बरेली: प्रत्याशियों पर मेहरबान हुए गुरुदेव... मतदान तक हर रोज दावत उड़ाने के साथ वोट मांगने का मौका

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Edited By Amrit Vichar
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उदय हुए बृहस्पति, मतदान के दिन 11 मई तक हर दिन मांगलिक कार्यों के लिए शुभ मुहूर्त, इसके बाद मतगणना की तैयारी और आराम के लिए चार दिन विराम

बरेली, अमृत विचार। निकाय चुनाव में किस्मत आजमा रहे प्रत्याशियों को गुरुदेव की कृपा से एक तीर से दो शिकार करने का मौका मिलने जा रहा है। रविवार को बृहस्पति के उदय होने के साथ अब उनके लिए शादी-ब्याह जैसे मांगलिक आयोजनों में दावत उड़ाने के साथ वोट का दावा पेश करना आसान हो जाएगा। दो मई से 11 मई को मतदान होने तक मांगलिक कार्यों के लिए लगातार शुभ मुहूर्त है, लिहाजा हर शाम उनके लिए उपयोगी साबित हो सकती है।

चुनाव लड़ने वालों के लिए बृहस्पति का उदय बड़े मौके से हुआ है। दरअसल, वैवाहिक मुहूर्त के लिए बृहस्पति का प्रभावी होने के साथ शुभ स्थान पर होना जरूरी होता है। बृहस्पति के उदय के साथ अब दो मई से विवाह के शुभ मुहूर्त भी शुरू हो जाएंगे।

ज्योतिषाचार्य पंडित रमाकांत दीक्षित के अनुसार 14 अप्रैल को खरमास खत्म हो गया था लेकिन बृहस्पति के अस्त होने के कारण मांगलिक कार्यों की शुरूआत नही हो सकी। अब 11 मई तक लगातार शुभ मुहूर्त हैं। यह भी संयोग है कि 11 मई के बाद अगला शुभ मुहूर्त 15 मई को है, लिहाजा चुनाव अभियान से निपटे प्रत्याशियों को इस बीच आराम के साथ मतगणना की तैयारी करने में भी कोई मुश्किल नहीं होगी।

ज्योतिषाचार्य के मुताबिक 15 मई से शुभ मुहूर्त बीच-बीच में एकाध दिन छोड़कर पूरे मई और फिर 28 जून तक रहेंगे। इसके बाद अधिमास लग जाएगा। फिर नवंबर से 16 दिसंबर कई शुभ मुहूर्त हैं। इसके बाद देवोत्थान एकादशी से मांगलिक कार्यों की शुरूआत होगी। इस बीच खरमास भी रहेगा।

धर्म शास्त्रों के अनुसार खरमास में कोई शुभ कार्य मंगलकारी और फलदायी नही होता। शुभ कार्य करने के लिए त्रिबल सूर्य, चंद्रमा, बृहस्पति) की आवश्यकता होती है। ये तीनों ग्रह जब उत्तम स्थिति में रहते हैं, तभी शुभ कार्य किए जाते हैं। इनमें से कोई भी ग्रह क्षीण या निस्तेज हो तो शुभ कार्य नहीं किए जाते। अगले महीनों में सबसे ज्यादा शुभ मुहूर्त चुनाव के महीने मई में ही हैं। नवंबर में सिर्फ पांच वैवाहिक मुहूर्त हैं।

ये हैं शुभ मुहूर्त : मई- 2, 3, 4, 5, 6, 7, 8, 9, 10, 11, 15, 16, 17, 20, 21, 22, 26, 27, 28, 29, 30, 31, जून- 1, 3, 4, 5, 7, 11, 12, 13, 16, 17, 22, 23, 25, 26, 27, 28, नवंबर- 23, 24, 27, 28, 29, दिसंबर- 1, 4, 5, 7, 9, 10, 11, 13, 14, 15, 16

तीन तिथियां स्वयंसिद्ध मुहूर्त
पशुपतिनाथ मंदिर के ज्योतिषाचार्य पंडित मुकेश मिश्रा ने बताया कि सनातन धर्म में साढ़े तीन मुहूर्त को अबूझ मुहूर्त की मान्यता दी गई है। इसमें किसी भी तरह का विचार किए बिना विवाह जैसे मांगलिक कार्य संपन्न किए जा सकते हैं। शास्त्राें के अनुसार विजयादशमी, अक्षय तृतीया और कार्तिक शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा का अर्द्धभाग, ये तीन तिथियां अबूझ मुहूर्त हैं और स्वयंसिद्ध मुहूर्त की श्रेणी में आती हैं। इन तिथियों पर विचार किए बिना विवाह, मुंडन, नामकरण, व्रत उद्यापन, गृहप्रवेश जैसे शुभ कार्य संपन्न किए जा सकते हैं।

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