नगर निकाय चुनाव: डॉ. तोमर बनाम संजीव सक्सेना..! तो सपा के दो प्रत्याशी, एक घोषित दूसरा अघोषित
बरेली, अमृत विचार। राजनीति में चौंकाने वाले घटनाक्रम होते ही रहते हैं लेकिन निकाय चुनाव की नामांकन प्रक्रिया के दौरान मंगलवार को समाजवादी पार्टी में हुई घटना ने पार्टी के आम कार्यकर्ताओं को ही नहीं, दूसरे राजनीतिक दलों को भी झटका दे दिया। सपा की ओर से संजीव सक्सेना को बरेली में मेयर पद का प्रत्याशी घोषित किए जाने के बाद पूर्व मेयर आईएस तोमर के लिए बतौर निर्दलीय प्रत्याशी नामांकन खरीदते ही बरेली की राजनीति में हलचल शुरू हो गई। इसके बाद सवाल उठना शुरू हो गया कि समाजवादी पार्टी अपना प्रत्याशी बदलेगी या फिर डॉ. तोमर चुनाव में दूसरे प्रत्याशियों के साथ अपनी भी पार्टी को टक्कर देंगे।
समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने तीन दिन पहले ही बरेली में मेयर पद के लिए संजीव सक्सेना को प्रत्याशी घोषित कर दिया था। मंगलवार को संजीव सक्सेना के लिए बतौर सपा प्रत्याशी नामांकन पत्र भी खरीद लिया गया। इसके कुछ ही देर बाद सपा के वरिष्ठ नेता व पूर्व मेयर डॉ. आईएस तोमर के लिए नामांकन पत्र खरीदे जाने की खबर फैली तो सियासत गरमा गई है। यह सवाल आम बहस का हिस्सा बन गया कि क्या सपा के लिए मेयर का चुनाव संजीव बनाम डॉ. तोमर के बीच जंग बनकर रह जाएगा।
डॉ. तोमर के लिए पर्चा खरीदे जाने के बाद सपा में प्रत्याशी बदलने की चर्चा भी शुरू हो गई। आम सपा कार्यकर्ताओं में ही नहीं, दूसरी पार्टियों में भी अटकलें लगती रहीं कि डॉ. तोमर अंत तक निर्दलीय ही रहेंगे या सपा के टिकट पर मैदान में उतरेंगे। बता दें कि डॉ. तोमर के लिए आलमगीरीगंज में रहने वाले पूर्व पार्षद मुनीश शर्मा ने पर्चा खरीदा है। सपा प्रत्याशी संजीव के लिए चमन मठिया के पास मलूकपुर में रहने वाली कुमारी संजू ने नामांकन पत्र खरीदा है। संजीव के बेटे सागर सक्सेना के नाम से भी संजू ने पर्चा खरीदा है।
निर्दलीय ही जीता था 2002 और 2012 का चुनाव
डॉ. तोमर इससे पहले भी 2000 और 2012 में भी बतौर निर्दलीय चुनाव लड़कर मेयर निर्वाचित हुए थे। 2012 में समाजवादी पार्टी ने उनका टिकट काटा था तो वे कथित तौर पर बगावत कर चुनाव मैदान में कूदे थे और चुनाव जीतने के बाद समाजवादी पार्टी में शामिल हो गए थे। निर्दलीय मेयर बनने का पुराना इतिहास देखते हुए इस बार फिर निर्दलीय के तौर पर नामांकन पत्र खरीदने को सपा की रणनीति भी माना जा रहा है। उधर, संजीव सक्सेना को टिकट देने का आधार शहर में कायस्थ वोटों की संख्या को माना गया था। कायस्थ मतदाताओं का रुझान कई चुनावों से भाजपा की ओर है, लिहाजा माना गया था कि पार्टी ने संजीव सक्सेना को टिकट देकर उन्हें भाजपा से काटने की रणनीति बनाई है। यहां यह भी तथ्य महत्वपूर्ण है कि 2017 में सपा उम्मीदवार के तौर पर मेयर का चुनाव लड़े डॉ. तोमर सिर्फ करीब 12 हजार वोटों से हार गए थे।
मेयर पद के लिए अब तक 11 नामांकन पत्र बिके
मंगलवार को निर्दलीय प्रत्याशी डॉ. विनीता रानी के लिए उनके पति शास्त्रीनगर निवासी भूपेंद्र कुमार मौर्य ने पर्चा खरीदा। इसके अलावा गणेशनगर निवासी राजेश कुमार, कांकरटोला निवासी राकेश बाबू और जोगीनवादा निवासी मोहम्मद सरताज अली ने भी मेयर पद के लिए मंगलवार को नामांकन पत्र खरीदा है। सपा और कांग्रेस के प्रत्याशियों के अलावा अब तक नौ और निर्दलीय दावेदारों ने नामांकन पत्र खरीदे हैं। इसके बाद कुल संख्या 11 हो गईहै। बसपा और भाजपा के प्रत्याशियों के नाम की घोषणा अभी नहीं हुई है। नामांकन 24 अप्रैल तक होने हैं। माना जा रहा है कि अभी कई और निर्दलीय चेहरे मैदान में दिखाई दे सकते हैं।
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