बरेली: किला ओवरब्रिज पर ट्रैफिक दौड़ते ही बला-ए-जाम से मुक्ति
मरम्मत के लिए तीन महीने बंद रहने की वजह से मुश्किल था दिल्ली की तरफ आना-जाना, जाम के साथ लंबा फेरा लगाने का भी संकट झेल रहे थे लोग
सोशल मीडिया फोटो
बरेली, अमृत विचार। किला ओवरब्रिज की मरम्मत के दौरान लोगों को करीब तीन महीने तक बेतहाशा मुश्किलें जरूर झेलनी पड़ीं लेकिन जीर्णोद्धार के बाद शुक्रवार को फिर इसकी शुरुआत के बाद ये दिक्कतें उड़नछू हो गईं। जर्जर पुल पर हादसा होने की आशंका से भी निजात मिल गई।
मरम्मत के बाद रंग-बिरंगे गुब्बारों और फूलों से सजे-धजे पुल को वन मंत्री डॉ. अरुण कुमार, सांसद व पूर्व केंद्रीय मंत्री संतोष गंगवार, कैंट विधायक संजीव अग्रवाल और मीरगंज विधायक डॉ. डीसी वर्मा ने जनता को समर्पित किया।
किला ओवरब्रिज को जनता के लिए समर्पित करने से पहले जनप्रतिनिधियों ने सत्यप्रकाश पार्क में सत्यप्रकाश अग्रवाल की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया। वन मंत्री डॉ. अरुण कुमार ने कहा कि ओवरब्रिज का निर्माण बहुत जिम्मेदारी के साथ कराया गया है।
किसी तरह की कोई कमी न रहे, इस पर जोर देने की वजह से कुछ दिनों का विलंब जरूर हुआ, लेकिन अब रामपुर, मुरादाबाद, दिल्ली की तरफ आने-जाने वाले लोगों लंबे समय के लिए बड़ी राहत मिल गई है। उद्घाटन कार्यक्रम में भाजपा नेता एडवोकेट अनिल कुमार, गुलशन आनंद, डॉ. विनोद पागरानी, डॉ. प्रमेंद्र माहेश्वरी, बंटी ठाकुर और पीडब्ल्यूडी प्रांतीय खंड के एक्सईएन नारायण सिंह, जावेद, शादाब आदि मौजूद रहे।
बता दें कि जनवरी में मरम्मत के लिए किला पुल बंद होने के बाद भारी वाहनों को इधर आने से रोक दिया गया था। उन्हें आईवीआरआई और दूसरे रास्तों की तरफ डायवर्ट किया गया था, इस कारण उन्हें कई किलोमीटर का अतिरिक्त चक्कर लगाना पड़ रहा था।
छोटे और मझोले किस्म के वाहनों को साइड लेन पर गुजारा जा रहा था, फिर भी भारी ट्रैफिक होने की वजह से यहां लगातार जाम लग रहा था। रेलवे क्रॉसिंग अलग मुसीबत बनी हुई थी। जाम में आए दिन एंबुलेंस और स्कूल वाहन भी फंस रहे थे। गाड़ियां लेकर इधर से निकलने वाले लोग तो दिक्कतें झेल ही रहे थे, हर वक्त जाम लगा रहने से इस इलाके की आबादी के लिए भी भारी मुश्किल खड़ी हो गई थी।
लोगों को याद आईं तत्कालीन कमिश्नर संयुक्ता समद्दार
किला पुल की मरम्मत के लिए तत्कालीन कमिश्नर संयुक्ता समद्दार को याद किया जाएगा। दरअसल, किला पुल की हालत कई साल पहले ही काफी जर्जर हो गई थी। तकनीकी सर्वे के बाद इस पुल को खतरनाक तक बता दिया गया था, फिर भी उस पर ट्रैफिक दौड़ रहा था।
नवंबर में गुजरात के मोरबी में हादसे के बाद संयुक्ता समद्दार ने सभी पुलों का सर्वे कराया तो किला ओवरब्रिज की हालत सबसे दयनीय मिली थी। फुटपाथ, एक्सपेंशन ज्वाइंट और सड़क पूरी तरह क्षतिग्रस्त पाए जाने पर उन्होंने तुरंत पुल पर ट्रैफिक बंद करा दिया, साथ ही शासन में पैरवी कर आननफानन उसकी मरम्मत के लिए 4.88 करोड़ रुपये भी जारी कराए।
बजट जारी होने के बाद पीडब्ल्यूडी अधिकारियों को सौ दिन के अंदर यानी 31 मार्च तक पुल की मरम्मत करने के निर्देश दिए। पीडब्ल्यूडी के इंजीनियरों के मुताबिक मरम्मत के बाद पुल की जिंदगी 15 साल बढ़ गई है। लोकार्पण के मौके पर मौजूद लोगों के साथ कई भाजपा कार्यकर्ताओं ने भी संयुक्ता समद्दार की खुलकर तारीफ की।
सांसद बोले, सत्यप्रकाश ओवरब्रिज रखा जाएगा नाम
किला पुल के लोकार्पण के मौके पर सांसद व पूर्व केंद्रीय मंत्री संतोष गंगवार ने घोषणा की कि इस पुल का नाम सत्यप्रकाश ओवरब्रिज रखा जाएगा। इसके लिए वह शासन को पत्र लिखेंगे।
