हैकर्स को भी चकमा देगा छद्म सॉफ्टवेयर, IIT Kanpur के सीथ्रीआई हब के विशेषज्ञों ने किया तैयार, पढ़ें- पूरी खबर
आईआईटी कानपुर के सीथ्रीआई हब के विशेषज्ञों ने तैयार किए कई तरह के छद्म सॉफ्टवेयर।
आईआईटी कानपुर के सीथ्रीआई हब के विशेषज्ञों ने तैयार किए कई तरह के छद्म सॉफ्टवेयर। छद्म सॉफ्टवेयर हैकर्स को भी चकमा दे देगा। सॉफ्टवेयर से जुड़े सुरक्षातंत्र अलर्ट हो जाएंगे। अकाउंट या दस्तावेजों से छेड़छाड़ करने वालों को बेवकूफ बनाएंगे।
कानपुर, [शशांक शेखर भारद्वाज]। हैकर्स के बढ़ते खतरे को देखते हुए सुरक्षातंत्र मजबूत किए जा रहे हैं। मोबाइल, कंप्यूटर, लैपटॉप पर जारा सी चूक और असावधानी आपके बैंक खाते में सेंध लगा सकती है। सिर्फ यही नहीं सोशल मीडिया अकाउंट में छेड़छाड़ कर जान पहचान वालों से रुपये की मांग होती है। यह खतरा सरकारी कार्यालयों के साथ ही निजी संस्थानों पर मंडरा रहा है।
इसको रोकने के लिए आईआईटी कानपुर के विशेषज्ञों ने कई तरह के छद्म सॉफ्टवेयर विकसित किए हैं, जिनकी मदद से न सिर्फ साइबर अपराधियों के खतरनाक इरादों को रोका जा सकता है, बल्कि बाहर से आने वाले किसी भी तरह के मैलवेयर, बग, रेंसमवेयर को बेवकूफ बनाने में कारगर हैं। संस्थान के विशेषज्ञों की ओर से कई सरकारी संस्थानों से बातचीत चल रही है।
आईआईटी के सेंटर फॉर साइबर सिक्योरिटी एंड साइबर सिक्योरिटी ऑफ साइबर फिजिकल इनोवेशन (सीथ्रीआई) हब में कई तरह के टेस्टिंग बेड्स तैयार किए गए हैं, जहां पर ऑनलाइन मैलवेयर, बग, रेंसमवेयर को रोकने और उनको नियंत्रित करने वाले सॉफ्टवेयर और अन्य सिक्योरिटी फीचर्स पर टेस्टिंग होती है। यहां पर सैमसंग कंपनी की अत्याधुनिक लैब बनी है, जबकि कई अन्य तरह के अत्याधुनिक उपकरण हैं।
अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया की कंपनियों के साथ साइबर सिक्योरिटी पर काम चल रहा है। सेंटर के सहयोग से हनीट्रैप, एनकाउंटर, गो टू डक्ट समेत अन्य सॉफ्टवेयर बनाए गए हैं। इन सॉफ्टवेयर पर स्टार्टअप भी किया गया है।
खुद ही फंसते जाते हैं हैकर
हनीट्रैप नाम से सॉफ्टवेयर बनाने वाले शोधार्थी शुभाशीष के मुताबिक यह सॉफ्टवेयर मशीन लर्निंग, आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस से लैस है। अकाउंट या सोशल मीडिया में किसी भी तरह से हैकरों के प्रवेश से इसके सुरक्षातंत्र एक्टिव हो जाते हैं। यह एक तरह से आभासी रूप तैयार कर लेता है, जिसके जाल में स्वयं साइबर अटैक करने वाला फंस जाता है।
सरकारी कार्यालयों के लिए हो रहा कार्य
संस्थान का सीथ्रीआई हब प्रदेश के सरकारी कार्यालयों के सुरक्षातंत्र विकसित करने पर कार्य कर रहा है। इसके लिए कुछ साल पहले ही एमओयू साइन हो चुका है। साथ ही बैंक, ऑयल रिफाइनरी, बिजली सिस्टम को सुरक्षित किया जा रहा है।
सीथ्रीआई हब के सहयोग से शोधार्थियों और पूर्व छात्रों ने कई तरह के सॉफ्टवेयर विकसित किए हैं। यह साइबर हमलों को अलग तरीके से रोकने में कारगर हैं। कुछ कंपनियों और संस्थानों के साथ उनकी बातचीत जारी है।- पद्मश्री प्रो. मणींद्र अग्रवाल, निदेशक सीथ्रीआई हब
