मुरादाबाद : रिलीज से पहले विवादों में घिरी 'द केरल स्टोरी', जानिए क्या बोले सपा सांसद डॉ. एसटी हसन?

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Edited By Amrit Vichar
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मुरादाबाद, अमृत विचार। आगामी 5 मई को सिनेमाघरों में रिलीज हो रही फिल्म 'द केरल स्टोरी' विवादों में घिर गई है। फिल्म में कथित तौर पर केरल की उन हजारों लड़कियों की कहानी है, जिसका ब्रेनवॉश करके पहले धर्म परिवर्तन कराया गया और फिर ISIS आतंकी बना दिया गया। फिल्म के कंटेंट के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल गई है। मूवी पर रोक लगाने की मांग है। हालांकि कहानी के आंकड़ों को कुछ लोग हवा-हवाई बता रहे हैं। फिल्म रिलीज होने से पहले नेताओं की बयानबाजी भी शुरू हो गई है। कुछ लोग इसे कर्नाटक चुनाव से जोड़कर भी देख रहे हैं। मुरादाबाद से समाजवादी पार्टी के सांसद डॉ. एसटी हसन ने बयान दिया है।

'हरामकारी करने वालों को पत्थरों से मार देना चाहिए'
सांसद डॉ. एसटी हसन ने कहा की अगर ये फिल्म  'द केरल स्टोरी' हकीकत नहीं है तो ये बहुत गलत है। इंसान और इंसानियत के साथ ऐसा नहीं होना चाहिए। एसटी हसन ने इस्लाम का हवाला देते हुए कहा की फिल्म में ये कौन से मुस्लमान दिखाए गए हैं जो बोल रहे हैं की जरूरत पड़े तो प्रेगनेंट कर दो? इसकी इजाजत इस्लाम नहीं देता। ये हरामकारी है। हरामकारी करने वालों को पत्थरों से मार देना चाहिए। उन्होंने कहा की अगर कोई मर्जी से इस्लाम से मतासिर होकर मुस्लिम होना चाहता है तो कोई हर्ज नहीं है। उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि एक प्रोगंडा चल रहा है की मुस्लमान लड़कियों को बहला फुसलाकर धर्म परिवर्तन कर उनसे शादी की जा रही है। 4-5 लाख रुपए के इनाम दिए जा रहे हैं। उन्होंने कहा की वो आग्रह करते हैं की एक डाटा मुस्लिम लड़कियों का भी निकाला जाए की कितनी मुस्लिम लड़कियों को धोखा देकर निकाह कर लिया और उन्हें प्रोत्साहन करने वालों को कितना इनाम दिया जा रहा है। इसपर भी रिसर्च हो और एक फिल्म बननी चाहिए। 

'सुप्रीम कोर्ट सोच समझकर फैसले लेता है, उसके लिए न कोई हिंदू है न मुस्लमान' 
फिल्म के दृश्य में दिखाए जा रहे केरल राज्य को मुस्लिम राज्य बनाने के सवाल पर एसटी हसन ने कहा की ये सब पॉलिटिक्स है। उन्होंने कहा की जो भगवा ब्रिगेड है इसने हमेशा भोले-भाले हिंदुओं को ये बताया की मुस्लिम बहुसंख्यक हो जाएंगे। जबकि हकीकत यह है कि ये डराने की राजनीति है। उन्होंने एक रिसर्च का हवाला देते हुए कहा की अगर मुस्लिम फैमिली प्लानिंग करें और हिंदू फैमिली प्लानिंग न करें तो दो हजार साल तक भी मुस्लमान को हिंदू भाइयों की बराबर आने में दो हजार साल लगेंगे। उन्होंने फिल्म रिलीज होने वाले सवाल पर कहा की इसमें अगर कुछ सही है तो ये काम सरकार का है उसे देखें और अगर मुसलमानों के लिए नफरत पैदा करने के लिए बनाई गई है तो इसपर बैन लगना चाहिए। उन्होंने कहा की सुप्रीम कोर्ट को फिल्म बैन पर पुनर्विचार करना चाहिए और फिल्म को बैन करना चाहिए, क्योंकि हमें मालूम है सुप्रीम कोर्ट सोच समझकर फैसले लेता है उसके लिए न कोई हिंदू है न मुस्लमान है।

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