बरेली: कहता है आजमनगर... स्मार्ट सिटी कहकर मजाक न उड़ाओ, अंदर गंदगी से भरी नालियां और पीने को गंदा पानी
नई पाइप लाइन का इस्तेमाल नहीं, टूटी-फूटी पुरानी लाइन से ही हो रही है पानी की सप्लाई
बरेली, अमृत विचार। लिखापढ़ी में तो आजमनगर वार्ड स्मार्ट सिटी का हिस्सा है लेकिन यहां के लोग नहीं मानते कि उनकी रिहायश स्मार्ट सिटी में है। वे कूड़े और गोबर से भरी और बजबजाती नालियां और गंदगी से अटी गलियां दिखाकर उल्टा पूछने लगते हैं कि क्या ये आपको स्मार्ट सिटी लगता है।
एक सांस में घरों में गंदा पानी आने और सीवर लाइन जाम होने जैसी तमाम समस्याएं गिना डालते हैं। कहते हैं, स्मार्ट सिटी के नाम पर घंटाघर का सौंदर्यीकरण, मल्टीलेवल पार्किंग और मुख्य सड़क पर कुतुबखाना फ्लाईओवर का निर्माण कराया गया है लेकिन वह सारे शहर के लिए है, सिर्फ आजमनगर के लिए नहीं।
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नगर निगम के वार्ड 20 आजमनगर में करीब 11 हजार मतदाता हैं। स्मार्ट सिटी में शामिल होने के नाते यहां कुछ सड़कें बनी हैं। पानी की पाइप लाइन और सीवर लाइन भी पड़ी है लेकिन अब तक इसका कोई फायदा आजमनगर के लोगों को नहीं मिल पाया है।
लोग परेशान हैं कि घरों से निकलने वाला पानी चोक पड़ी नालियों में गिरने के बाद गलियों में फैल रहा है। कबूतर चौक के पास से आजमनगर में प्रवेश करते ही बजबजाती नालियां नगर निगम की सफाई व्यवस्था का सच बयां कर देती हैं। साफ दिखता है कि यहां चल रही अवैध डेयरियों से निकलने वाला गोबर नालियों में बुरी तरह भरा हुआ है, जिससे उनमें पानी के बहाव की गुंजाइश ही नहीं बची है।
हरी मस्जिद की तरफ बढ़ने पर तंग गलियों में भी नालियां जाम हैं। कहीं-कहीं नाली दिखती ही नहीं है। घरों के बाहर बैठे एक बुजुर्ग नालियों की तरफ इशारा करके कहते हैं, देख लें यह हालत है। नाली का पानी ठहरा तो घरों और गलियों का पानी कहां जाएगा। मस्जिद के पास सड़क तो बनी लेकिन नालियां नहीं है। वार्ड में पार्क के नाम पर कोतवाली के पास सामने वाला आंबेडकर पार्क है। तंग गलियों के बीच घर के आगे खाली जगह ही बच्चों का खेल मैदान है।
कागजों में ही रह गए स्मार्ट सिटी के काम
स्मार्ट सिटी में चुने जाने के बाद आजमनगर वार्ड में कई काम कराने का प्रस्ताव बना था लेकिन इन पर क्रियान्वयन ही नहीं हो पाया। सरायखाम से कुमार टॉकीज तक सड़क का सौंदर्यीकरण होना था लेकिन अब तक इसकी शुरुआत ही नहीं हुई है। इसी तरह गोल मार्केट में ओपन जिम बनाया जाना था जो नहीं बना। स्मार्ट सिटी के तहत हजरत बहादुर शाह वाली रोड और नाली भी नहीं बनी। पानी की पाइप लाइन पड़ी है लेकिन उसे चालू नहीं किया गया। पुरानी पाइप लाइन से ही गंदा और बदबूदार पानी आ रहा है।
सड़कें बनी हैं, लेकिन पीने के पानी की बहुत ज्यादा दिक्कत है। गंदा पानी आता है। कबूतर चौक के पास नाला और नाली दोनों बंद रहती है। गोबर नालियों में फंस जाता है। कहीं-कहीं नालियां बंद हैं--- मो. अनीस।
जामुन वाली मस्जिद के पास सीवर चोक है। कर्मचारी डंडा मारकर सीवर चालू करते हैं, अगले दिन वही हालात हो जाते हैं। यहीं पार्षद का मायका भी है लेकिन उनकी गली में भी सीवर बजबजाता है--- बबलू।
पिछले पांच सालों में सीवर लाइन, पाइप लाइन और सड़कें बनीं है। सीवर लाइन जाम है, पानी पुरानी पाइप लाइन से ही आ रहा है। डलावघर के पास बना खाद बनाने का प्लांट अब तक चल नहीं पाया है--- बिलाल कुरैशी।
खिन्नी की मस्जिद के पास सड़क बनने का टेडर पिछले साल हो चुका है, लेकिन ठेकेदार बनाने नहीं आ रहे हैं। अस्पताल कॉलोनी समेत कई और सड़कें काफी खराब हो चुकी हैं। नई पड़ी सीवर लाइन जाम रहने से लोगों को खामियाजा भुगतना पड़ रहा है। वार्ड की 90 फीसदी सड़कें बनवाई हैं। नगर निगम में आर्थिक संकट न आता तो बचा काम भी हो जाता--- महलका कुरैशी, निवर्तमान पार्षद आजमनगर।
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