Hardoi Corona News : 22 पर पहुंचा संक्रमितों आंकड़ा, अभी भी प्रशासन जरूरी नहीं समझ रहा मॉक ड्रिल
हरदोई, अमृत विचार। कोरोना की रफ्तार लगातार बढ़ती जा रही है। अभी तक 15 केस सामने आ चुके थे। लेकिन गुरुवार को आरटी-पीसीआर के 7 पाज़िटिव केस और आ जाने से उसका आंकड़ा 22 पर पहुंच चुका है। माना जा रहा है कि अगर पाज़िटिव केस सामने आने की ऐसी ही रफ्तार रही तो गुज़र चुका कठिन दौर फिर वापस लौट सकता है।
रफ्ता-रफ्ता शुरू हुई कोविड-19 की रफ्तार तेज़ हो चुकी है। कल तक 15 आरटी-पीसीआर पाज़िटिव केस सामने आ चुके थे। उसके अगले दिन गुरुवार को 7 और केस बढ़ने से उसका आंकड़ा 22 पर पहुंच चुका है। इनमें कछौना और मल्लावां ब्लाक में एक-एक,सुरसा और माधौगंज ब्लाक में दो-दो पाज़िटिव केस आए हैं। वहीं एक केस शहर में सामने आया। डा.राममनोहर लोहिया इंस्टीट्यूट लखनऊ से दो और बीएसएल-2 लैब सीएचसी सुरसा से चार और एक पाज़िटिव रिपोर्ट निजी डायग्नोस्टिक सेंटर की बताई जा रही है। सोंचने वाली बात है कि आखिर कोविड-19 का ग्राफ इतनी तेज़ी से कैसे बढ़ रहा है ? ज़ाहिर बात है कि इसके लिए गांव से ले कर गवर्नेंस कहीं न कहीं पर ज़िम्मेदार है। हालांकि सरकार ने पहले ही आगाह कर दिया था कि माक्स और सोशल डिस्टेंस ज़रूरी है। जारी की जा चुकी गाइडलाइन में और भी तमाम तरह की बातों अलर्ट किया जा चुका है। इस तरह से पाज़िटिव केस के बढ़ने से एक बात तो साफ हो चुकी है कि इसमें कहीं न कहीं से कोई चूक या लापरवाही ज़रूर हो रही है। कहा जा रहा है कि अगर ऐसा ही रहा तो गुज़र चुका कठिन दौर फिर दोबारा वापस आ सकता है।
यहां होती है मॉक ड्रिल
मॉक ड्रिल एक तरह से रिहर्सल होता है कि किसी इमरजेंसी या महामारी से कैसे निपटा जाए ? कहां-कहां होती है मॉक ड्रिल ? नियमों के मुताबिक अस्पतालों के अलावा स्कूल-कालेज, अपार्टमेंट, कल-कारखाने और ऐसे संगठन जहां भीड़ रहती है वहां मॉक ड्रिल की जाती है। लेकिन ज़िले में अभी कहीं भी अस्पतालों के अलावा दूसरे ठिकानों को छुआ तक नहीं गया है।
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