बरेली: रुहेलखंड में चिट फंड कंपनियों ने बिछाया ठगी का जाल

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बरेली,अमृत विचार। रुहेलखंड के शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में सक्रिय चिट फंड कंपनियां लोगों की गाढ़ी कमाई निवेश कराकर रफूचक्कर हो रही हैं। बीमा, निर्माण, कृषि, स्वास्थ्य तो कोई डिजिटल एप में अच्छे निवेश का लालच देकर ग्राहक फंसाता है। साल-दो साल तक तालमेल रखता और फिर कार्यालय बंद कर भाग जाता। ऐसे ही एक …

बरेली,अमृत विचार। रुहेलखंड के शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में सक्रिय चिट फंड कंपनियां लोगों की गाढ़ी कमाई निवेश कराकर रफूचक्कर हो रही हैं। बीमा, निर्माण, कृषि, स्वास्थ्य तो कोई डिजिटल एप में अच्छे निवेश का लालच देकर ग्राहक फंसाता है। साल-दो साल तक तालमेल रखता और फिर कार्यालय बंद कर भाग जाता। ऐसे ही एक कंपनी के एमडी को क्राइम ब्रांच ने हरियाणा के यमुनानगर से पकड़ा है।

चंडीगढ़ के मोहाली निवासी के परमिंदर सिंह और इंद्रजीत ने ‘मास्टर बैलेट’ ने पेटीएम की तर्ज पर एक एप बनाया और बरेली पहुंचे। यहां उन्होंने निवेशक ढूंढे। वर्ष 2018 में इस प्रोजेक्ट में शहर के एक डॉक्टर ने 20 लाख रुपये निवेश किए। वर्ष 2019 में उन्होंने धोखाधड़ी की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। इसी मामले में क्राइम ब्रांच ने कंपनी के पदाधिकारियों को गिरफ्तार किया है। क्राइम ब्रांच से मिली जानकारी के मुताबिक इससे पहले महाराष्ट्र की हेल्थ सॉल्यूशन प्राइवेट लिमिटेड नामक कंपनी ने भी कई लोगों से निवेश कराया था, जो बाद में भाग गई।

100 रुपये किश्त तक के बीमा पर छला
मथुरा की एक चिटफंड कंपनी ने बरेली, पीलीभीत और शाहजहांपुर में बीमा के नाम पर हजारों लोगों को अपने जाल में फंसाकर निवेश कराया। कंपनी ने खुद को एक निर्माण इकाई से जुड़ा दर्शाया। गांव-कस्बों में अपने एजेंट बनाए। जिन्होंने गरीब और मध्यम वर्गीय परिवार में बेटियों के बीमा कराए। अब वह कंपनी अपनी दुकान समेटकर भाग गई है और बीमित परिवार एजेंटों पर धनराशि वापस करने का दबाव बना रहे हैं।

बताए गए ठिकाने पर नहीं कंपनी का कार्यालय
ठगों ने हर क्षेत्र में अपना जाल बिछा रखा है। इसमें अप्रेंटिसशिप तक शामिल है। आटीआइ के छात्रों को अप्रेंटिशसिप का दायित्व निजी कंपनियों को मिलता है। जिन कंपनियों को यह कार्य मिला। शहर में दर्शाए गए पते पर उनका नामोनिशान नहीं है।

“मास्टर बैलेट प्रोजेक्ट में निवेश कराकर धोखाधड़ी मामले में कंपनी के एमडी समेत दो लोगों को हरियाणा से गिरफ्तार किया है। इससे पहले एक और कंपनी का मामला सामने आया था।” -सुरेंद्र कटियार, इंस्पेक्टर, क्राइम ब्रांच

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