Kanpur News : अमृत योजना के वाटर प्रोजेक्ट पर लगा ग्रहण, शासन ने लगाई रोक, जानें- इसके पीछे की वजह
कानपुर में रैमकी कंपनी को ब्लैक लिस्ट करने के लिए लिखा पत्र।
कानपुर में रैमकी कंपनी को ब्लैक लिस्ट करने के लिए लिखा पत्र। इसके साथ ही 15 अप्रैल तक स्पष्टीकरण भी मांगा। जलनिगम ने कानपुर में पानी की सप्लाई को सुधारने को 368 करोड़ का प्रोजेक्ट भेजा था।
कानपुर, [अभिषेक वर्मा]। शहरों और कस्बों में बुनियादी सुधार और सुविधाएं पहुंचाने के लिए शुरू की गई अमृत योजना को उत्तर प्रदेश में युद्धस्तर पर लागू किया जा रहा है। लेकिन, शहर में इस योजना को बड़ा झटका लगा है। पानी की सप्लाई को दुरुस्त करने के लिए जलनिगम की ओर से भेजे गए प्रोजेक्ट पर शासन ने फिलहाल रोक लगा दी है। 368 करोड़ रुपये के मंजूर स्टीमेट को एसएलटीसी (राज्य स्तरीय तकनीकि समिति) ने विथहेल्ड कर कहा है कि पहले पुराने कार्यों को ही पूरा करा लिया जाए।
जवाहर लाल नेहरू राष्ट्रीय शहरी नवीकरण योजना (जेएनएनयूआरएम) पर 869 करोड़ रुपये खर्च हो चुके हैं। इसके बावजूद 15 साल बाद भी लोगों को इससे पानी नहीं मिल पा रहा है। जेएनएनयूआरएम योजना की वजह से जलनिगम द्वारा अमृत योजना के तहत बनाए गए 368 करोड़ रुपये के प्रोजेक्ट को फिलहाल रोक दिया गया है।
योजना पर रोक लगाते हुए शासन की राज्य स्तरीय तकनीकि समिति ने कहा है कि कानपुर में पहले ही पेयजल लाइनों को बिछाने के कार्य में बड़ी अनियमितता देखी गई है। पिछले 15 साल बाद भी रैमकी कंपनी ने काम पूरा नहीं किया है, और न ही इस योजना का जनता को इसका लाभ ही मिला है। ऐसे में नए योजनाओं में पैसा बहाने का कोई फायदा नहीं है। इसलिए पहले के काम ही पूरे कर लिए जाएं। हालांकि, अधिकारियों का मानना है कि इसे जल्द ही अनुमति मिलेगी।
जल निगम ने पानी की सप्लाई को दुरुस्त करने और घर-घर नल कनेक्शन के लिए अमृत योजना के तहत 368 करोड़ रुपये स्टीमेट अप्रूव्ड कराया था। जिसके तहत शहर के अलग-अलग क्षेत्रों में 300 किलोमीटर पाइप लाइन बिछाने, 12 ट्यूबवेल लगाने, 10 ओवर हेड टैंक (ओएचटी) बनाने का प्रस्ताव बनाया था। लेकिन, शासन स्तर से इसपर रोक लगा दी है।
रैमकी कंपनी पर कार्रवाई के लिए लिखा पत्र
जेएनएनयूआरएम योजना वर्ष 2007 में 869 करोड़ की लागत से शुरू हुई। जिसमें एक हजार किलोमीटर तक पाइप लाइन बिछाने समेत अन्य कार्य शामिल थे। इसमें गंगा बैराज पर 20-20 करोड़ लीटर के दो ट्रीटमेंट प्लांट बने। समय से कार्य नहीं होने और लापरवाही बरतने पर जल निगम के दो दर्जन अभियंताओं पर मुकदमा दर्ज किया जा चुका है। अधिकारियों के अनुसार अब तक महज 300 किमी तक ही लाइन बिछाई गई है। जबकि रैमकी कंपनी का दावा है कि काम पूरा हो चुका है। जलनिगम ने कंपनी को ब्लैक लिस्ट करने के लिए शासन को पत्र लिखा है। इसके साथ ही कंपनी को अपना जवाब देने के लिए 15 अप्रैल तक का समय दिया है।
इन क्षेत्रों में है समस्या
रविदास पुरम, रामादेवी, दबौली, गुजैनी, बाबुपूरवा, अजीतगंज, ढकना पुरवा, तात्या टोपे नगर, बर्रा, बर्रा विश्वबैंक, साकेत नगर, किदवई नगर, उस्मानपुर, कल्याणपुर, मिर्जापुर, पनकी, जूही गढ़ा, शिवकटरा, लाल बंगला, अहिरवां, मंगला विहार, सनिगवां, जाजमऊ, वाजिदपुर, श्यामनगर, विकास नगर, कल्याणपुर, गांधीग्राम आदि कई क्षेत्र शामिल हैं।
अमृत योजना के तहत 368 करोड़ रुपये का स्टीमेट मंजूर है। जिसको शासन को भेजा था, लेकिन वहां से रोक लगाने के साथ ही विचाराधीन है। इसका कारण पूर्व के कार्यों का पूरा न होना है। शहर में फीडरमैन न होने और रैमकी कंपनी इसके लिए जिम्मेदार है। रैमकी कंपनी को ब्लैक लिस्ट करने और उसका पंजीकरण निरस्त करने को शासन को पत्र लिखा है, इसके साथ ही 15 अप्रैल तक स्पष्टीकरण मांगा है।- बीके गर्ग, जीएम, जलनिगम
