विश्व धरोहर दिवस : औद्योगिक धरोहर सहेजने की हुई पहल, उद्यमियों ने दिया इंडस्ट्रियल हेरिटेज, पढ़ें- पूरी खबर

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Edited By Amrit Vichar
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विश्व धरोहर दिवस आज के दिन ही मनाई जाती।

औद्योगिक एवं ऐतिहासिक दृष्टि से समृद्ध शहर में जहां एक ओर आकर्षक पर्यटन स्थल विकसित किए जा रहे हैं, वहीं पुरानी धरोहरें लगातार नष्ट होती जा रही हैं।

अंग्रजों के शासन काल के दौरान भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के प्रथम सेनानायक नाना साहब पेशवा की शरण स्थली कानपुर के बिठूर में स्थित पेशवा महल अब खंडहर में तब्दील हो चुकी है, जिसे पुरातत्व विभाग ने संरक्षित करते हुए आम लोगों के प्रवेश पर रोक लगा दी है। झकरकटी पुल के निकट बना कानपुर का पुराना रेलवे स्टेशन से कलकत्ता, बॉम्बे के रूट की ट्रेनों का आवागमन हुआ करता था। वर्ष 1924 में  घन्टाघर, कैंट साइड में कानपुर सेंट्रल स्टेशन के बनने से पुराना रेलवे स्टेशन से रेल का संचालन बंद हो गया। पुराना रेलवे स्टेशन में रेल लाइन, प्लेटफार्म और रेल के अवशेष अभी भी मौजूद हैं। रिजर्व पुलिस लाइन के मुख्य द्वार पर रखी वर्ष 1880 की निर्मित तोप जो राहगीरों व शहरवासियों के आकर्षण का केंद्र बनी है। देश-विदेश में कानपुर का नाम रोशन करने वाली द ब्रिटिश इण्डिया कारपोरेशन लिमिटेड कानपुर वूलेन मिल्स ब्रांच यानि लालइमली जो बंद कर दी गई अब निशानी के तौर पर सिर्फ इमारत खड़ी है। ये धरोहर अब खंडहर भले ही हो गईं लेकिन कानपुर वासियों की विरासत बनी है। फोटो - मनोज तिवारी

कानपुर, अमृत विचार। औद्योगिक एवं ऐतिहासिक दृष्टि से समृद्ध शहर में जहां एक ओर आकर्षक पर्यटन स्थल विकसित किए जा रहे हैं, वहीं पुरानी धरोहरें लगातार नष्ट होती जा रही हैं। इसे देखते हुए  उद्यमियों ने मंडलायुक्त और जिलाधिकारी को ‘इंडस्ट्रियल हेरिटेज पार्क’ स्थापित करने का प्लान सौंपा है। इस पार्क में बंद होने के बाद खंडहर होती जा रही सूती मिलों की अनुकृति (रेप्लिका) स्थापित करने की योजना बनाई गई है।

लाल इमली, स्वदेशी मिल, लक्ष्मीरतन कॉटन, म्योर मिल, न्यू विक्टोरिया मिल, अथर्टन मिल, कानपुर जूट उद्योग, जेके रेयान समेत एक दर्जन मिलों की अनुकृति बनाकर उसमें इन मिलों के इतिहास का उल्लेख किया जाएगा। इसमें यूपी चैम्बर ऑफ कॉमर्स, बीआईसी सदरलैंड की अनुकृति भी होगी। यह प्रस्ताव प्रोविंशियल इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष मनोज बंका ने उद्योगबन्धु की बैठक में डीएम को सौंपा था। 

दरअसल, कानपुर का पर्यटन की दृष्टि से अधकचरा विकास हुआ है। बदलते समय के साथ अब ऐतिहासिकता संजोए स्थलों की विकास योजनाओं पर कार्य चल रहा है। रामायण थीम पार्क, अटल घाट, बोट क्लब, बॉटनिकल पार्क, घाटमपुर के चर्चित मंदिर और शहर के पुराने स्टेशन को पर्यटन के लिहाज से तैयार करने की बात चल रही है। इस संबंध में सांसद सत्यदेव पचौरी कहते हैं कि गंगा बैराज, बॉटनिकल गार्डन की भूमि पर गंगा जैव विविधता पार्क का निर्माण कराने की योजना है। इसी तरह अटल घाट के पीछे 32 एकड़ में गंगा थीम पार्क की स्थापना होनी है।

इसमें गंगा की पौराणिकता के साथ वर्ष 1857 की क्रांति से जुड़ा इतिहास भी लोग जान सकेंगे। करीब 50 एकड़ में बॉटनिकल गार्डन बनाने की योजना है, जिसमे औषधीय पौधे होंगे। मोतीझील के तुलसी पार्क में रामायण थीम पार्क में लेजर लाइट शो से त्रेतायुग जीवंत दर्शन कराने की योजना कछुआ चाल में है। घाटमपुर स्थित गुप्तकालीन और जगन्नाथ मंदिर को पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने पर काम चल रहा है।

बिठूर में लवकुश आश्रम, वाल्मीकि आश्रम, पेशवा और रानी लक्ष्मीबाई के इतिहास से लोगों को परिचित कराने की योजना है। ग्रीन पार्क में विजिटर्स गैलरी शुरू हो चुकी है। टाट मिल के निकट 135 वर्ष पुराने रेलवे स्टेशन को भी पर्यटक स्थल बनाया जाना है। इसे वर्ष 2002 में रेलवे ने धरोहर घोषित किया था।
इन खंडहरों का इतिहास बुलंद है...

 

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