आलमगिरीगंज के रहने वाले सत्यप्रकाश अग्रवाल जनता दल की सरकार में जल संसाधन मंत्री रहे थे। मंत्री रहने के दौरान उन्होंने बरेली में कई विकास कार्य कराए थे। उनकी स्मृति में किला ओवरब्रिज के पास सत्यप्रकाश अग्रवाल पार्क बनाया गया था जिसका उद्धघाटन पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह ने 1992 में किया था।
घटेगा दिल्ली-रामपुर जाने वाली रोडवेज बसों का किराया
किला ओवरब्रिज शुरू होने के बाद रामपुर, मुरादाबाद, दिल्ली आने-जाने वाली परिवहन निगम की बसों का किराया भी घट जाएगा। जनवरी में ओवरब्रिज पर यातायात बंद होने के बाद बसों को आठ से 10 किमी का अतिरिक्त चक्कर लगाना पड़ रहा था, इसी कारण उनका किराया भी बढ़ा दिया गया था।
दिल्ली की तरफ से आने वाले बड़े वाहन झुमका चौराहा के अलावा मिनी बाईपास होते हुए सेटेलाइट स्टैंड पहुंचते थे। एक किमी की दूरी तय करने में लोगों को एक घंटे तक समय लगता था। परिवहन निगम के क्षेत्रीय प्रबंधक दीपक चौधरी ने बताया कि ओवरब्रिज शुक्रवार को शुरू होने के बाद बढ़ा हुआ किराया वापस ले लिया जाएगा। बता दें कि किला पुल पर रोज छोटे-बड़े 30 हजार से अधिक वाहनों का आवगमन होता है।
व्यू कटर लगाने का काम अभी जारी रहेगा
किला ओवरब्रिज पर व्यू कटर लगाने का काम बाकी रह गया है जो अगले दो से तीन दिन में पूरा होने की उम्मीद है। एक्सईएन नारायण सिंह ने बताया कि ओवरब्रिज पर यातायात के लिए कोई बाधा नहीं बची थी। लोगों को हो रही असुविधा को देखते हुए ओवरब्रिज शुरू कर दिया गया है लेकिन कुछ हिस्से में व्यू कटर लगाने का बाकी रह गया काम जारी रहेगा। उन्होंने बताया कि रेलवे को भी व्यू कटर लगाने हैं। इस संबंध में रेलवे अधिकारियों को अवगत करा दिया गया है।
800 टन वजन घटाकर फिट हुआ किला ओवरब्रिज
जेई शादाब ने बताया कि किला ओवरब्रिज पर सड़क की 18 सेंटीमीटर मोटी चार पुरानी परतें थीं जिनके वजन से उसकी हालत खराब हो गई थी। इन्हें हटाकर उसका 800 टन वजन कम किया गया है। पीडब्ल्यूडी के पुराने अधिकारियों के भ्रष्टाचार वजह से ही पुल का वजन बढ़ा था। पैसे बचाने के लिए पुरानी परत हटवाए बगैर पुल पर वे सड़क की परत पर परत बिछाते गए। ज्यादा वजन हो जाने की वजह से ही पुल जल्दी जर्जर हो गया।्
काफी दिनों से किला पुल शुरू होने का इंतजार था। शुक्रवार को पुल शुरू होने से जनता को बहुत राहत मिली है। पुल शुरू होने से शहर के अंदर भी जाम की दिक्कत काफी हद तक कम हो जाएगी--- हर्षित सक्सेना, बिहारीपुर
दिक्कत बहुत हो रही थी, लेकिन उम्मीद नहीं थी पुल पर इतनी जल्दी ट्रैफिक शुरू हो जाएगा। शहर में दूसरे कामों को भी बस थोड़ी तेजी से कराने की जरूरत है। इससे सफर और सुगम हो जाएगा--- दिनेश कुमार, राहगीर।
तत्कालीन कमिश्नर संयुक्ता समद्दार की वजह से पुल की जिंदगी बढ़ गई है। इसे ठीक कराने में उनका महत्वपूर्ण योगदान याद रहेगा। काम भी काफी तेजी से हुआ। अब धूल और जाम दोनों से राहत मिलेगी---रजत, राहगीर।
दिन में कई बार सिटी स्टेशन रोड से आना-जाना पड़ता है। अक्सर किला पर रेलवे फाटक बंद मिलता था। जाम लगने से समय की काफी बर्बादी होती थी। ओवरब्रिज शुरू होने से काफी राहत मिली है---सचिन, राहगीर।
किला ओवरब्रिज: एक नजर-
- दिल्ली हाईवे पर 1982 में बनाया गया था 581 मीटर लंबा ओवरब्रिज।
- 25 अगस्त 2020 को सेतु निगम ने ओवरब्रिज पर सफर को खतरनाक माना था।
- नवंबर 2022 में गुजरात के मोरबी में हादसे के बाद तत्कालीन कमिश्नर ने पुलों का कराया था सर्वे।
- ओवरब्रिज की हालत जर्जर मिली तो दिसंबर में वाहनों का आवागमन पूरी तरह बंद करा दिया।
- कमिश्नर की पैरवी पर दिसंबर में शासन ने मरम्मत के लिए 4.88 करोड़ रुपये जारी किए।
- 29 दिसंबर से काम शुरू करने के साथ 31 मार्च तक उसे पूरा करने का लक्ष्य रखा गया।
- एक सप्ताह की देरी से 7 अप्रैल को ओवरब्रिज जनता को समर्पित कर दिया गया।
