लखनऊ : लोक सेवकों के विरुद्ध नहीं मिले भ्रष्टाचार के आरोप
सुनवाई मजिस्ट्रेट कोर्ट को स्थानांतरित
लखनऊ, अमृत विचार। बैंक धोखाधड़ी के एक मामले में लोक सेवकों के खिलाफ भ्रष्टाचार का आरोप न पाए जाने पर सीबीआई की के विशेष न्यायाधीश अजय विक्रम सिंह ने मामले को सुनवाई के लिए न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीबीआई) की कोर्ट में भेज दिया है। विशेष न्यायिक मजिस्ट्रेट सीबीआई समृद्धि मिश्रा ने मामले को दर्ज करते हुए संज्ञान के बिंदु पर सुनवाई के लिए 20 अप्रैल तारीख़ तय की है, साथ ही विवेचक को भी तलब किया है।
पत्रावली के अनुसार धोखाधड़ी व धन का दुर्विनियोग करने के आरोपों को लेकर केनरा बैंक के मुख्य प्रबंधक अजीत कुमार श्रीवास्तव ने सीबीआई से शिकायत की थी, जिस पर सीबीआई ने इस शिकायत को जांच के लिए 30 नवम्बर 2021 को केस दर्ज किया था। रिपोर्ट में केनरा बैंक के मैनेजर ने मेसर्स रोहतास प्रोजेक्ट लिमिटेड व मैसेज क्लेरियोन टाउनशिप के निवेशकों द्वारा दुरभि संधि कर 24 करोड़ 82 लाख रुपए का घपला किए जाने की बात कही थी।
सीबीआई की ओर से अर्जी देकर कहा गया था कि शिकायती अर्ज़ी पर मैसर्स रोहतास प्रोजेक्ट लिमिटेड, मैसर्स क्लेरियोन टाउनशिप प्राइवेट लिमिटेड, परेश रस्तोगी, पंकज रस्तोगी ,पीयूष रस्तोगी, दीपक रस्तोगी, अखिलेश और जमुना प्रसाद रावत व अज्ञात लोक सेवकों एवं अन्य के विरुद्ध मुकदमा दर्ज किया गया था। सीबीआई की ओर से बताया गया कि अब तक विवेचना में लोक सेवकों की संलिप्तता नहीं पाई गई है। आरोप पत्र के अनुसार इस मामले में विवेचना में मेसर्स रोहतास प्रोजेक्ट लिमिटेड के निदेशक तथा मेसर्स क्लेरियोन टाउनशिप प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक एवं परेश रस्तोगी ,पीयूष रस्तोगी, दीपक रस्तोगी, जमुना प्रसाद और अखिलेश के ख़िलाफ़ धोखाधड़ी का आरोप का होना पाया गया है।
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