Chitrakoot: सांसद ने किया तहसीलों के मानचित्रण का लोकार्पण, मंदाकिनी-पयस्वनी की रक्षा के लिए सभी को आगे आना होगा
चित्रकूट में सांसद ने किया तहसीलों के मानचित्रण का लोकार्पण।
चित्रकूट में सांसद ने तहसीलों के मानचित्रण का लोकार्पण किया। उन्होंने कहा कि मंदाकिनी-पयस्वनी की रक्षा के लिए सभी को आगे आना होगा।
चित्रकूट, अमृत विचार। मंदाकिनी-पयस्वनी पुनर्जीवन अभियान समिति के तत्वाधान में हुए कार्यक्रम में सांसद आरके सिंह पटेल ने जिले की चारों तहसीलों के वैज्ञानिक मानचित्रण का लोकार्पण किया। उन्होंने इस मानचित्रण को तथ्यात्मक बताया और कहा कि वह इसे सरकार के सामने प्रस्तुत करेंगे।
समिति के संस्थापक और रिमोट सेंसिंग अनुप्रयोग केंद्र में बतौर वैज्ञानिक काम कर चुके भैरोंपागा निवासी अश्वनी कुमार श्रीवास्तव ने अपनी टीम के साथ इस नक्शे को तैयार किया है। उन्होंने बताया कि उनको लंबे अरसे से महसूस हो रहा था कि जिले की चारों तहसीलों कर्वी, मऊ, मानिकपुर और राजापुर के वास्तविक परिसीमन की कोई तस्वीर नहीं है। ऐसे में उन्होंने इस नक्शे को बनाने की सोची। बताया कि यह नक्शा पूरी तरह से वैज्ञानिक है और तहसीलों की सीमाओं का भली-भांति रेखांकन करता है। मानचित्र में नदी के उद्गम स्थल से यमुना नदी के संगम तक के क्षेत्र का चित्रण किया गया है।
इस मौके पर सांसद ने कहा कि मानव जीवन के अस्तित्व को बचाने के लिए पयस्वनी, मंदाकिनी का संरक्षण आवश्यक है। उन्होंने कहा कि इस तरह का मानचित्रण जिले के विकास और पर्यावरण की रक्षा के लिए सहायक साबित होगा। मानिकपुर विधायक अविनाश चंद्र द्विवेदी ने कहा कि इस तरह के काम मानवसेवा और विकास के लिए सहायक साबित होते हैं। पूर्व राज्यमंत्री चंद्रिका प्रसाद उपाध्याय ने कहा कि मंदाकिनी की रक्षा के लिए सबको आगे आना चाहिए। उन्होंने मानचित्र को बहुपयोगी बताया।
जिलाध्यक्ष भाजपा चंद्रप्रकाश खरे ने कहा कि वह मंदाकिनी की सफाई और संरक्षण के लिए सरकार से हर संभव मदद दिलाने का प्रयास करेंगे। इस मौके पर डा. एसपी त्रिपाठी, प्रो. आरके शुक्ला, लल्लू राम शुक्ला, समाजसेवी अभिमन्यु सिंह, डा. प्रभाकर सिंह, शंकर दयाल पयासी, हीरालाल सोनी आदि वक्ताओं ने विचार रखे। कार्यक्रम का संचालन पिंकी श्रीवास्तव ने किया।
पर्यावरण बचाने के लिए करें ये प्रयास
इस मौके पर वैज्ञानिक अश्वनी कुमार श्रीवास्तव ने पर्यावरण और प्रकृति की रक्षा के लिए कुछ बिंदुओं पर ध्यान आकर्षित कराया। उन्होंने बताया कि नदी का सटीक सीमांकन कर उसके दोनों ओर 50 किमी तक पक्का निर्माण नहीं होने देना चाहिए। इसके अलावा पौधरोपण भी कराया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि वाटर स्पोर्ट्स की सुविधा और पुलघाट से रामघाट तक स्टीमर का संचालन किया जाए तो यहां पर्यटन को बढ़ावा दिया जा सकता है।
