Fatehpur: निकाय मतदान से पहले सपा नेता हाजी रजा जिला बदर, समर्थकों के साथ पहुंचे कोर्ट, पुलिस ने कस्टडी में लिया

Amrit Vichar Network
Edited By Amrit Vichar
On

फतेहपुर में निकाय मतदान से पहले सपा नेता हाजी रजा जिला बदर।

फतेहपुर में निकाय मतदान से पहले सपा नेता हाजी रजा जिला बदर। समर्थकों के हुजूम के साथ एडीएम न्यायिक कोर्ट पहुंचे रजा को पुलिस ने कस्टडी में लिया।

फतेहपुर, अमृत विचार। सदर नगर पालिका की निवर्तमान चेयरपरसन नजाकत खातून के सभासद बेटे हाजी रजा को मंगलवार जिला बदर कर दिया गया। सपा नेता रजा को पुलिस कानपुर रूट पर छिवली नदी तक छोड़ने गई। उधर, निकाय चुनाव से ठीक पहले हुई इस कार्रवाई को सपा नेता ने भाजपा की देन करार दिया। उन्होंने कहा कि भाजपा ने विकास से डर कर इस तरह की कार्रवाई को अंजाम दिलाया। उन्हेांने जिला बदर के बाद हत्या तक कराए जाने का अंदेशा जताया।  

22 नवंबर 2021 को भाजपा अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ के नेता फैजान रिजवी पर हमला हुआ था। रिजवी ने 15 से 20 समर्थकों के साथ पनी में रहने वाले निकाय सियासत के सिरमौर नेता हाजी रजा पर जानलेवा हमला व लूटपाट का आरोप लगाया था। जिस पर पुलिस ने कई अन्य धाराओं में भी मुदकमा लिखा था। इसी के बाद चेयरपरसन प्रतिनिधि हाजी रजा पर गैँगेस्टर की कार्रवाई हुइ थी।

पुलिस ने 16 मार्च को गुंडा एक्ट का नोटिस तामील किया था। जिसके बाद 11 अप्रैल को एडीएम न्यायिक धीरेंद्र प्रताप सिंह की कोर्ट में हाजी रजा पेश हुए थे। जिन्हें कोर्ट ने पक्ष रखने का मौका दिया था। इस मामले में सोमवार को सुनवाई हुई लेकिन हो हल्ला के कारण कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया था। इससे साफ था कि सपा नेता का जिला बदर होना तय है।

मंगलवार की सुबह से यह प्रकरण जिले की सुर्खियां बन चुका था। देापहर चार बजे के करीब सपा नेता व निवर्तमान सभासद हाजी रजा पटेल नगर स्थित सपा के चुनावी कार्यालय पहुंचे। सपा जिलाध्यक्ष सुरेंद्र सिंह यादव की मौजूदगी में समर्थकों के हुजूम के साथ जिला बदर किए गए रजा कोर्ट पहुंचे। जहां से पुलिस उन्हें बिठाकर कानपुर की ओर ले गई।

उधर, जिला बदर होने से पहले रजा ने इस कार्रवाई को सियासी नाम दिया। कहा कि मां नजाकत खातून के कार्यकाल में हुए विकास से डर गई थी। सपा नेता ने चार महीने पहले जताए गए खुद के अंदेशे को मीडिया से शेयर करते हुए कहा कि उन्होंने हत्या तक कराने का अंदेशा जताया था। जिला बदर के बाद उनकी जान को खतरा बना रहेगा। अगर ऐसा होता है तो इसकी जिम्मेदारी जिला प्रशासन पर होगी।

रजा पर हुई कार्रवाई से उल्टा पड़ सकता है भाजपा का दांव

सपा नेता व इस चुनाव में सपा से सदर सीट के प्रबल दावेदार हाजी रजा को जिला बदर किए जाने का खामियाजा भाजपा को भुगतना पड़ सकता है। जिस तरह से ऐन चुनाव से पहले उन पर कार्रवाई को अंजाम दिया गया है। उससे मुस्लिम व बैकवर्ड वोटर का तालमेल इस सत्तारूढ़ दल के गले की फांस बन सकता है।

भाजपा ने सपा को घेरने के लिए जो हथकंडा अपनाया है। वह राजनीति की जरा सी भी समझ रखने वाले को बताने की जरूरत नहीं है। 21 मुकदमों के वांछित रजा को सपा इस बार सदर नगर पालिका से उतारना चाहती थी। पिछला चुनाव रजा की मां नजाकत खातून ने जीता था। विकास के हुए कार्य से करीब तीन लाख की आबादी वाले शहर में सपा के पक्ष में बेहतर माहौल नजर आ रहा था।

जानकारों की माने तो मां की अध्यक्षी की बागडोर अपने हाथ पर रखकर शहर को पार्क से लेकर डिवाइडरयुक्त सड़क का तोहफा देने वाले रजा की यह कामयाबी भाजपा की राह में रोड़ा बन रही थी। सत्तारूढ़ पार्टी को ऐसा लग रहा था कि अगर रजा ने चुनाव लड़ा तो भाजपा को एक और हार नसीब होनी तय है।  यही कारण रहा कि भाजपा अपने अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ के नेता फैजान रिजवी के प्रकरण को लेकर सामने आ गई।

जानकारों का कहना है कि बेशक भाजपा ने सपा के एक जिताऊ उम्मीदवार को चुनाव मैदान से बाहर कर दिया है लेकिन यह हथकंडा उस पर भारी भी पड़ सकता है। ऐसा इसलिए है क्योंकि जिला बदर की कार्रवाई सामने आने के बाद मुस्लिम मतदाताओ में नाराजगी दिखाई दी। अगर बैकवर्ड का साथ सपा को मिलता है तो तो यह तालमेल सत्तारूढ़ पार्टी की हसरतों पर पानी फेर सकता है।

संबंधित समाचार