बरेली: नगर निगम के टैक्स विभाग के अफसरों की मनमानी झेल रहे हैं शहर के करदाता
टैक्स विभाग का खेल: एक करदाता को कोर्ट की फीस और वकील का खर्च जोड़कर भेज दिया बिल, दूसरे का टैक्स ही कर दिया 11 लाख कम
बरेली, अमृत विचार। नगर निगम के टैक्स विभाग की पूरी ताकत निगम का खजाना भरने में नहीं बल्कि टैक्स के पूरे सिस्टम को अपनी मनमानी से चलाने में खर्च हो रही है। किसी का बिल ही कम नहीं किया जा रहा बल्कि टैक्स तक घटा दिया जा रहा है और किसी के बिल में कोर्ट फीस और वकील का खर्च भी जोड़कर भेजा जा रहा है। ऐसे ही एक मामले में साढ़े सात सौ रुपये का वार्षिक टैक्स भरने वाले शख्स को 9.44 लाख का बिल भेज दिया गया है। दूसरे मामले में वार्षिक टैक्स में करीब 1.35 लाख की कटौती कर टैक्सदाता को करीब 11 लाख का फायदा पहुंचा दिया।
नगर निगम के टैक्स विभाग की मनमानी के शिकार हुए राजीव सरायपुख्ता के मकान नंबर 50/53 में रहते हैं। मकान उनके पिता रामकुमार रस्तोगी के नाम है, साथ में दो दुकानें भी हैं। नगर निगम ने उन्हें पहले बाकायदा नोटिस जारी कर चेतावनी दी कि अगर टैक्स की अदायगी न होने पर उसे कोर्ट जाना पड़ा तो उन्हें वकील और कोर्ट की फीस के साथ अफसरों के आने-जाने का खर्च भी भरना होगा, इसके बाद ये सारे खर्च जोड़ते हुए उन्हें 9.44 लाख का बिल भी भेज दिया है। बकौल राजीव, उनके पिता का स्वर्गवास हो चुका है। घर का वार्षिक टैक्स 752.62 रुपये है, लेकिन लंबा बकाया दिखाते हुए उन्हें 9 लाख 34 हजार 268 रुपये का बिल भेजा गया। नवंबर में बगैर नोटिस दुकानें सील कर दी गईं। 50 हजार रुपये जमा करके उन्होंने सील खुलवाई तो अगले ही महीने फिर नोटिस भेजकर उन पर करीब 8.84 लाख का संपत्ति कर बकाया दिखा दिया गया।
नोटिस में सात दिन के अंदर पूरा बकाया जमा करने की चेतावनी के साथ यह भी कहा गया था कि इस अवधि में टैक्स जमा न करने पर नगर निगम उन पर कोर्ट में केस करेगा और उसमें वकील की फीस 20 हजार, केस दायर करने का खर्च 15 हजार और अफसरों का हाईकोर्ट आने जाने पर होने वाला 25 हजार रुपये का खर्च जोड़ते हुए उनसे 9.44 लाख रुपये की वसूली की जाएगी।
राजेन्द्र नगर में आईडी संख्या 079932 पर पिछले माह ही कर समाहर्ता द्वारा भवन के निरीक्षण के बाद ही वार्षिक भू गणना करना और वार्षिक रेंटल वैल्यू को कामर्शियल से आवासीय करते हुए गणना की गईतो लगभग 11 लाख 29 हजार रुपया कम हो गया है। इस रिपोर्ट में किसी राजस्व निरीक्षक ,मुख्य कर निर्धारण अधिकारी के किसी आदेश का जिक्र नहीं किया गया। इसी तरह राजेन्द्र नगर में ही आईडी संख्या 7916280 में निगम अफसरों ने रिकार्ड समय में काम कर डाला है।
राजीव को रगड़ने के उलट एक दूसरा मामला ऐसा भी है, जिसमें टैक्स विभाग ने इंदिरा नगर वार्ड में टैक्सदाता अनिल कुमार पर भरपूर मेहरबानी दिखाई और उनके बिल में हर साल संशोधित कर वार्षिक रेंटल वैल्यू कम करते रहे।वर्ष 2022 में कर समाहर्ता की रिपोर्ट के आधार पर जोनल अधिकारी और अपर नगर आयुक्त के आदेश पर अनिल के व्यावसायिक संपत्ति की वार्षिक वैल्यू 2 लाख 35 हजार 620 रुपये को संशोधित कर 1 लाख 17 हजार 810 रुपये कर दिया गया। इसकी वजह से उनका बिल पिछले साल 4 लाख 64 हजार 514 रुपये कम हो गया। 2023 में अनिल का बिल अफसरों ने फिर संशोधित कर 32 हजार 991 रुपये और कम कर दिया। उनकी वार्षिक रेंटल वेल्यू कम करके आधे से भी कम 107712 कर दी।
मामला साठगांठ का हो तो....एक ही दिन में सर्वे, जांच, आदेशऔर फिर बिल में संशोधन भी
दिलचस्प यह है कि यह काम 29 मार्च को वित्तीय वर्ष खत्म होने से दो दिन पहले हुआ है। 29 मार्च को ही भवन का सर्वे किया गया। राजस्व निरीक्षक ने स्थलीय निरीक्षण के साथ जांच करके वार्षिक रेंटल वैल्यू कम करने की संस्तुति कर दी। इसके बाद उसी दिन ही मुख्य कर निर्धारण अधिकारी के आदेश पर बिल को 2014-15 से संशोधित कर दिया। एक दिन में इतनी सक्रियता दिखाने की चर्चा नगर निगम में खूब हो रही है।
टेढ़ेमेढ़े नाले में बहा दिए निगम के डेढ़ करोड़ रुपये
नगर निगम में ठेकेदार, अफसर और जनप्रतिनिधियों के गठजोड़ से हुए तथाकथित विकास से करोड़ों रुपये बर्बाद होने की नौबत है। सीबीगंज में छोटी बाजार से मॉल तक बनाया गया नाला किसी काम नहीं आ रहा है। पॉलीटेक्निक के पास 15वें वित्त से लगभग डेढ़ करोड़ की लागत से यह नाला टेढ़ामेढ़ा बना हुआ है लिहाजा नाले का पानी दीवार के दूसरी तरफ भी भर रहा है। इससे उसकी दीवारें धंसने की आशंका जताई जा रही है। लोगों का कहना है कि नाले के पानी का कहीं निकास नहीं है। निर्माण उल्टी दिशा में हुआ है। इस नाले को किसी दूसरे नाले से मिलाया ही नहीं गया है।
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