजारी के अनुसार कुछ वर्ष पूर्व पुरातत्व विभाग की टीम ने मंदिर का सर्वेक्षण किया गया था। टीम ने बताया कि मंदिर में स्थापित मूर्तियां 12 से 17 सौ साल तक पुरानी हैं।
