कुछ ही महीनों में 40 से अधिक देश CDRI से जुड़े, आपदा किसी एक जगह की समस्या नहीं : PM मोदी
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को डिजास्टर रेजिलिएंट इन्फ्रास्ट्रक्चर पर अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन को संबोधित किया। इस मौके पर पीएम मोदी ने कहा कि आपदा समुत्थानशील अवसंरचना के 5वें अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन (ICDRI) में आपका बहुत स्वागत है। यह एक अंतरराष्ट्रीय वैश्विक दृष्टि से बना है। आपस में जुड़े विश्व में आपदा का प्रभाव केवल स्थानीय ही नहीं होगा। एक क्षेत्र पर आपदा का पूरी तरह से अलग क्षेत्र पर प्रभाव पड़ेगा।
पीएम मोदी ने कहा कि कुछ ही महीनों में 40 से अधिक देश CDRI से जुड़े हैं। यह सम्मेलन एक महत्वपूर्ण मंच बन रहा है। उन्नत और विकासशील अर्थव्यवस्था, छोटे और बड़े देश, ग्लोबल नोर्थ एंड साउथ सब इस मंच पर साथ आ रहे हैं। यह भी जानना चाहिए कि इसमें सिर्फ सरकारें भी नहीं बल्कि वैश्विक संस्थाएं भी साथ आ रही हैं।
PM Shri @narendramodi's remarks at International Conference on Disaster Resilient Infrastructure.
— BJP (@BJP4India) April 4, 2023
https://t.co/MGy2hdXIBO
पीएम मोदी ने कहा कि पूर्व में हुई दुर्घटनाओं और उनसे सीखना ही एक रास्ता है और यहीं पर CDRI और यह सम्मेलन एक महत्वपूर्ण किरदार निभाता है। प्रत्येक राष्ट्र और क्षेत्र विभिन्न प्रकार की आपदाओं का सामना करता है। समाज बुनियादी ढांचे से संबंधित स्थानीय ज्ञान विकसित करते हैं जो आपदा का सामना कर सकते हैं। बुनियादी ढांचे का आधुनिकीकरण करते समय इस तरह के ज्ञान को उपयोग करने की आवश्यकता होती है।
उन्होंने कहा, निकटता से जुड़ी दुनिया में, आपदाओं का प्रभाव केवल स्थानीय नहीं होगा, बल्कि एक क्षेत्र में आपदा का अलग क्षेत्र में बड़ा प्रभाव पड़ सकता है। इसलिए, हमारी प्रतिक्रिया एकीकृत होनी चाहिए, अलग-थलग नहीं। प्रधानमंत्री ने कहा कि प्रत्येक राष्ट्र और क्षेत्र विभिन्न प्रकार की आपदाओं का सामना करता है और इन परिस्थितियों में समाज बुनियादी ढांचे से संबंधित स्थानीय ज्ञान विकसित करता है। उन्होंने बुनियादी ढांचे का आधुनिकीकरण करते समय, इस तरह के ज्ञान का बुद्धिमानी से उपयोग करने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा, "स्थानीय अंतर्दृष्टि के साथ आधुनिक तकनीक लचीलेपन के लिए बहुत अच्छी हो सकती है। इसके अलावा, यदि अच्छी तरह से इनका उपयोग किया जाता है तो स्थानीय ज्ञान एक वैश्विक सर्वोत्तम अभ्यास बन सकता है।
भारत की अगुवाई वाला सीडीआरआई नयी दिल्ली में आपदा प्रतिरोधी बुनियादी ढांचे पर दो दिवसीय सम्मेलन आयोजित कर रहा है। मोदी ने कहा कि कुछ ही वर्षों में, 40 से अधिक देश सीडीआरआई का हिस्सा बन गए हैं और इस प्रकार यह सम्मेलन एक महत्वपूर्ण मंच बनता जा रहा है। उन्होंने कहा, उन्नत अर्थव्यवस्थाएं और विकासशील अर्थव्यवस्थाएं, छोटे देश और बड़े देश, वैश्विक उत्तर और वैश्विक दक्षिण इस मंच पर एक साथ आ रहे हैं। यह भी उत्साहजनक है कि केवल सरकारें ही इसमें शामिल नहीं हैं, बल्कि वैश्विक संस्थान और निजी क्षेत्र भी एक बड़ी भूमिका निभा रहे हैं।
इस प्रमुख वार्षिक कार्यक्रम में 20 से ज्यादा देशों से 50 वैश्विक संगठनों, निजी क्षेत्र और शिक्षण संस्थानों के प्रतिनिधि के तौर पर लगभग 90 विशेषज्ञ शामिल हैं। इसमें अधिक मजबूत दुनिया के लिए संभावित समाधानों को बढ़ाने और आपदा एवं जलवायु अनुकूल उद्देश्यों की सुविधा पर ध्यान केंद्रित किया जाना है। सम्मेलन में बुनियादी ढांचे में मजबूती लाने और आपदाओं के बढ़ते मामलों तथा प्रभाव के कारण लोगों और समुदायों के लिए आवश्यक सेवाओं की पहुंच, वितरण और निरंतरता सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर जोर देने का प्रयास किया जाएगा।
क्या है ICDRI ?
आईसीडीआरआई यानि कोलिएशन फॉर डिजास्टर रेजिलिएंट इंफ्रास्ट्रक्चर एक तरह का आपदा प्रतिरोधी अवसंरचना के लिए बनाया गया गठबंधन है। आईसीडीआरआई आपदा के दौरान बुनियादी ढांचे को सुनिश्चित करने और जीवन के साथ भौतिक बुनियादी ढांचे को सुरक्षित करने का काम करता है। इसके समान विचारधारा वाले देशों का यह गठबंधन है। हाल ही में पीएम मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने आपदा प्रतिरोधी अवसंरचना के लिए आईसीडीआरआई को इंटरनेशनल संगठन के तौर पर स्वीकृति दी है।
आईसीडीआरआई के लाभ
आईसीडीआरआई का लाभ यह है कि इसके माध्यम से अन्य देशों में एक्सपर्ट्स की नियुक्ति की जा सकती है। साथ ही आईसीडीआरआई गतिविधियों के लिए वैश्विक स्तर पर निधि प्राप्त की जा सकती है। सदस्य देशों से सहायता प्राप्त की जा सकती है। भारतीय वैज्ञानिक एवं तकनीकी संस्थानों के साथ-साथ सार्वजनिक न निजी क्षेत्र तकनीकी जानकारी का आदान-प्रदान कर सकते हैं।
ये भी पढ़ें : UPA के दौरान भ्रष्टाचार के लिए दोषसिद्धि दर अधिक रही : कपिल सिब्बल
