अयोध्या: अंधाधुंध विकास के ‘पथ’ पर छांव कहां मिलेगा साहब!
रामपथ पर चिह्नित 500 में से अब 300 से अधिक काटे जा चुके हैं पेड़
नहीं सुनाई पड़ेगी पक्षियों की चहचहाहट, ठेले-खुमचे वालों के लिए बुरे दिन
इंदु भूषण पांडेय, अयोध्या। राममंदिर के निर्माण से दुनिया भर के रामभक्त गदगद हैं। इसलिए अयोध्या को त्रेतायुग वाला लुक देने के लिए तमाम कवायदें चल रही हैं। यहां विकास की गंगा उतारने के लिए लगातार धनवर्षा हो रही है, लेकिन इन सबके बीच एक बात खाए जा रही है कि रामनगरी में निर्माणाधीन पथों के निर्माण के दौरान पुराने पेड़ों की अंधाधुंध कटाई के बाद क्या होगा? सआदतगंज से नयाघाट तक 13 किलोमीटर वाले रामपथ पर ही 500 चिह्नित पेड़ों में से लगभग 300 छोटे-बड़े पेड़ काटे जा चुके हैं। अब इस मार्ग पर छांव के लिए ठौर न के बराबर है।
मई-जून जैसे महीने में 48 डिग्री तापमान के बीच आदमी कहां रुकेगा? पेड़ों के न होने से चिड़ियों की चहचहाहट भी नहीं सुनाई पड़ेगी। प्रदूषण को रोकना मुश्किल होगा। हालांकि भविष्य में डेवलपमेंट जरूर हाथ आएगा, लेकिन कोरोना काल के दौरान वह मंजर मत भूलें जब हर कोई पेड़ों के महत्व को समझकर उन्हें बचाने व लगाने की दलीलें दे रहा था।
अयोध्या में इन दिनों चौड़ीकरण का कार्य तेज गति से चल रहा है। रामपथ (सआदतगंज से नयाघाट), भक्तिपथ (श्रृंगारहाट से जन्मभूमि तक), जन्मभूमि पथ (सुग्रीव किला से रामजन्मभूमि तक) व धर्मपथ (बाईपास से नयाघाट तक) पर लगातार काम चल रहा है। जरूरी है कि आने वाले दिनों यहां पहुंचने वाले पर्यटकों को किसी भी प्रकार की दिक्कतों का सामना न करना पड़े।
इसलिए सड़कों का चौड़ा होना अत्यंत आवश्यक है, लेकिन पेड़ों का महत्व भी ध्यान रखना होगा। बताते हैं कि निर्माणाधीन पथों व चौड़ीकरण के दौरान जितने भी पेड़ काटे जाएंगे। उनके बदले पीडब्ल्यूडी ने वन विभाग को बड़ी कीमत अदा कर दी है, लेकिन बड़ा सवाल यह है कि अब जो पेड़ लगाए जाएंगे उनका संरक्षण क्या ठीक ढंग से हो सकेगा।
अगर पेड़ के बदले पेड़ लगाए जाएंगे तो वह कितने दिन में छायादार हो सकेंगे। विशेषज्ञों के मुताबिक एक पेड़ लगभग 15 से 20 साल में छायादार होता है। ऐसे में रामपथ समेत तमाम पथों पर दिन में ठेला-खुमचा लगाने वाले लोग कहां खड़े होंगे?
प्रति व्यक्ति को सलाना 5 करोड़ की मुफ्त ऑक्सीजन देते हैं पेड़
डॉ. राम मनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय के पर्यावरण विज्ञान विभाग के प्रोफेसर डॉ. जसवंत सिंह बताते हैं कि प्रकाश होने के बाद ही पेड़ ऑक्सीजन का उत्सर्जन करते हैं। मनुष्य को सांस लेने में प्रतिदिन 350 लीटर ऑक्सीजन की जरूरत पड़ती है। कोरोना काल के दौरान ही 50 लीटर का सिलेंडर दस-दस हजार में बिका।
एक दिन में ही कोरोना मरीजों को 50 लीटर वाले तीन से चार सिलेंडर की जरूरत पड़ रही थी। इस हिसाब से अगर दिन महीने साल का एवरेज निकालें तो लगभग पेड़ों से हमें प्रतिवर्ष 5 करोड़ रुपये की ऑक्सीजन मिलती है। उनका मानना है कि पेड़ जितना पुराना होगा। उतनी ही अच्छी ऑक्सीजन देता है। ज्यादा पत्तियों व मोटे पेड़ भी अच्छी ऑक्सीजन देते हैं। पीपल-बरगद जैसे पैड़ ऑक्सीजन का अच्छा स्रोत हैं।
जानिए, क्यों आवश्यक हैं पेड़
पेड़ से हमें फल, फूल, लकड़ी और प्राण वायु ऑक्सीजन मिलती है। पेड़ भूमि के तापमान को नियंत्रित करने में सहायक होते हैं। पेड़ हानिकारक कार्बनडाई ऑक्साइड को अवशोषित करते है और ऑक्सीजन देते हैं। ऑक्सीजन के बिना पृथ्वी पर कोई भी प्राणी जीवित नहीं रह सकता है। प्रदूषण की रोकथाम के लिए पेड़ आवश्यक हैं। नदियों के लिए पेड़ लाभदायक हैं।
पेड़ों से हमें ऑक्सीजन हीं नहीं मिलती बल्कि छांव व फल भी मिलते हैं। पशु-पक्षियों का ठिकाना बना रहता है। रामपथ, भक्तिपथ, धर्मपथ व जन्मभूमि पथ पर जितने भी पेड़ कटे हैं। उन्हें लगवाया जाएगा। साथ ही उनके संरक्षण की भी व्यवस्था होगी..सत्य प्रकाश श्रीवास्तव, सदस्य, जिला पर्यावरण संरक्षण समिति।
रामपथ पर जो भी पेड़ कटे हैं उनकी जगह नए पेड़ लगाए जाएंगे। जगह होगी तो रामपथ पर ही नहीं तो कहीं अलग शिफ्ट किये जाएंगे। विभाग का पूरा प्रयास रहेगा पेड़ों को अधिक से अधिक लगाया जाए।
केएन सुधीर, एसडीओ, वन विभाग
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