विपक्ष के हंगामे के बीच राज्यसभा ने प्रतिस्पर्धा संशोधन विधेयक को बिना चर्चा दी मंजूरी

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Edited By Amrit Vichar
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नई दिल्ली। राज्यसभा ने सोमवार को ‘प्रतिस्पर्धा संशोधन विधेयक, 2022’ को विपक्ष के हंगामे के बीच बिना चर्चा के मंजूरी प्रदान कर दी। इसके साथ ही इस महत्वपूर्ण विधेयक को संसद की मंजूरी मिल गई। यह विधेयक गत सप्ताह लोकसभा से पारित हुआ था। पिछले वर्ष अगस्त में इसे निचले सदन में पेश किया गया था। दोपहर दो बजे सदन की कार्यवाही एक बार के स्थगन के बाद फिर शुरू होते ही वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने विपक्षी सदस्यों के शोर-शराबे के बीच ‘प्रतिस्पर्धा (संशोधन) विधेयक, 2022’ को सदन में विचार और पारित करने के लिए रखा। विपक्षी सदस्य अडाणी मुद्दे की संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) से जांच की मांग को लेकर नारेबाजी कर रहे थे। 

हंगामे के बीच ही इस विधेयक को बिना चर्चा के ध्वनिमत से मंजूरी दे गई। इसके बाद सभापति जगदीप धनखड़ ने सदन की कार्यवाही को दिन भर के लिए स्थगित कर दी। इस विधेयक के जरिये कॉरपोरेट मामलों के मंत्रालय ने मूल विधेयक में कुछ संशोधन किये हैं। विधेयक के कारणों एवं उद्देश्यों के अनुसार इसमें से एक बदलाव कारोबार के संदर्भ में है जिस पर प्रतिस्पर्धा कानून के उल्लंघन के मामले में जुर्माना लगाने के दौरान विचार किया जायेगा। लोकसभा द्वारा गत बुधवार को स्वीकृत किये गए संशोधनों के अनुसार, कारोबार का अर्थ किसी व्यक्ति या उद्यम के सभी उत्पादों और सेवाओं से निकाला जाता है।

 ज्ञात हो कि ‘प्रतिस्पर्धा संशोधन विधेयक, 2022’ को पिछले वर्ष पांच अगस्त को संसद में पेश किया गया था। इसके बाद इसे भारतीय जनता पार्टी के सांसद जयंत सिन्हा की अध्यक्षता वाली संसद की वित्त संबंधी स्थायी समिति को विचारार्थ भेजा गया था। समिति ने 13 दिसंबर को रिपोर्ट पेश की थी। ‘प्रतिस्पर्धा अधिनियम 2002’ को प्रतिस्पर्धा पर प्रतिकूल प्रभाव रखने वाले व्यवहारों का निवारण करने, बाजारों में प्रतिस्पर्धा का संवर्द्धन करने एवं बनाए रखने, उपभोक्ताओं के हितों की सुरक्षा करने तथा भारत में अन्य प्रतिभागियों द्वारा किये जा रहे व्यापार में स्वतंत्रता को सुनिश्चित करने एवं उससे जुड़े विषयों को लेकर एक आयोग की स्थापना करने के लिए बनाया गया था। 

इसमें कहा गया है कि भारतीय बाजारों में महत्वपूर्ण वृद्धि हुई है और पिछले दशक में कारोबार के संचालन के रूप में आमूल-चूल परिवर्तन हुए हैं। आर्थिक विकास, विभिन्न प्रकार के मॉडलों की उत्पत्ति और आयोग के कार्यकरण में प्राप्त किये गए अनुभवों को ध्यान में रखते हुए भारत सरकार ने उक्त अधिनियम की जांच करने और सुझाव देने के लिये एक प्रतिस्पर्धी विधि पुनरावलोकन समिति का गठन किया। 

विधेयक में कहा गया कि प्रस्तावित सिफारिशों पर विचार करने एवं लोक परामर्श करने के बाद विनियामक निश्चितता और विश्वास आधारित कारोबारी वातावरण का उपबंध करने के लिए मूल अधिनियम में संशोधन करना जरूरी समझा गया। इसमें अन्य बातों के अलावा स्पष्टता का प्रावधान करने के लिए ‘उद्गम’, ‘सुसंगत बाजार उत्पाद’,‘नियंत्रण’, जैसी परिभाषाओं में परिवर्तन करने की बात कही गई है। इसके अलावा प्रतिस्पर्धा विरोधी करारों के कार्य क्षेत्र का विस्तार और ऐसे करारों के अधीन प्रतिस्पर्धा विरोधी करार को सुगम बनाने वाले पक्षकारों को शामिल करने का प्रावधान है। 

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